येसु वाजां मारदा Lyrics song
yeshu vaja marda Lyrics
येसु वाजां मारदा Lyrics song
येसु वाजां मारदा-येसु वाजां मारदा
दुखियां लचारां नू येसू वाजां मारदा
कोड़ियां बीमारां नू येसू वाजां मारदा
केहंदा आ जाओ शिफा लै लो, मैं मुल्ल तुहाडा
तारदा येसु वाजां मारदा………
1. मेरे तों इलावा केहंदा, होर ना कोई आउणा ऐ
मैं ही मिटाऊणा तुहाडा, जो वी रोना-धोणा ऐ
सुनो गल्ल मेरी केहंदा मैं हां आर-पार दा
येसु वाजां मारदा……….
2. मैं ते कुर्बानी केहंदा तुहाडे लई ही दित्ती ऐ
मेरे तों बगैर तुसीं सारे जणे मिट्टी ऐ
आजो मेरे बाड़े विच्च मैं हां तुहानू चारदा
येसु वाजां मारदा……….
3. भुक्खे ते प्यासेयां लई रोटी ते मैं पानी हां
जेहड़ा मैंनू खावे पीवे ओह जान मैं बचाऊंणी हां
चक्खो अत्ते वेखो, पता लग्गू मेरे प्यार दा
येसु वाजां मारदा………..
गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल वचन
1. प्रभु का निमंत्रण: दुःखियों और बीमारों के लिए गीत की मुख्य पंक्ति “येसु वाजां मारदा” प्रभु की उस पुकार को दर्शाती है जो वह मानवता को देते हैं। वह केवल स्वस्थ लोगों के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए आए हैं जो लाचार हैं और जिन्हें चंगाई (शिफा) की जरूरत है। वह कहते हैं कि उन्होंने हमारा “मुल्ल” (कीमत) चुकाया है।
- मत्ती 11:28 – “हे सब परिश्रम करने वालो और बोझ से दबे लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।”
- 1 पतरस 2:24 – “वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया, जिससे हम पापों के लिये मरकर धार्मिकता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।”
- 1 कुरिन्थियों 6:20 – “क्योंकि तुम दाम देकर मोल लिए गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।”
2. एकमात्र मार्ग और आंसुओं को पोंछने वाला गीत के पहले अंतरे में यीशु कहते हैं कि उनके अलावा कोई और नहीं आएगा जो मनुष्य के दुखों और आंसुओं को मिटा सके। वह स्वयं को “आर-पार दा” (सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी) बताते हैं। बाइबल स्पष्ट करती है कि स्वर्ग के नीचे उद्धार का कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है।
- यूहन्ना 14:6 – “यीशु ने उससे कहा, ‘मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता’।”
- प्रेरितों के काम 4:12 – “और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।”
- प्रकाशितवाक्य 21:4 – “वह उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं।”
3. महान बलिदान और सच्चा चरवाहा दूसरे अंतरे में यीशु के बलिदान का उल्लेख है। वह कहते हैं कि उनके बिना मनुष्य “मिट्टी” के समान है (अर्थात नश्वर और अर्थहीन)। वह हमें अपने “बाड़े” में बुलाते हैं, जो एक अच्छे चरवाहे के प्रेम को दर्शाता है।
- यूहन्ना 10:11 – “अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।”
- यूहन्ना 15:5 – “मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वही बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।”
- भजन संहिता 23:1-2 – “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। वह मुझे हरी हरी चरागाहों में बैठाता है, वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है।”
4. जीवन की रोटी और जीवन का जल तीसरे अंतरे में यीशु स्वयं को भूख और प्यास मिटाने वाला “जीवन का भोजन” बताते हैं। वह निमंत्रण देते हैं कि हम उनके प्रेम को चखकर देखें। जो मसीह पर विश्वास करता है, उसकी आत्मिक भूख हमेशा के लिए मिट जाती है।
- यूहन्ना 6:35 – “यीशु ने उनसे कहा, ‘जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आता है वह कभी भूखा न होगा, और जो मुझ पर विश्वास करता है वह कभी प्यासा न होगा’।”
- यूहन्ना 4:14 – “परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर कभी प्यासा न होगा; वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।”
- भजन संहिता 34:8 – “परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरुष जो उसकी शरण लेता है।”
निष्कर्ष
यह गीत हमें याद दिलाता है कि मसीह का प्रेम पक्षपाती नहीं है। वह कोढ़ियों, बीमारों, और समाज के ठुकराए हुए लोगों को अपनी बाहों में समेटने के लिए “आवाज” दे रहे हैं। गीत का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने उद्धार के लिए केवल यीशु की पुकार को सुनने और उनके पास आने की आवश्यकता है, क्योंकि उन्होंने क्रूस पर अपनी जान देकर हमारे जीवन का पूरा मोल चुका दिया है।
