येशु राजा दिल में समा जा Lyrics song
येशु राजा तू दिल में
समा जा
मैं सना तेरी गाऊं
मैं सना तेरी गाऊं
1. आंखों में बस तू ही तू हो
सोचों में बस तू ही तू हो
सुंदर मुखड़ा मुझको
दिखा जा
2. प्रस्तिश पे तू तरख्त लगाए
वैरी शैतान से मुझको बचाए
रुह में चलना मुझको
सिखा जा
3. हम्द तेरी हर वक्त करूं मैं
तुझमें जीऊं और तुझमें मरूं मैं
रुह में चलना मुझको
सिखा जा
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचन का स्पष्टीकरण
यह आराधना गीत एक मसीही विश्वासी के समर्पण, आत्मिक प्यास और प्रभु यीशु मसीह के साथ एक गहरे, व्यक्तिगत संबंध को प्रकट करता है। गीत का केंद्रीय विषय यह है कि हमारा पूरा अस्तित्व—हमारे विचार, हमारी दृष्टि, हमारी आराधना और हमारा चलना-फिरना—पूरी तरह से प्रभु यीशु मसीह पर केंद्रित हो जाए।
नीचे गीत के मुख्य अर्थों के साथ सटीक और पूरे बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. हृदय में मसीह का निवास और निरंतर स्तुति
“यीशु राजा तू दिल में समा जा, मैं सना तेरी गाऊं…”
स्पष्टीकरण: गीत की शुरुआत एक गहरे समर्पण की पुकार है, जहाँ विश्वासी यीशु को अपने जीवन और हृदय के सिंहासन पर राजा के रूप में आमंत्रित करता है। जब प्रभु हमारे हृदय में वास करते हैं, तो हमारा जीवन उसकी स्तुति (‘सना’) और महिमा से भर जाता है। एक मसीही का मुख्य उद्देश्य ही अपने राजा की आराधना करना है।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- इफिसियों 3:17 – “और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदयों में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और नेव डालकर।”
- भजन संहिता 22:3 – “परन्तु हे तू जो इस्राएल की स्तुति के सिंहासन पर विराजमान है, तू तो पवित्र है।”
- भजन संहिता 145:1 – “हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तेरा गुणानुवाद करूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा।”
2. आत्मिक दृष्टि और विचारों का मसीह पर केंद्रित होना
“आंखों में बस तू ही तू हो, सोचों में बस तू ही तू हो, सुंदर मुखड़ा मुझको दिखा जा।”
स्पष्टीकरण: यहाँ भक्त संसार की मोह-माया और अभिलाषाओं से आँखें हटाकर केवल प्रभु यीशु मसीह के पवित्र स्वरूप को निहारने की इच्छा व्यक्त करता है। जब हमारे विचार और हमारी कल्पनाएँ मसीह में स्थिर हो जाती हैं, तो हमारा मन पवित्र होता है। प्रभु का ‘सुंदर मुखड़ा’ देखना उसकी उपस्थिति और उसके अनुग्रह का अनुभव करने का प्रतीक है।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- इब्रानियों 12:2 – “और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुःख सहा, और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।”
- कुलुस्सियों 3:2 – “पृथ्वी पर की नहीं, परन्तु स्वर्गीय वस्तुओं पर ध्यान लगाओ।”
- भजन संहिता 27:8 – “तू ने कहा है, ‘मेरे दर्शन के खोजी हो।’ इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, ‘हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा।'”
3. आराधना में परमेश्वर की उपस्थिति और शैतान से सुरक्षा
“प्रस्तिश पे तू तरख्त लगाए, वैरी शैतान से मुझको बचाए…”
स्पष्टीकरण: ‘प्रस्तिश’ का अर्थ है आराधना और ‘तरख्त’ का अर्थ है सिंहासन। जब कलीसिया या एक विश्वासी सच्चे मन से आराधना करता है, तो परमेश्वर वहाँ अपनी उपस्थिति का सिंहासन लगाता है। जहाँ परमेश्वर का सिंहासन होता है, वहाँ अंधकार की शक्तियाँ और हमारा वैरी शैतान टिक नहीं सकता। प्रभु का पवित्र लहू और उसकी उपस्थिति हमें शैतान की हर चाल से सुरक्षित रखती है।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- याकूब 4:7 – “इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा।”
- 2 थिस्सलुनीकियों 3:3 – “परन्तु प्रभु सच्चा है; वह तुम्हें दृढ़ता से स्थिर करेगा, और उस दुष्ट से सुरक्षित रखेगा।”
- 1 पतरस 5:8 – “सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए।”
4. पवित्र आत्मा की अगुवाई में चलना और पूर्ण समर्पण
“रुह में चलना मुझको सिखा जा, हम्द तेरी हर वक्त करूं मैं, तुझमें जीऊं और तुझमें मरूं मैं।”
स्पष्टीकरण: यह भाग एक मसीही जीवन के सबसे गहरे सत्य को दर्शाता है—पवित्र आत्मा (‘रुह’) की अगुवाई में चलना। हम अपनी ताकत से मसीही जीवन नहीं जी सकते; हमें आत्मा की सहायता चाहिए। विश्वासी यहाँ अपना सब कुछ (जीवन और मृत्यु) प्रभु को सौंप देता है। ‘तुझमें जीऊं और तुझमें मरूं’ प्रेरित पौलुस के उस समर्पण को याद दिलाता है जहाँ जीवन का एकमात्र अर्थ सिर्फ मसीह बन जाता है।
संबंधित पूरे बाइबल वचन:
- गलातियों 5:25 – “यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।”
- रोमियों 14:8 – “क्योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जियें या मरें, हम प्रभु ही के हैं।”
- फिलिप्पियों 1:21 – “क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।”
- भजन संहिता 34:1 – “मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।”
निष्कर्ष: यह गीत हर एक मसीही के दिल की सच्ची पुकार है। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम यीशु को अपने विचारों, अपनी आँखों, अपनी आराधना और अपनी हर एक सांस को सौंप देते हैं, तब पवित्र आत्मा हमें एक विजयी और सुरक्षित मसीही जीवन जीना सिखाता है।



