येशु येशु येशु तू जलाली ख़ुदा Lyrics song
येशु-येशु-येशु तू जलाली खुदा,
येशु – येशु – येशु तू हैशाफी खुदा
पानी पे चलने वाला,
अदभुत कामों को करने वाला
गाऊं दिल से सना, गाऊं रूह से सना
परस्तीश करें में सदा …
1. यरीहों की दीवार को तूने गरािया है,
क्रूस पर शैतान को तूने हराया है
तू है उद्घार मेरा, तू है मुक्ति मेरी
परस्तीश करू में सदा
येशु – येशु – येशु …
2. राह सच्चाई और जीवन तू ही है,
तेरे बिना येशु कुछ भी नहीं है
मेरा सब कुछ तेरा,
तू है सब कुछ मेरा
परस्तीश करू में सदा
येशु येशु येशु ….
3. प्यासों को पास तू अपने बुलाता है
जीवन के झरने से उनको पलिाता है
तू ही आस मेरी, तू ही प्यास मेरी
परस्तीश करु में सदा
येशु- येशु येशु ….
भजन का सारांश (Summary)
यह भजन प्रभु यीशु मसीह की ईश्वरीय महिमा (Glory) और उनके चमत्कारी व्यक्तित्व का एक भावपूर्ण वर्णन है। गीत की शुरुआत ‘जलाली खुदा’ और ‘शाफी खुदा’ जैसे शब्दों से होती है, जो यह बताते हैं कि यीशु न केवल प्रतापी परमेश्वर हैं, बल्कि वे चंगा करने वाले (Healer) भी हैं। भजन में यीशु के उन चमत्कारों को याद किया गया है जो उन्होंने पृथ्वी पर रहते हुए किए, जैसे पानी पर चलना और असंभव कार्यों को संभव बनाना।
यह गीत एक मसीही विश्वासी के अटूट विश्वास को प्रकट करता है कि यीशु ही एकमात्र ‘राह, सच्चाई और जीवन’ हैं। उनके बिना हमारा अस्तित्व कुछ भी नहीं है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि हमारा सब कुछ—हमारा जीवन, हमारी खुशियाँ और हमारी सामर्थ्य—यीशु से ही आती है। अंत में, यह भजन प्यासी आत्माओं के लिए यीशु को ‘जीवन के झरने’ के रूप में प्रस्तुत करता है, जो हमारी आत्मिक प्यास बुझाते हैं और हमें अनंत तृप्ति प्रदान करते हैं।
भजन से जुड़े बाइबल के वचन (Bible Verses)
इस भजन के भावों को स्पष्ट करने के लिए बाइबल के ये वचन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
1. यीशु की महिमा और सामर्थ्य पर (जलाली खुदा):
इब्रानियों 1:3 – “वह उसकी महिमा का प्रकाश और उसके तत्व की छाप है, और सब वस्तुओं को अपनी सामर्थ्य के वचन से संभालता है। वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिम के दाहिने जा बैठा।” स्पष्टीकरण: यह वचन बताता है कि यीशु स्वयं परमेश्वर की महिमा का स्वरूप हैं और पूरी सृष्टि उन्हीं की सामर्थ्य से टिकी है।
2. चंगाई देने वाले परमेश्वर पर (शाफी खुदा):
भजन संहिता 147:3 – “वह खेदित मन वालों को चंगा करता है, और उनके घावों पर पट्टी बांधता है।” स्पष्टीकरण: यीशु ‘शाफी’ यानी चंगा करने वाले हैं, जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आत्मिक घावों को भी भरते हैं।
3. पानी पर चलने और अद्भुत कार्यों पर:
मत्ती 14:25-27 – “और रात के चौथे पहर यीशु झील पर चलते हुए उनके पास आया… यीशु ने तुरंत उनसे बातें की और कहा, ‘ढारस बांधो, मैं हूँ; डरो मत’।” स्पष्टीकरण: यह वचन यीशु के उस अधिकार को दर्शाता है जो प्रकृति पर भी है। वे असंभव को संभव करने वाले अद्भुत परमेश्वर हैं।
4. राह, सच्चाई और जीवन पर:
यूहन्ना 14:6 – “यीशु ने उससे कहा, ‘मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता’।” स्पष्टीकरण: यह इस भजन का मुख्य केंद्र है। यीशु ही वह एकमात्र मार्ग हैं जो हमें परमेश्वर तक ले जाते हैं और हमें सत्य का मार्ग दिखाते हैं।
5. यीशु के बिना हम कुछ नहीं:
यूहन्ना 15:5 – “मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो; जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वही बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।” स्पष्टीकरण: यह वचन हमारी यीशु पर निर्भरता को स्पष्ट करता है। उनके बिना हमारा जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
6. जीवन का झरना और आत्मिक प्यास:
यूहन्ना 4:14 – “परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर कभी प्यासा न होगा; वरन जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।” स्पष्टीकरण: यीशु ही वह जीवन का जल हैं जो हमारी आत्मा की गहराई को तृप्त करते हैं। जो कोई उनके पास आता है, उसकी आत्मिक खोज समाप्त हो जाती है।
7. पूर्ण समर्पण और आराधना:
रोमियों 12:1 – “इसलिए हे भाइयों, मैं तुमसे परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर विनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।” स्पष्टीकरण: भजन में ‘परस्तिश’ (आराधना) करने का संकल्प इसी समर्पण को दर्शाता है।



