ए खुदाया मैं तेरी पसंद बन जा Lyrics song
ए खुदाया मैं तेरी
पंसद बण जा
मैं तेरे मन नू पौंदा रहा
ते हम्दो सना तेरी
गाऊंदा रहा
1. हा दिल मेरे दी होवें किताब
ते उस ते तेरा नाम होवें
ना होवें होर कुझ लिखेया
तेरा ही नाम होवें
ते बस तेरा ही नाम होवें -2
मैं हनेरे विच्च बैठे, लोका लयी
चंद बण जा
2. मैं तेरे योग बण जावां
ते रुह दे नाल चलदा रवां
तेरी अंजील वंडदा रवां
ते रुह दे नाल चलदा रवां
ते रुह दे नाल चलदा रवां-2
मैं रोगा दे विच्च सड़दे
होया लयी ठंड बण जा
3. तेरी हर गल होवें मन विच्च,
ते मेरे विच्च तू ही वसदा रखें
जेहड़े राहवां नू मैं जावां,
ओहना नू तू ही दसदा रवें
ओहना नू तू ही दसदा रखें-2
मैं टुटेया होया दे लयी ए खुदा,
नवीं ही उमंग बण जा
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचन
यह गीत एक विश्वासी की परमेश्वर के प्रति गहरी लालसा, समर्पण और उसके राज्य के लिए एक आशीष का कारण बनने की इच्छा को दर्शाता है। गीत का मुख्य उद्देश्य यह है कि हमारा जीवन परमेश्वर की इच्छा के अनुकूल हो, ताकि हम इस संसार में ज्योति और नमक का काम कर सकें।
नीचे इस गीत के प्रत्येक भाग का सारांश और उससे संबंधित प्रामाणिक बाइबल वचन दिए गए हैं:
1. परमेश्वर की प्रसन्नता और स्तुति करना
“ऐ खुदाया मैं तेरी पसंद बण जा, मैं तेरे मन नू पौंदा रहा, ते हम्दो सना तेरी गाऊंदा रहा।”
सारांश: गीत की शुरुआत इस प्रार्थना से होती है कि हमारा जीवन ऐसा हो जो परमेश्वर को भाए (भाता रहे)। हमारा अस्तित्व केवल उसकी महिमा और स्तुति (‘हम्दो सना’) के लिए हो। जब हम परमेश्वर को प्रसन्न करने वाला जीवन जीते हैं, तो हमारी हर सांस उसकी आराधना बन जाती है।
संबंधित बाइबल वचन:
- कुलुस्सियों 1:10 – “ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों के फल लगें, और परमेश्वर की पहचान में बढ़ते जाओ।”
- भजन संहिता 104:33 – “मैं जीवन भर यहोवा का गीत गाता रहूंगा; जब तक मैं बना रहूंगा, तब तक अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा।”
2. हृदय रूपी पुस्तक पर केवल मसीह का नाम
“हा दिल मेरे दी होवें किताब, ते उस ते तेरा नाम होवें, ना होवें होर कुझ लिखेया, तेरा ही नाम होवें… मैं हनेरे विच्च बैठे लोका लयी चंद बण जा।”
सारांश: यहाँ भक्त अपने हृदय को एक कोरी किताब के रूप में परमेश्वर को सौंपता है, जिस पर केवल मसीह का नाम अंकित हो। संसार की कोई भी अभिलाषा या गन्दगी उस दिल में न हो। जब हमारा हृदय मसीह के प्रेम से भर जाता है, तब हम पाप के अंधकार में डूबे संसार के लोगों के लिए ‘चाँद’ यानी एक मार्गदर्शक ज्योति बन जाते हैं।
संबंधित बाइबल वचन:
- नीतिवचन 3:3 – “कृपा और सच्चाई तुझ से अलग न होने पाएं; उन्हें अपने गले का हार बनाना, और अपने हृदय रूपी पटिया पर लिखना।”
- मत्ती 5:16 – “उसी प्रकार तुम्हारा उजाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें।”
3. पवित्र आत्मा की अगुवाई और सुसमाचार का प्रचार
“मैं तेरे योग बण जावां, ते रुह दे नाल चलदा रवां, तेरी अंजील वंडदा रवां… मैं रोगा दे विच्च सड़दे होया लयी ठंड बण जा।”
सारांश: यह भाग पवित्र आत्मा (रुह) की संगति में चलने और ‘अंजील’ यानी सुसमाचार (Good News) को दूसरों तक पहुँचाने की प्रेरणा देता है। जब हम आत्मा के अनुसार चलते हैं, तो हम पाप और बीमारियों से पीड़ित (सड़ते हुए) लोगों के लिए मसीह की चंगाई और शांति (ठंडक) का माध्यम बनते हैं।
संबंधित बाइबल वचन:
- गलातियों 5:16 – “परन्तु मैं कहता हूँ, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।”
- मरकुस 16:15 – “और उसने उनसे कहा, तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।”
- मत्ती 10:8 – “बीमारों को चंगा करो, मरे हुओं को जिलाओ, कोढ़ियों को शुद्ध करो, दुष्टात्माओं को निकालो; तुमने सेंत-मेंत पाया है, सेंत-मेंत दो।”
4. परमेश्वर की इच्छा के प्रति पूर्ण समर्पण
“तेरी हर गल होवें मन विच्च, ते मेरे विच्च तू ही वसदा रखें, जेहड़े राहवां नू मैं जावां, ओहना नू तू ही दसदा रवें… मैं टुटेया होया दे लयी ए खुदा, नवीं ही उमंग बण जा।”
सारांश: अंतिम भाग में विश्वासी प्रार्थना करता है कि उसका अपना कोई वजूद न रहे, बल्कि उसके भीतर स्वयं मसीह वास करे। वह अपने जीवन के हर मार्ग (फैसलों) के लिए परमेश्वर की अगुवाई चाहता है। ऐसा समर्पित जीवन टूटे हुए, निराश और हताश लोगों के जीवन में एक नई आशा और उमंग लेकर आता है।
संबंधित बाइबल वचन:
- गलातियों 2:20 – “मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है; और मैं शरीर में अब जो जीवन बिताता हूँ, तो केवल उस परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास से बिताता हूँ, जिसने मुझ से प्रेम किया और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।”
- नीतिवचन 3:5-6 – “तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।”
- भजन संहिता 34:18 – “यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसों हुओं का उद्धार करता है।”



