यहोवा मेरे खुदावंद Lyrics song
यहोवा मेरे खुदावंद बुजुर्ग नाम तेरा
ज़मीन पे सारी मेरे रब है चर्चा आम तेरा
जलाल तेरा फलक पर खुदाया कायम है
ये सारी धरती तेरी है ये आसमान तेरा
यहोवा मेरे खुदावंद……
1. तेरे ही हाथों ने पैदा किया हर एक शैय को
ये आसमान चांद तारे ये सब जहान तेरा
यहोवा मेरे खुदावंद……
2. मुखालिफो (विरोधी) को दिखाई
यूं अपनी कुदरत है
हर इक शख्स के लब से बहे जलाल तेरा
यहोवा मेरे खुदावंद…..
भजन का मुख्य सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह गीत परमेश्वर यहोवा की संप्रभुता, उसकी असीमित सामर्थ्य और उसकी अद्भुत सृष्टि की महिमा का एक जीवंत गान है। इसमें बताया गया है कि कैसे परमेश्वर का नाम पूरी पृथ्वी पर सबसे महान (बुजुर्ग) है और उसका जलाल (महिमा) स्वर्ग से भी ऊंचा है। गीत का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को यह याद दिलाना है कि यह पूरी कायनात और इसके कण-कण पर केवल और केवल उसी एक सच्चे खुदावंद का अधिकार है।
बाइबल के पवित्र वचनों के आधार पर इस गीत का विस्तृत स्पष्टीकरण निम्नलिखित है:
1. यहोवा का बुजुर्ग नाम और उसका आम चर्चा (मुख्य भाग)
गीत की शुरुआत परमेश्वर के पवित्र नाम की बड़ाई और पूरी पृथ्वी पर फैले उसके प्रभाव की घोषणा से होती है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव आकाश पर दिखाया है।” (भजन संहिता 8:1)
- बाइबल का पवित्र वचन:“हे हमारे प्रभु और परमेश्वर, तू ही महिमा और आदर और सामर्थ्य के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएँ सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थीं और सृजी गईं।” (प्रकाशितवाक्य 4:11)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: ‘खुदावंद’ और ‘बुजुर्ग’ शब्द परमेश्वर के सर्वोच्च आदर और उसकी शाश्वत महिमा को दर्शाते हैं। चाहे मनुष्य स्वीकार करे या न करे, परमेश्वर की रचनाओं को देखकर पूरी ज़मीन पर उसके नाम की चर्चा हमेशा आम (प्रसिद्ध) रहती है। उसका प्रताप किसी एक देश या जाति तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड में फैला हुआ है।
2. फलक (आकाश) पर कायम जलाल और परमेश्वर का स्वामित्व
गीत में गवाही दी गई है कि यह सारी धरती और आसमान केवल परमेश्वर का है और उसकी महिमा आकाश-मण्डल पर सदा के लिए स्थापित है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“आकाश परमेश्वर की महिमा का वर्णन कर रहा है; और आकाश-मण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।” (भजन संहिता 19:1)
- बाइबल का पवित्र वचन:“पृथ्वी और जो कुछ उसमें है यहोवा ही का है; जगत और उसके निवासी भी।” (भजन संहिता 24:1)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: मनुष्य चाहे जितनी भी तरक्की कर ले, वह आकाश और पृथ्वी की विशालता को अपनी सीमा में नहीं बांध सकता। यह सब कुछ परमेश्वर की संप्रभुता की गवाही देते हैं। ‘जलाल तेरा फलक पर खुदाया कायम है’ का अर्थ यही है कि परमेश्वर की महिमा को कभी मिटाया नहीं जा सकता; वह अपरिवर्तनीय और अनंत है।
3. हाथों से सृष्टि की रचना: चाँद, तारे और हर एक शैय (अंतरा 1)
यह भाग परमेश्वर को एक महान शिल्पकार के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसने ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु (शैय) को अपने हाथों से आकार दिया है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“जब मैं तेरे आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चन्द्रमा और तारागण को जो तू ने नियुक्त किये हैं, देखता हूँ; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी का पुत्र क्या है कि तू उसकी सुधि ले?” (भजन संहिता 8:3-4)
- बाइबल का पवित्र वचन:“उसी ने बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करुणा सदा की है। उसी ने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया, उसकी करुणा सदा की है। उसी ने बड़े-बड़े प्रकाशक बनाए, उसकी करुणा सदा की है। सूर्य को दिन पर प्रभुता करने के लिये बनाया, उसकी करुणा सदा की है। चन्द्रमा और तारागण को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया, उसकी करुणा सदा की है।” (भजन संहिता 136:5-9)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: जब हम रात के समय आकाश में चाँद और अनगिनत तारों को देखते हैं, तो हमें परमेश्वर की असीम बुद्धि का अहसास होता है। यह अंतरा हमें सिखाता है कि सृष्टि की कोई भी वस्तु अपने आप या किसी संयोग से नहीं बनी, बल्कि उसे खुदावंद ने बड़े प्रेम और योजना के साथ रचा है। पूरा जहान उसकी हस्तकला का एक सुंदर प्रमाण है।
4. मुखालिफों (विरोधियों) के सामने कुदरत का प्रकटीकरण (अंतरा 2)
गीत का यह अंतिम भाग परमेश्वर की उस सामर्थ्य को दिखाता है, जिसके सामने उसके विरोधी और शत्रु भी निरुत्तर हो जाते हैं। परमेश्वर की महिमा बच्चों और निर्बलों के मुख से भी प्रकट होती है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“तू ने अपने शत्रुओं के कारण बच्चों और दूध पीतों के मुँह से अपनी सामर्थ्य की नींव डाली है, ताकि तू शत्रु और बदला लेने वाले को शान्त करे।” (भजन संहिता 8:2)
- बाइबल का पवित्र वचन (यीशु मसीह के शब्द):“यीशु ने उनसे कहा, ‘हाँ; क्या तुम ने यह कभी नहीं पढ़ा: “बालकों और दूध पीते बच्चों के मुँह से तू ने स्तुति सिद्ध कराई”?'” (मत्ती 21:16)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: परमेश्वर को अपनी सामर्थ्य साबित करने के लिए बड़ी सेनाओं की आवश्यकता नहीं है। जो लोग परमेश्वर का विरोध (मुखालिफत) करते हैं, परमेश्वर उनके घमंड को तोड़ने के लिए सबसे छोटे और निर्बल लोगों (जैसे छोटे बच्चों) का उपयोग करता है। जब एक साधारण मनुष्य भी सच्चे मन से खुदा की इबादत करता है, तो विरोधियों के लब (होंठ) बंद हो जाते हैं और वे भी परमेश्वर के जलाल को मानने पर मजबूर हो जाते हैं।
निष्कर्ष: यह गीत पूरी तरह से परमेश्वर यहोवा की स्तुति और आराधना को समर्पित है। यह हमें सिखाता है कि जब हम इस विशाल संसार, आकाश, चाँद और तारों को देखें, तो हमारा झुकाव सृष्टि की तरफ नहीं, बल्कि उस सृष्टिकर्ता की तरफ होना चाहिए। यह पोस्ट पढ़ने वाले हर एक विश्वासी को परमेश्वर की हजूरी में झुकने और उसके ‘बुजुर्ग नाम’ की महिमा करने के लिए प्रेरित करती है।


