ओह धन्न है ज़बूर 1 Lyrics song
ओह धंन है जो न मनदा है ना सलाह शरीरां दी
ओह धंन है….
न तुरदा ए ओह बुरेयां दे, राह ते कदी वी
ओह धंन है….
1. मखौलियां दे जलसे विच्च, ना कदी बैंहदा ए
पर दिने राती शरां नूं, ओह सोचदा रेहंदा ए
ओह धंन है….
2. हाल ओहदा ए उस बूटे वांग, जो लग्गा पाणी ते
फल आपणे वेले देवेगा, ना पत्तर सुकणगे
ओह धंन है….
3. ओह आपणे सारे कम्मां विच्च, फलदायक होवेगा
पर तूड़ी वांगर वा दे नाल, बदकार उड जावेगा
ओह धंन है….
4. क्यों जो यहोवा पाक खुदा, राह जाणदा सादिक दा
पर राह जो है शरीरां दा, सो उड पुड जावेगा
ओह धंन है….
गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)
यह गीत मनुष्य के सामने जीवन के दो मार्ग प्रस्तुत करता है—एक धर्मी (सादिक) का मार्ग और दूसरा दुष्ट (शरीर/बदकार) का मार्ग। गीत की शुरुआत “ओह धन्न है” से होती है, जिसका अर्थ है ‘वह मनुष्य कितना धन्य, सुखी और आशीषों से भरा है’ जो संसार की बुरी संगति से दूर रहता है।
इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि सच्ची सफलता और आशीष धन-दौलत से नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन (शरां) से प्रीति लगाने और दिन-रात उस पर ध्यान करने से मिलती है। ऐसा व्यक्ति उस पेड़ के समान है जो पानी की धाराओं के किनारे लगाया गया है, जो हर मौसम में हरा-भरा रहता है और फल देता है। इसके विपरीत, परमेश्वर के बिना जीने वाले दुष्ट लोग उस भूसी (तूड़ी) के समान हैं जो हवा के एक झोंके से उड़ जाती है। परमेश्वर धर्मियों के मार्ग की सुधि रखता है और उन्हें फलवंत करता है।
बाइबल के मुख्य वचन और आत्मिक स्पष्टीकरण (Bible Verses & Explanation)
चूंकि यह गीत सीधे तौर पर भजन संहिता 1:1-6 का काव्यात्मक अनुवाद है, इसलिए आइए इसके एक-एक पद को बाइबल के शुद्ध वचनों के साथ विस्तार से समझते हैं:
1. संगति का प्रभाव और धन्य पुरुष के लक्षण
गीत का संदर्भ: “ओह धंन है जो न मनदा है ना सलाह शरीरां दी, न तुरदा ए ओह बुरेयां दे, राह ते कदी वी, मखौलियां दे जलसे विच्च, ना कदी बैंहदा ए…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 1:1 – “क्या ही धन्य है वह पुरुष जो दुष्टों की सलाह पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है!”
स्पष्टीकरण: यह वचन मसीही जीवन में संगति के महत्व को सिखाता है। आत्मिक पतन तीन चरणों में होता है—दुष्टों की सलाह सुनना (चलना), उनके पाप के तौर-तरीकों को अपनाना (खड़ा होना), और अंत में परमेश्वर का मजाक उड़ाने वालों के साथ शामिल हो जाना (बैठना)। जो मनुष्य इन तीनों बातों से खुद को अलग रखता है, बाइबल उसे “धन्य” या ईश्वरीय आनंद से भरपूर कहती है।
2. परमेश्वर के वचन से प्रीति
गीत का संदर्भ: “पर दिने राती शरां नूं, ओह सोचदा रेहंदा ए, ओह धंन है…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 1:2 – “परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता है; और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन ध्यान करता रहता है।”
स्पष्टीकरण: “शरां” का अर्थ परमेश्वर की व्यवस्था या वचन है। धन्य पुरुष केवल बुराई से दूर ही नहीं रहता, बल्कि उसका मन परमेश्वर के वचनों में लगा रहता है। “रात-दिन ध्यान करने” का मतलब है कि वह उठते-बैठते परमेश्वर की इच्छा को समझता है और उसके अनुसार अपना जीवन जीता है, जिससे उसका मन आत्मिक रूप से मजबूत रहता है।
3. पानी के किनारे लगे पेड़ जैसी हरी-भरी और फलदायक जिंदगी
गीत का संदर्भ: “हाल ओहदा ए उस बूटे वांग, जो लग्गा पाणी ते, फल आपणे वेले देवेगा, ना पत्तर सुकणगे, ओह आपणे सारे कम्मां विच्च, फलदायक होवेगा…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 1:3 – “वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है; और अपनी ऋतु में फल देता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिए जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।”
स्पष्टीकरण: जब एक पेड़ पानी के स्रोत के पास होता है, तो अकाल में भी उसकी जड़ें सूखती नहीं हैं। इसी तरह, जो विश्वासी अपना नाता परमेश्वर के वचन से जोड़कर रखता है, वह हर परिस्थिति में स्थिर रहता है। कठिन समय (दुख या मंदी) में भी उसका आत्मिक जीवन मुरझाता नहीं है। वह सही समय पर फल (प्रेम, आनंद, शांति, और गवाही) लाता है, और परमेश्वर उसके हाथों के हर काम को सफल और आशीषमय बनाता है।
4. दुष्टों की अस्थिरता और उनका अंत
गीत का संदर्भ: “पर तूड़ी वांगर वा दे नाल, बदकार उड जावेगा…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 1:4 – “दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ा दी जाती है।”
स्पष्टीकरण: यहाँ धर्मी व्यक्ति की तुलना एक मजबूत पेड़ से की गई है, तो दुष्ट (परमेश्वर विहीन) व्यक्ति की तुलना “तूड़ी” यानी अनाज के खोखले छिलके (भूसी) से की गई है। भूसी में न तो कोई वजन होता है और न ही कोई जड़। जब न्याय या परीक्षाओं की हवा (वा) चलती है, तो दुष्ट लोग टिक नहीं पाते और बिखर जाते हैं। उनका जीवन पूरी तरह अस्थिर और खोखला होता है।
5. परमेश्वर का न्याय और दोनों मार्गों का परिणाम
गीत का संदर्भ: “क्यों जो यहोवा पाक खुदा, राह जाणदा सादिक दा, पर राह जो है शरीरां दा, सो उड पुड जावेगा…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 1:6 – “क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नष्ट हो जाएगा।”
स्पष्टीकरण: “सादिक” का अर्थ धर्मी होता है। पवित्र परमेश्वर (पाक खुदा) धर्मियों के मार्ग की पूरी सुधि रखता है; वह उनकी हर एक परेशानी, वफादारी और आंसुओं को जानता है और उन्हें संभालता है। लेकिन जो लोग अपनी शारीरिक अभिलाषाओं (शरीरां) और दुष्टता के मार्ग पर चलते हैं, उनका अंत विनाश है। उनका मार्ग उन्हें हमेशा के लिए भटका देता है और वे नष्ट हो जाते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह गीत हर मसीही विश्वासी को आत्म-परीक्षण करने की चुनौती देता है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम अपने जीवन में सच्चे फल, आशीष और आत्मिक हरियाली चाहते हैं, तो हमें संसार की झूठी सलाहों और संगति को छोड़ना होगा। जब हम अपना पूरा ध्यान पवित्रशास्त्र के वचनों पर लगाते हैं, तो परमेश्वर स्वयं हमारे जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता है। आइए, हम सब दुष्टता के मार्ग को छोड़कर उस धर्मी (सादिक) के मार्ग को चुनें जो सीधा स्वर्ग की ओर जाता है। ओह धंन है जो यहोवा के वचन से प्रीति रखता है!
