Rogi Rogi Na Raha Lyrics

Rogi Rogi Na Raha Lyrics
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रोगी रोगी न रहा Lyrics song

रोगी रोगी ना रहा, पापी पापी ना रहा
जब वो आया तेरे पास, रोगी रोगी ना रहा……

1. उस लाल समुद्र को, दो भाग था किया
मैं भी आता हूं तेरे पास, रोगी रोगी ना रहा……

2. कोड़ी-कोड़ी ना रहा, पापी पापी ना रहा
जब वो आया तेरे पास, मैं भी आता हूं तेरे पास……

3. साफ होने के लिए, पाक होने के लिए
मैं भी आता हूं तेरे पास, रोगी रोगी ना रहा…..

4. शिफ़ा पाने के लिए, माफ़ होने के लिए
मैं भी आता हूं तेरे पास,
चंगा होने के लिए साफ़ होने के लिए
मैं भी आता हूं तेरे पास, रोगी रोगी ना रहा…..

5. मसह पाने के लिए, एलिय्याह की तरह
मसह पाने के लिए, एलिशा की तरह
साफ़ होने के लिए, दाऊद की तरह
बुद्धि पाने के लिए, सुलैमान की तरह
मैं भी आता हूं तेरे पास, रोगी रोगी ना रहा…..

6. मूसा की तरह, तेरी हजूरी में प्रभु
मैं भी आता हूं तेरे पास
माफ़ी लेने के लिए, आशीष लेने के लिए
मैं भी आता हूं…..

7. अब्राहम की तरह, सिद्ध होने के लिए
साफ होने के लिए, मैं भी आता हूं तेरे पास
पूरी मैं कर सकूं, येशु तेरी मर्जी को
मैं भी आता हूं तेरे पास…..

8. अनुग्रह पाने के लिए, दया लेने के लिए
मैं भी आता हूं तेरे पास
जीवन तुझको में देता हूं, जीवन तुझको मैं देता हूं
मैं भी आता हूं तेरे पास…..

9. उस भीड़ की तरह, व्याकुल मन से,
उस भीड़ की तरह, बुझे हुए मन से,
उस भीड़ की तरह, अपने दुखी मन से
उस भीड़ की तरह, अपने दीन मन से
मैं भी आता हूं तेरे पास…..

10. जीवन की रोटी तू, जीवन का जल है तू,
मैं भी आता हूं तेरे पास,
रोटी लेने के लिए, ताकि भूखा ना रहूं
पानी लेने के लिए, ताकि प्यासा ना रहूं
मैं भी आता हूं तेरे पास…..

11. एलिय्याह की तरह, एलिशा की तरह
दाऊद की तरह, अय्यूब की तरह
धन्यवाद देते हुए हर बात के लिए
अपने दुखी मन से,
मैं भी आता हूं तेरे पास…..

12. अय्यूब की तरह, पौलुस की तरह
मैं भी आता हूं तेरे पास
तेरी दया है महान, तू सर्वशक्तिमान
मैं भी आता हूं तेरे पास…..

भजन का मुख्य सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण

यह भजन मसीही जीवन में पूर्ण समर्पण, चंगाई, पाप-क्षमा और आत्मिक उन्नति का एक अद्भुत और सामर्थी दस्तावेज़ है। गीत का मूल संदेश यह है कि जब कोई मनुष्य अपने दुखों, बीमारियों और पापों के साथ प्रभु यीशु मसीह के सम्मुख आता है, तो वह वैसा नहीं रह जाता; मसीह का अनुग्रह उसे पूरी तरह बदल देता है। इस गीत में पुराने और नए नियम के कई महान पवित्र चरित्रों और चमत्कारों का संदर्भ दिया गया है, जिनका पूरा विवरण वचनों के साथ नीचे स्पष्ट किया गया है:

1. लाल समुद्र का चमत्कार और शुद्धिकरण (अंतरा 1, 2, 3 और 4)

गीत की शुरुआत सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सामर्थ्य को याद करने से होती है, जिसने असंभव को संभव किया। जो कोई कोढ़ी या पापी यीशु के पास आता है, उसे शिफ़ा (चंगाई) और माफ़ी मिलती है।

  • बाइबल का पवित्र वचन:“तब मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया; और यहोवा ने रात भर प्रचण्ड पुरवाई चलाकर समुद्र को दो भाग कर दिया, और जल ऐसा बट गया कि बीच में सूखी भूमि हो गई।” (निर्गमन 14:21)
  • बाइबल का पवित्र वचन:“और देखो, एक कोढ़ी ने आकर उसे प्रणाम किया और कहा, ‘हे प्रभु, यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।’ यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा, ‘मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा।’ और वह तुरन्त कोढ़ से शुद्ध हो गया।” (मत्ती 8:2-3)
  • स्पष्टीकरण: जिस प्रकार परमेश्वर ने लाल समुद्र को दो भाग करके इस्राएलियों को मिस्र की गुलामी से बचाया, उसी प्रकार यीशु मसीह हमारे जीवन की असाध्य बीमारियों और पाप के बंधनों को तोड़कर हमें पूरी तरह साफ और पाक (शुद्ध) कर देते हैं।

2. एलिय्याह, एलीशा का मसह और सुलैमान की बुद्धि (अंतरा 5)

इस भाग में विश्वासी परमेश्वर के नबियों जैसा अभिषेक (मसह) और राजाओं जैसी आत्मिक बुद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभु के पास आता है।

  • बाइबल का पवित्र वचन:“जब वे पार उतर रहे थे, तब एलिय्याह ने एलीशा से कहा, ‘इससे पहले कि मैं तेरे पास से उठा लिया जाऊँ, जो कुछ तू चाहता है कि मैं तेरे लिये करूँ, वह माँग।’ एलीशा ने कहा, ‘तुझ में जो आत्मा है, उसका दुगना भाग मुझे मिल जाए।'” (2 राजा 2:9)
  • बाइबल का पवित्र वचन:“इसलिये अपने दास को समझने की ऐसी बुद्धि दे कि वह तेरी प्रजा का न्याय कर सके और भले-बुरे को परख सके…” (1 राजा 3:9)
  • स्पष्टीकरण: एलीशा ने अपने गुरु एलिय्याह से दुगने मसह (अभिषेक) की मांग की थी। यह गीत हमें सिखाता है कि हमें सांसारिक चीजों के बजाय परमेश्वर की सेवा के लिए आत्मिक वरदानों और राजा सुलैमान की तरह आत्मिक बुद्धि की लालसा रखनी चाहिए।

3. मूसा की हजूरी और अब्राहम जैसी सिद्धता (अंतरा 6 और 7)

यह अंतरा परमेश्वर की उपस्थिति (हजूरी) में बैठने और उसकी मर्जी के अनुसार एक सिद्ध जीवन जीने की प्रार्थना है।

  • बाइबल का पवित्र वचन:“मूसा ने उससे कहा, ‘यदि तू आप न चले, तो हमें यहाँ से आगे न ले जा।'” (निर्गमन 33:15)
  • बाइबल का पवित्र वचन:“जब अब्राम निन्यानवे वर्ष का हो गया, तब यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा, ‘मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा।'” (उत्पत्ति 17:1)
  • स्पष्टीकरण: जैसे मूसा परमेश्वर की उपस्थिति के बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ना चाहता था, वैसे ही एक विश्वासी को प्रभु की संगति की आवश्यकता होती है। अब्राहम की तरह सिद्ध होने का अर्थ है कि हम अपने जीवन को पूरी तरह यीशु की मर्जी के अधीन कर दें।

4. व्याकुल भीड़ का दीन मन और अनुग्रह (अंतरा 8 और 9)

यहाँ भक्त उस व्याकुल और दुखी भीड़ की तरह आता है जो यीशु के समय उनके पीछे तरस और सहायता पाने के लिए दौड़ती थी।

  • बाइबल का पवित्र वचन:“जब उसने भीड़ को देखा, तो उसे उन पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई चरवाहा न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे।” (मत्ती 9:36)
  • बाइबल का पवित्र वचन:“टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।” (भजन संहिता 51:17)
  • स्पष्टीकरण: परमेश्वर घमंडियों का सामना करता है परंतु दीनों पर अनुग्रह करता है। जब हम अपने टूटे, बुझे और व्याकुल मन को लेकर यीशु के पास आते हैं, तो वह अपनी अपार दया से हमें गले लगा लेता है।

5. जीवन की रोटी और जीवन का जल (अंतरा 10)

गीत यीशु मसीह को हमारी आत्मिक भूख और प्यास को मिटाने वाले एकमात्र स्रोत के रूप में स्थापित करता है।

  • बाइबल का पवित्र वचन:“यीशु ने उनसे कहा, ‘जीवन की रोटी मैं हूँ: जो मेरे पास आता है वह कभी भूखा न होगा, और जो मुझ पर विश्वास करता है वह कभी प्यासा न होगा।'” (यूहन्ना 6:35)
  • बाइबल का पवित्र वचन:“परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।'” (यूहन्ना 4:14)
  • स्पष्टीकरण: इस संसार की कोई भी भौतिक वस्तु मनुष्य की आत्मा को तृप्त नहीं कर सकती। यीशु मसीह ही वह स्वर्गीय रोटी और जल हैं, जो हमें आत्मिक जीवन देते हैं ताकि हम फिर कभी आत्मिक रूप से भूखे-प्यासे न रहें।

6. अय्यूब का धन्यवाद और पौलुस पर दया (अंतरा 11 और 12)

भजन का समापन सबसे ऊंचे आत्मिक स्तर पर होता है, जहाँ दुखों के बीच भी परमेश्वर का धन्यवाद करने और उसकी संप्रभुता को स्वीकार करने की बात कही गई है।

  • बाइबल का पवित्र वचन:“और कहा, ‘मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य हो।'” (अय्यूब 1:21)
  • बाइबल का पवित्र वचन:“और उसने मुझसे कहा, ‘मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।’ इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूँगा, कि मसीह की सामर्थ्य मुझ पर छाया करती रहे।” (2 कुरुन्थियों 12:9)
  • स्पष्टीकरण: अय्यूब ने अपना सब कुछ खो देने के बाद भी दुखी मन से परमेश्वर को धन्य कहा। उसी प्रकार प्रेरित पौलुस ने अपने शरीर के कष्टों के बावजूद प्रभु के अनुग्रह को पर्याप्त माना। यह अंतिम भाग हमें सिखाता है कि चाहे हमारे जीवन की परिस्थितियां कैसी भी हों, वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमारी निर्बलताओं में अपनी सामर्थ्य प्रकट करता है।

निष्कर्ष: यह संपूर्ण गीत एक विश्वासी की आत्मिक यात्रा को दर्शाता है—पाप और बीमारी की अवस्था से लेकर मसह, बुद्धि, सिद्धता और हर हाल में परमेश्वर का धन्यवाद करने की परिपक्वता तक। यीशु के पास आना ही जीवन के बदलने की शुरुआत है।

Rogi Rogi Na Raha Lyrics in hindi

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