Tore Siwa Jaun Kahaan Lyrics

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तोरे सिवा जाऊँ कहाँ | Lyrics song

तोरे सिवा जाऊँ कहाँ
पाऊँ तझु जाऊँ जहाँ  ….. 4

1) प्रभु मैं था एक अज्ञानी
अनग्रुह से ही तेरी महिमा जानी …… 2
भेड़ हूँ मैं तू है गड़रिया
आत्मा से मझु को चरा

2) काले समदंर से मैं घिरा था
आस ना थी कोई डूब रहा था …… 2
आके यीशू तूने बचाया
जीवन का मार्ग दिखाया

3) प्रभु मैं था एक अभिमानी
करता था अपनी मनमानी …… 2
पत्थर सा दिल पिघलाया
सच्चा प्रेम करना सिखाया
मोरे जीवन के तूम स्वामी
तुमको अर्पण प्राण आत्मा भी
तोरे जैसा कौन है प्रेमी
ना मिलेगा तुमसा कोई
भेड़ हूँ मैं तू है गड़रिया
आत्मा से मझु को चरा
तोरे सिवा …….

4) सारे मिलकर जय जय गाएँ
तेरी आगे शीश झुकाए …… 2
सर्वशक्तिमान है तू
ना कोई तुझसा प्रभु

गीत का आध्यात्मिक सारांश

यह गीत एक मसीही विश्वासी के समर्पण, पश्चाताप और ईश्वर (यीशु) के प्रति अगाध प्रेम और कृतज्ञता की गहरी अभिव्यक्ति है। गीत की शुरुआत इस स्वीकारोक्ति से होती है कि प्रभु यीशु के बिना मनुष्य का कोई अन्य ठिकाना या सहारा नहीं है।

इस गीत को मुख्य रूप से चार भागों में समझा जा सकता है:

  1. परमेश्वर का चरवाहा होना और अनुग्रह: मनुष्य अपनी अज्ञानता में भटका हुआ था, लेकिन प्रभु ने अपने अनुग्रह से उसे संभाला। वह एक सच्चा चरवाहा है जो अपनी भेड़ों (विश्वासियों) को आत्मिक भोजन देता है।
  2. पाप के दलदल (काले समंदर) से उद्धार: जब मनुष्य पाप और निराशा के सागर में डूब रहा था, तब यीशु ने आकर उसे एक नया जीवन और अनंत काल का मार्ग दिखाया।
  3. हृदय परिवर्तन और पूर्ण समर्पण: मनुष्य के घमंड और कठोर (पत्थर जैसे) हृदय को प्रभु के सच्चे प्रेम ने पिघला दिया। इसके बदले में विश्वासी अपना प्राण, आत्मा और पूरा जीवन प्रभु को अर्पित करता है।
  4. प्रभु की सार्वभौमिक महिमा और मसीहा का आगमन: अंत में, यह गीत पूरी सृष्टि को सर्वशक्तिमान प्रभु की आराधना करने और मसीह के आगमन के सुसमाचार (खुशखबरी) को फैलाने का संदेश देता है।

गीत से जुड़े बाइबल के प्रामाणिक वचन और स्पष्टीकरण

इस गीत के हर एक पद का बाइबल के पवित्र वचनों से गहरा संबंध है। नीचे उन वचनों को उनके स्पष्टीकरण के साथ पूरा लिखा गया है:

1. “भेड़ हूँ मैं तू है गड़रिया, आत्मा से मुझको चरा”

यह पंक्ति प्रभु यीशु और विश्वासी के रिश्ते को चरवाहे और भेड़ के रूप में दर्शाती है।

यूहन्ना 10:11 — “अच्छा चरवाहा मैं हूँ; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।”

भजन संहिता 23:1-3 — “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। वह मुझे हरी हरी चरागाहों में बिठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है। वह मेरे प्राण में जी ले आता है; धार्मिकता के मार्गों में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है।”

स्पष्टीकरण: बाइबल सिखाती है कि हम सब भेड़ों की तरह भटक गए थे, लेकिन यीशु हमारा वह उत्तम चरवाहा है जो न केवल हमारी आत्मा को आत्मिक वचनों से तृप्त करता है, बल्कि उसने हमारे उद्धार के लिए क्रूस पर अपना प्राण भी दे दिया।

2. “काले समंदर से मैं घिरा था… आके यीशू तूने बचाया”

यह पंक्ति पाप के बंधनों, अंधकार और विनाश से मिलने वाले उद्धार को दर्शाती है।

कुलुस्सियों 1:13-14 — “उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। जिसमें हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा प्राप्त होती है।”

भजन संहिता 40:2 — “उसने मुझे सत्यानाश के गड्ढे और दलदल की कीच में से उबारा, और मेरे पैरों को चट्टान पर रखा, और मेरे डगों को दृढ़ किया।”

स्पष्टीकरण: ‘काला समंदर’ पाप और मृत्यु के डर का प्रतीक है। जब मनुष्य के पास बचने की कोई आशा नहीं थी, तब यीशु मसीह ने अनुग्रह का हाथ बढ़ाकर हमें उस आत्मिक मृत्यु से बचाया और हमारे जीवन को अपनी चट्टान पर स्थिर किया।

3. “पत्थर सा दिल पिघलाया, सच्चा प्रेम करना सिखाया”

यह पंक्ति मनुष्य के स्वभाव में आने वाले आत्मिक बदलाव और कठोर हृदय के पिघलने को बताती है।

यहेजकेल 36:26 — “मैं तुम को नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा; और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकालकर तुम को मांस का हृदय दूँगा।”

1 यूहन्ना 4:19 — “हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहले उसने हमसे प्रेम किया।”

स्पष्टीकरण: मनुष्य स्वभाव से अभिमानी और मनमानी करने वाला होता है। परन्तु पवित्र आत्मा हमारे कठोर और पत्थर जैसे हृदय को बदलकर उसमें मसीह का प्रेम भर देता है। हम दूसरों से प्रेम करना तभी सीख पाते हैं जब हम क्रूस पर प्रभु के सच्चे प्रेम को पहचानते हैं।

4. “मोरे जीवन के तुम स्वामी, तुमको अर्पण प्राण आत्मा भी”

यह पंक्ति प्रभु को अपने जीवन का पूर्ण नियंत्रण सौंपने और आत्म-समर्पण को प्रकट करती है।

रोमियों 12:1 — “इसलिये हे भाइयो, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर बिनती करता हूँ, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।”

स्पष्टीकरण: जब हमें यह अहसास होता है कि हमारे जीवन का कोई और स्वामी नहीं है, तब हम मसीह के महान प्रेम के बदले अपना संपूर्ण अस्तित्व (प्राण, आत्मा और शरीर) उनकी सेवा और महिमा के लिए समर्पित कर देते हैं।

5. “मसीहा आया है, जग में खुशियाँ लाया है”

यह गीत का अंतिम भाग मसीह के इस संसार में आने के मुख्य उद्देश्य (सुसमाचार) को घोषित करता है।

लूका 2:10-11 — “तब स्वर्गदूत ने उनसे कहा, ‘मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिये होगा। कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है।'”

यूहन्ना 3:16 — “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।”

स्पष्टीकरण: यीशु मसीह का इस संसार में आना किसी एक जाति या धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे जगत के लिए आनंद और शांति का संदेश है। वही सच्चा मसीहा है जो मानव जाति को पापों से मुक्ति देकर सच्ची खुशी और अनंत जीवन देने आया है।

निष्कर्ष: यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारा उद्धार केवल प्रभु यीशु के अनुग्रह से हुआ है। वह हमारा चरवाहा, रक्षक और स्वामी है, जिसके सामने हमें आदर से अपना शीश झुकाना चाहिए और पूरे संसार में उसके प्रेम का पैगाम फैलाना चाहिए।

Tore Siwa Jaun Kahaan Lyrics in hindi

तोरे सिवा जाऊँ कहाँ | Lyrics song in hindi

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