पवित्र मुझे बना दे प्रभु | Lyrics song
पवित्र मुझे बना दे प्रभु
शुद्ध मुझे कर दे प्रभु
ताकि तेरे जैसा दिखू …….. 2
1) शरीर की अभिलाषाओं पर
शैतान की सारी ताकत पर
विजय में पाऊ जय में पाऊ
ताकि तेरे जैसा दिखूं …… 2
2) तेरा वचन मेरे दिल में रखू
प्यार में तुझ से ही करू
प्रार्थना में बल मैं पाऊ
ताकि तेरे जैसा दिखूं ……. 2
3) तेरा हाथ सद़ा मुझ पर रहे
तेरी अगुवाई में नित मैं चलू
संगति में तेरी पवित्र आत्मा में बढूं
ताकि तेरे जैसा दिखूं …… 2
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह आनंदमय गीत प्रभु यीशु मसीह के जन्म (क्रिसमस) पर मनाए जाने वाले उत्सव, संसार को मिलने वाली आत्मिक ज्योति और मसीहा के आगमन से छाई हुई आशा को प्रकट करता है। यह गीत विश्वासियों को ताली बजाने, नाचने, गाने और खुशियाँ मनाने का आह्वान करता है क्योंकि पाप के अंधकार में डूबे जगत को बचाने के लिए स्वयं परमेश्वर का पुत्र एक चरनी में प्रकट हुआ।
1. जगत की ज्योति और चमका सितारा (स्थायी का संदेश)
गीत की शुरुआत मसीह के जन्म के उस मुख्य उद्देश्य को बताती है कि यह संसार पाप, निराशा और मृत्यु के अंधकार में डूबा हुआ था। यीशु मसीह इस संसार में एक सच्चे प्रकाश (नूर) की तरह आए ताकि भटकते हुए मनुष्यों को सत्य और अनंत जीवन की सही राह दिखा सकें।
- यूहन्ना 8:12“तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, ‘जगत की ज्योति मैं हूँ; जो मेरे पीछे हो लेगा वह अंधकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा’।”
- मत्ती 4:16 (यशायाह 9:2 की भविष्यवाणी)“जो लोग अंधकार में बैठे थे उन्होंने बड़ा उजाला देखा; और जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर उजाला चमका।”
- यूहन्ना 1:9“सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशमान करती है, जगत में आने वाली थी।”
स्पष्टीकरण: जब आदम के पाप के कारण पूरा मानव जीवन आत्मिक अंधकार की गर्त में चला गया था, तब यीशु मसीह ने इस संसार में जन्म लेकर एक ऐसा स्वर्गीय सितारा चमकाया जिसने पूरी मानवता को परमेश्वर के राज्य का मार्ग दिखा दिया।
2. आशा की किरण और नूर का आगमन (पहले अंतरे का संदेश)
संसार में जहाँ हर तरफ निराशा थी, वहीं मसीह का जन्म एक नई उम्मीद और स्वर्गीय महिमा लेकर आया। मसीहा के आने से मनुष्यों को यह भरोसा मिला कि अब वे अनाथ नहीं हैं, बल्कि परमेश्वर का अनुग्रह और प्रेम उनके जीवन में आ चुका है। इसलिए विश्वासियों को मसीह के दर्शन के लिए मगन होकर आगे बढ़ना चाहिए।
- लूका 1:78-79“यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी दया के कारण होगा; जिसके द्वारा ऊपर से हमारे ऊपर भोर का सूर्य उदय होगा। कि अंधकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पैरों को सीधे मार्ग पर चलाए।”
- तीतुस 2:11“क्योंकि परमेश्वर का वह अनुग्रह प्रगट हुआ है, जो सब मनुष्यों के उद्धार का कारण है।”
- रोमियों 15:13“सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनंद और शांति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।”
स्पष्टीकरण: प्रभु यीशु मसीह का पृथ्वी पर आना कोई साधारण घटना नहीं थी; वह साक्षात परमेश्वर का तेज और नूर थे। उनका आगमन हमारे निराश जीवनों में उद्धार और अनंत काल की जीवंत आशा की किरण बनकर चमका है।
3. चरनी में लेटा परमेश्वर का पुत्र (दूसरे अंतरे का संदेश)
सारी सृष्टि का रचयिता और ब्रह्मांड का स्वामी होने के बाद भी, यीशु ने अपनी महिमा को छोड़कर एक दीन-हीन चरनी में जन्म लिया। वह परमेश्वर के एकमात्र पुत्र हैं, जिन्होंने मनुष्यों से प्रेम करने के कारण यह रूप धारण किया। यह अंतरा हमें उस विनम्रता का दर्शन करने और आनंदित होने का संदेश देता है।
- यूहन्ना 3:16“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।”
- लूका 2:12“और तुम्हारे लिये यह चिन्ह है, कि तुम एक बालक को कपड़ों में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे।”
- फिलिप्पियों 2:6-7“जिसने परमेश्वर के स्वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।”
स्पष्टीकरण: चरनी में लेटा हुआ वह बालक कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि स्वयं जीवित परमेश्वर का पुत्र है। उसकी यह नम्रता सिखाती है कि परमेश्वर ऊंचे महलों में नहीं, बल्कि उन लोगों के टूटे और दीन हृदयों में वास करने आता है जो विश्वास के साथ उसके दर्शन करने आते हैं।


