पागल हूँ दीवाना हूँ Lyrics song
मैं तो मसीह के लिए
पागल हूँ दीवाना हूँ...4
ऐ दुनियांवालो तुम किसके लिए
पागल हो दीवाने हो ...2
1.उसके वचन का बंजारा हूँ मैं
लोगों ने समझा आवारा हूँ मैं ...2
अपने ही लोगों में हूँ ...2
फिर भी मैं बेगाना हूँ ...2
ऐ दुनियांवालो तुम किसके लिए
पागल हो बेगाने हो ...2
मैं तो मसीह के लिए
पागल हूँ दीवाना हूँ ...2
2.उसके बदन से बहा मुक्ति का झरना
मेरे लिए उसको पड़ा सूली पे मरना
उसके बदन से बहा मुक्ति का झरना
उसको पड़ा था मेरे खातिर ही मरना
मैं उसके पाँवों में
छोटा सा नज़राना हूँ ...2
ऐ दुनियांवालो तुम किसके लिए
पागल हो नज़राने हो
मैं तो मसीह के लिए
पागल हूँ दीवाना हूँ ...2
एक दिन बना था मेरे खातिर वो पागल
तब ही मिला था मेरी कश्ती को साहिल -2
मैं उसके दुखों का
जीवता अफ़साना हूँ ...2
ऐ दुनियांवालो तुम किसके लिए
पागल हो अफ़साने हो
मैं तो मसीह के लिए
पागल हूँ दीवाना हूँ ...2
तुम कर रहे हो कुछ पाने की बातें
मैं कर रहा हूँ उड़ जाने की बातें
तुम कर रहे हो कुछ बनने की बातें
मैं कर रहा हूँ यहाँ से चलने की बातें
मसीह की न उतरे मेरी
वो शराब न उतरे मेरी
मैं ऐसा मस्ताना हूँ
ऐ दुनियांवालो तुम किसके लिए
पागल हो मस्ताने हो
मैं तो मसीह के लिए
पागल हूँ दीवाना हूँ ...2
गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह मसीही गीत एक विश्वासी के हृदय की उस गहरी और अटूट लगन को दर्शाता है, जो वह प्रभु यीशु मसीह के प्रति रखता है। दुनिया की नजरों में जो मसीह का प्रेम है, वह मूर्खता या ‘पागलपन’ लग सकता है, लेकिन एक सच्चे विश्वासी के लिए यह मसीह के साथ आत्मिक मिलन और अनंत जीवन का आनंद है। यह गीत संसार की नश्वर चीजों को छोड़कर स्वर्गीय बातों पर मन लगाने की प्रेरणा देता है।
नीचे इस गीत के मुख्य विचारों और उनसे जुड़े बाइबल वचनों का विस्तृत स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. मसीह के लिए पागलपन (संसार की नजरों में मूर्खता)
गीत की मुख्य पंक्ति है, “मैं तो मसीह के लिए पागल हूं दीवाना हूं।” जब कोई व्यक्ति मसीह के प्रेम में पूरी तरह डूब जाता है, तो संसार उसे समझ नहीं पाता। बाइबल स्पष्ट करती है कि क्रूस की कथा और मसीह का सुसमाचार नाश होने वालों के लिए मूर्खता है, लेकिन उद्धार पाने वालों के लिए यह परमेश्वर की सामर्थ्य है।
- 1 कुरुन्थियों 1:18 — “क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के लिए मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के लिए परमेश्वर की सामर्थ्य है।” [00:09]
- 1 कुरुन्थियों 4:10 — “हम मसीह के लिए मूर्ख हैं, परन्तु तुम मसीह में बुद्धिमान हो; हम निर्बल हैं, परन्तु तुम बलवान हो; तुम आदरणीय हो, परन्तु हम अनादरणीय हैं।” [00:31]
स्पष्टीकरण: प्रेरित पौलुस भी स्वयं को मसीह के लिए मूर्ख या पागल कहलाने में गर्व महसूस करते थे, क्योंकि संसार की बुद्धि परमेश्वर के सामने कुछ भी नहीं है। यह गीत इसी आत्मिक दीवानगी को दर्शाता है।
2. संसार को पाना बनाम स्वर्ग के लिए उड़ जाना
गीत के बोल कहते हैं, “तुम कर रहे हो कुछ पाने की बातें, मैं कर रहा हूं उड़ जाने की बातें।” यहाँ संसार के लोग धन, संपत्ति और मान-सम्मान पाने में लगे हैं, जबकि विश्वासी प्रभु यीशु मसीह के दोबारा आगमन (Rapture) और उसके साथ बादलों पर उड़ जाने की तैयारी कर रहा है।
- फिलिप्पियों 3:20 — “परन्तु हमारा देश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता अर्थात् प्रभु यीशु मसीह के वहाँ से आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” [01:11]
- 1 थिस्सलुनीकियों 4:17 — “तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिए जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें; और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।” [01:31]
स्पष्टीकरण: यह वचन साफ करता है कि हमारा असली ठिकाना यह पृथ्वी नहीं बल्कि स्वर्ग है। जब प्रभु का बिगुल फूंका जाएगा, तब मसीह के दीवाने हवा में उससे मिलने के लिए उठा लिए जाएंगे। इसलिए, सांसारिक इच्छाओं के बदले स्वर्गीय बातों पर ध्यान लगाना ही सबसे श्रेष्ठ है।
3. संसार में परदेशी और बेगाना होना
गीतकार कहता है, “अपने ही लोगों में हूं फिर भी मैं बेगाना हूं।” जब हम मसीह को अपना लेते हैं, तो हमारे विचार और जीवन का तरीका बदल जाता है, जिससे हमारे अपने लोग या संसारी मित्र हमें पराया समझने लगते हैं।
- यूहन्ना 15:19 — “यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रीति रखता; परन्तु इस कारण कि तुम संसार के नहीं, वरन् मैंने तुम्हें संसार में से चुन लिया है, इसीलिए संसार तुमसे बैर रखता है।” [01:49]
- 1 पतरस 2:11 — “हे प्रियो, मैं तुमसे विनती करता हूँ कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से बचे रहो जो आत्मा से युद्ध करती हैं।”
स्पष्टीकरण: यीशु ने पहले ही कह दिया था कि संसार मसीह के चेलों से बैर रखेगा क्योंकि वे संसार के नहीं हैं। हम इस पृथ्वी पर केवल कुछ समय के यात्री और परदेशी हैं, हमारा असली घर स्वर्ग में है।
4. पवित्र आत्मा का मतवालापन (आत्मिक मदिरा)
गीत की एक बहुत ही सुंदर पंक्ति है, “शराब ना उतरे मेरी, मैं ऐसा मत वाला हूं।” यहाँ संसारी दाखमधु (शराब) की बात नहीं हो रही, बल्कि पवित्र आत्मा के आनंद और उसकी उपस्थिति के नशे की बात हो रही है, जो कभी कम नहीं होता।
- इफिसियों 5:18 — “और दाखमधु से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, परन्तु आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।” [03:08]
- प्रेरितों के काम 2:13-15 — “परन्तु दूसरों ने ठट्ठा करके कहा, ‘वे तो नई मदिरा के नशे में हैं।’ तब पतरस ने उन ग्यारहों के साथ खड़े होकर ऊँचे शब्द से उनसे कहा, ‘…ये लोग नशे में नहीं हैं, जैसा तुम समझ रहे हो, क्योंकि अभी तो पहर ही दिन चढ़ा है।'” [03:27]
स्पष्टीकरण: पिन्तेकुस्त के दिन जब चेलों पर पवित्र आत्मा उतरा, तो लोग समझने लगे कि वे नशे में हैं। पवित्र आत्मा का आनंद ऐसा होता है जो मनुष्य को संसार की चिंताओं से मुक्त करके मसीह की स्तुति में मगन कर देता है।
5. मसीह के चरणों का दास और छोटा सा नजराना
आखिरी हिस्से में गीतकार कहता है, “उसके पाँव में छोटा सा नजराना हूँ।” यह मसीह के सामने पूरी तरह से समर्पण और नम्रता को दर्शाता है। हमारा जीवन प्रभु के चरणों में एक जीवित बलिदान की तरह होना चाहिए।
- रोमियों 12:1 — “इसलिये हे भाइयो, मैं तुमसे परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर विनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।” [04:01]
- भजन संहिता 116:16 — “हे यहोवा, मैं तो सचमुच तेरा दास हूँ; मैं तेरा दास और तेरी दासी का पुत्र हूँ, तूने मेरे बन्धन खोल दिये हैं।” [04:16]
स्पष्टीकरण: जब हम मसीह के प्रेम को पहचान लेते हैं, तो हम अपना संपूर्ण जीवन, अपनी योग्यताएं और अपनी सांसें उसके चरणों में एक छोटे से उपहार (नजराने) के रूप में सौंप देते हैं। यही एक विश्वासी की सबसे बड़ी आराधना है।


