मेरी तो इज्ज़त खुदावंद है Lyrics song
मेरी तो इज्ज़त ही खुदावंद है, है…
मेरी तो ताकत ही खुदावंद है, है…
मेरा अपना तो कुछ भी नहीं, हां….
मेरी तो रग-रग में नाम उसका लिखा है
मेरी तो इज्ज़त खुदावंद है,
मेरी तो दौलत ही खुदावंद है…..
1. तेरे कहने से चलता हूं मैं,
तेरे कहने से रुकता हूं मैं तेरे कलाम में रहकर ही,
अब हर एक काम को करता हूं मैं
मुझे खौंफ किसी का नहीं,
मैने जब से तेरे रास्तों को चुना है
मेरी तो इज्ज़त खुदावंद है…..
2. हर एक दुआ को उसने सुना है, उसने सुना है
आरज़ू पूरी वो करता है, हां करता है
मुझे उसकी रज़ा मंजूर,
क्या बेहतर मेरे लिए उसको पता है मेरी तो इज्ज़त खुदावंद है…..
गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)
यह गीत पूरी तरह से मसीह में पूर्ण आत्म-समर्पण, नम्रता और पूर्ण निर्भरता का प्रतीक है। इस गीत का मुख्य सार यह है कि एक सच्चे विश्वासी का अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व, घमंड या सांसारिक पहचान नहीं होती। उसकी असली इज़्ज़त, ताकत, दौलत और पहचान केवल और केवल प्रभु यीशु मसीह (खुदावंद) हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि जब हम अपनी इच्छाओं को छोड़कर परमेश्वर के वचनों (कलाम) के अनुसार कदम बढ़ाते हैं, तो हमारे जीवन से हर प्रकार का भय दूर हो जाता है। हमारी हर प्रार्थना सुनी जाती है, क्योंकि हम अपनी मर्जी नहीं बल्कि उसकी भली और सिद्ध इच्छा (रज़ा) के सामने खुद को सौंप देते हैं।
बाइबल आधारित वचनों का स्पष्टीकरण (Bible Verses Explanation)
1. मुख्य भाग (स्थायी): प्रभु में इज़्ज़त, ताकत और पहचान
“मेरी तो इज़्ज़त ही खुदावंद है… मेरी तो ताकत ही खुदावंद है… मेरी तो रग-रग में नाम उसका लिखा है…”
यह भाग संसार के घमंड को पूरी तरह नकारता है। एक मसीही व्यक्ति अपनी दौलत या नाम पर नहीं, बल्कि इस बात पर गर्व करता है कि वह मसीह का है।
- बाइबल का सटीक वचन (इज़्ज़त और घमंड के लिए):गलातियों 6:14 “परन्तु ऐसा न हो कि मैं और किसी वस्तु पर घमण्ड करूँ, केवल अपने प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर, जिसके द्वारा संसार मेरे लिये और मैं संसार के लिये क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ।”
- बाइबल का सटीक वचन (ताकत के लिए):भजन संहिता 28:7 “यहोवा मेरा बल और मेरी ढाल है; उस पर भरोसा रखने से मेरे मन को सहायता मिली है; इसलिये मेरा हृदय प्रफुल्लित है; और मैं गीत गाकर उसका धन्यवाद करूँगा।”
- स्पष्टीकरण: प्रेरित पौलुस की तरह इस गीत का लेखक भी मानता है कि संसार की कोई भी उपलब्धि प्रभु के सामने तुच्छ है। हमारी असली ताकत और इज़्ज़त यहोवा है। जब गीत कहता है कि “रग-रग में नाम उसका लिखा है”, तो यह दर्शाता है कि हमारा जीवन अब हमारा नहीं, बल्कि मसीह का है जो हमारे अंदर वास करता है।
2. पहला अंतरा: परमेश्वर के वचन (कलाम) के अनुसार चलना और निर्भयता
“तेरे कहने से चलता हूं मैं… तेरे कलाम में रहकर ही, अब हर एक काम को करता हूं मैं, मुझे खौफ़ किसी का नहीं…”
यह अंतरा आज्ञाकारिता को प्रकट करता है। जब हम परमेश्वर के वचन के अनुसार अपने कदम उठाते हैं, तो जीवन के सारे डर खत्म हो जाते हैं, क्योंकि अगुवाई खुद खुदावंद कर रहा होता है।
- बाइबल का सटीक वचन (वचन के अनुसार चलने के लिए):भजन संहिता 119:105 “तेरा वचन मेरे पाँवों के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।”
- बाइबल का सटीक वचन (निर्भयता के लिए):भजन संहिता 118:6 “यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूँगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?”
- स्पष्टीकरण: जब हम अपने ज्ञान का सहारा न लेकर परमेश्वर के कलाम (बाइबल) को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तो हमारा हर काम सफल होता है। नीतिवचन के अनुसार जब हम सीधे रास्तों पर चलते हैं, तो परमेश्वर हमारे मार्ग को सुगम बनाता है। और जब ब्रह्मांड का रचयिता हमारे साथ है, तो इंसानों या शैतान का कोई भी खौफ़ हमें डिगा नहीं सकता।
3. दूसरा अंतरा: प्रार्थनाओं का उत्तर और परमेश्वर की इच्छा (रज़ा) का स्वीकार
“हर एक दुआ को उसने सुना है… मुझे उसकी रज़ा मंजूर, क्या बेहतर मेरे लिए उसको पता है…”
यह भाग प्रार्थना में भरोसे और परमेश्वर की संप्रभुता को स्वीकार करने के बारे में है। हम अपनी मांगें प्रभु के सामने रखते हैं, लेकिन आखिरी फैसला उसकी उत्तम इच्छा पर छोड़ देते हैं।
- बाइबल का सटीक वचन (प्रार्थना सुनने के लिए):1 यूहन्ना 5:14 “और हमें उसके सामने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो वह हमारी सुनता है।”
- बाइबल का सटीक वचन (परमेश्वर की उत्तम योजना के लिए):यिर्मयाह 29:11 “क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएँ मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन् कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूँगी।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन स्पष्ट करता है कि हमारी हर आरज़ू परमेश्वर सुनता है, लेकिन वह हमें वही देता है जो हमारे लिए सबसे बेहतर है। प्रभु यीशु ने भी गतिसमनी के बाग में प्रार्थना की थी कि “मेरी नहीं, बल्कि तेरी इच्छा पूरी हो।” यही आत्मिक परिपक्वता इस गीत में दिखाई देती है, जहाँ विश्वासी कहता है कि “मुझे उसकी रज़ा मंजूर है”, क्योंकि हमारा परमेश्वर हमारे भूत, वर्तमान और भविष्य को जानता है और उसकी योजनाएं हमेशा हमारे भले के लिए होती हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह गीत एक मसीही के जीवन का संपूर्ण दर्पण है। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम खुद को शून्य (जीरो) कर लेते हैं, तब मसीह हमारे जीवन में सब कुछ बन जाता है। इस गीत का संदेश विश्वासियों को अपनी सांसारिक दौलत या ताकत पर भरोसा करने के बजाय, पूरी तरह से जीवित परमेश्वर के कलाम और उसकी इच्छा के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है।



