एबेनेज़र Lyrics song
एबेनेजरए
तूने मुझे संभाला है,
तूने मुझे बचाया है
मैं मेरा घर और मेरा घराना
नित यहोवा की स्तुति करें
माँ के समान तूने प्यार किया
हर दर्द को तूने सहलाया …..
एबेनेजरए
तूने मुझे संभाला है,
तूने मुझे बचाया है
धन्यवाद-धन्यवाद-धन्यवाद
अब्बा पिता तेरा धन्यवाद
धन्यवाद-धन्यवाद-धन्यवाद
गले से लगाया धन्यवाद
1. टूटे हुए मन को तूने सवारा
खुशियों से है भरा मेरे हर
दुखों को तूने उठाया
मैं धन्यवाद करता रहूँगा …..
एबेनेजरए
तूने मुझे संभाला है,
तूने मुझे बचाया है
धन्यवाद-धन्यवाद-धन्यवाद
अब्बा पिता तेरा धन्यवाद
धन्यवाद-धन्यवाद-धन्यवाद
गले से लगाया धन्यवाद
2. सब नामों से ऊंचा तेरा ही
नाम मांगने से ज्यादा मिला
अपने हाथों से मुझको बनाया
तेरी राहों पर चलना सिखाया …..
एबेनेजरए
तूने मुझे संभाला है,
तूने मुझे बचाया है
धन्यवाद-धन्यवाद-धन्यवाद
अब्बा पिता तेरा धन्यवाद
धन्यवाद-धन्यवाद-धन्यवाद
गले से लगाया धन्यवाद
“एबेनेज़र, तूने मुझे संभाला है” — विस्तृत सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह गीत मुख्य रूप से परमेश्वर की ऐतिहासिक सहायता, परिवार की आत्मिक वेदी, उसके माता जैसे प्रेम, टूटे हुए मन को चंगा करने और उसकी असीम आशीषों पर आधारित है।
1. एबेनेज़र: यहाँ तक यहोवा ने हमारी सहायता की है
गीत का मुख्य शीर्षक और टेक सीधे तौर पर शमूएल नबी के जीवन की ऐतिहासिक घटना से लिया गया है। जब परमेश्वर ने इस्राएलियों को उनके दुश्मनों पर विजय दिलाई, तब शमूएल ने एक पत्थर खड़ा किया और परमेश्वर की सहायता को याद रखने के लिए उसका नाम ‘एबेनेज़र’ रखा। यह गीत गवाही देता है कि परमेश्वर ने हमें केवल संभाला ही नहीं, बल्कि हर आत्मिक और शारीरिक खतरे से बचाया भी है।
1 शमूएल 7:12 “तब शमूएल ने एक पत्थर लेकर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेज़र रखा, ‘यहाँ तक यहोवा ने हमारी सहायता की है।'”
भजन संहिता 28:7 “यहोवा मेरा बल और मेरी ढाल है; उस पर मेरा भरोसा था, सो मुझे सहायता मिली; इसलिये मेरा हृदय प्रफुल्लित है; और मैं गीत गाकर उसका धन्यवाद करूँगा।”
वचन का स्पष्टीकरण: हमारा परमेश्वर हमारा ‘एबेनेज़र’ है। अतीत से लेकर वर्तमान तक, उसने हमें गिरने से बचाया है और संभाला है। इस गीत को गाकर विश्वासी यह स्वीकार करता है कि वह आज जहाँ भी है, केवल परमेश्वर की दया और उसके द्वारा संभाले जाने के कारण है।
2. घराने सहित यहोवा की स्तुति और माँ जैसा कोमल प्रेम
गीत की पंक्तियाँ ‘मैं मेरा घर और मेरा घराना, नित यहोवा की स्तुति करें’ यहोशू की उस महान आत्मिक घोषणा को दर्शाती हैं जहाँ वह पूरे परिवार को परमेश्वर की सेवा में समर्पित करता है। इसके साथ ही, परमेश्वर के प्रेम की तुलना एक ऐसी माता से की गई है जो अपने बच्चे के हर दर्द को सहलाती है और उसे गले से लगाती है।
यहोशू 24:15 “और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किसकी सेवा करोगे… परन्तु मैं और मेरा घराना तो यहोवा ही की सेवा करेंगे।”
यशायाह 66:13 “जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैसे ही मैं भी तुम्हें शान्ति दूँगा; तुम्हें यरूशलेम ही में शान्ति मिलेगी।”
रोमियों 8:15 “क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भयभीत हो, परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिससे हम हे अब्बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं।”
वचन का स्पष्टीकरण: एक मसीही विश्वासी का यह कर्तव्य है कि वह अपने पूरे घराने (परिवार) के साथ मिलकर परमेश्वर की आराधना करे। जब विपत्तियां आती हैं, तो संसार मुंह फेर लेता है, लेकिन परमेश्वर एक माँ की तरह हमारे आंसुओं को पोंछता है। वह हमें अनाथ नहीं छोड़ता, बल्कि ‘अब्बा पिता’ बनकर हमें अपने गले से लगा लेता है।
3. टूटे हुए मन को संवारना और दुखों को उठाना
पहले अंतरे में बताया गया है कि कैसे प्रभु टूटे हुए दिलों को नया जीवन देता है और हमारे दुखों को अपने ऊपर ले लेता है। यह सीधे तौर पर प्रभु यीशु मसीह के क्रूस के बलिदान और उसके चंगाई देने वाले स्वभाव को प्रकट करता है।
भजन संहिता 147:3 “वह खेदित मनवालों को चंगा करता है, और उनके शोकों पर पट्टी बान्धता है।”
यशायाह 53:4 “निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दुखों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।”
भजन संहिता 34:18 “यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है, और पिसे हुए लोगों का उद्धार करता है।”
वचन का स्पष्टीकरण: जब मनुष्य निराश होकर पूरी तरह टूट जाता है, तब प्रभु यीशु का अनुग्रह उसे नया जीवन देता है। उसने हमारे सारे आत्मिक, मानसिक और शारीरिक दुखों को क्रूस पर स्वयं उठा लिया, ताकि हमारा जीवन खुशियों से भर जाए। इसी कारण हमारा हृदय हमेशा ‘धन्यवाद’ के गीतों से भरा रहना चाहिए।
4. सब नामों से ऊंचा नाम और मांगने से ज्यादा मिलना
दूसरे अंतरे में यीशु मसीह के नाम की सर्वोच्चता की घोषणा की गई है। साथ ही, यह सच्चाई स्वीकार की गई है कि परमेश्वर हमारी सोच और हमारी प्रार्थनाओं से कहीं बढ़कर हमें आशीषें प्रदान करता है क्योंकि उसने हमें अपने हाथों से रचा है और अपनी राहों पर चलना सिखाया है।
फिलिप्पियों 2:9-10 “इस कारण परमेश्वर ने उसको अति उच्च भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है, कि यीशु के नाम पर हर एक घुटना टिके—चाहे स्वर्गदूतों का हो, चाहे पृथ्वी पर के रहनेवालों का, चाहे पृथ्वी के नीचे वालों का।”
इफिसियों 3:20 “अब जो ऐसा सामर्थी है कि हमारी विनती और समझ से कहीं बढ़कर काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है।”
यशायाह 64:8 “तौभी, हे यहोवा, तू हमारा पिता है; हम तो मिट्टी हैं और तू हमारा कुम्हार है; हम सब के सब तेरे हाथ के काम हैं।”
भजन संहिता 32:8 “मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उसमें तेरी अगवानी करूँगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा और सम्मति दिया करूँगा।”
वचन का स्पष्टीकरण: यीशु का नाम इस ब्रह्मांड का सबसे सामर्थी नाम है। सृष्टि का कर्ता होने के नाते परमेश्वर हमारी जरूरतों को हमसे बेहतर जानता है। जब हम उसकी राहों पर चलना सीखते हैं, तो वह हमारी झोली को हमारी कल्पना से अधिक आशीषों से भर देता है। वह हमारा कुम्हार है जो हमें अपने हाथों से नया रूप देता है।
निष्कर्ष (Post Summary)
यह गीत परमेश्वर पिता के प्रति एक गहरी कृतज्ञता की भेंट है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा परमेश्वर केवल दूर रहने वाला ईश्वर नहीं है, बल्कि वह हमें गले लगाने वाला दयालु ‘अब्बा पिता’ है। उसने हमारे टूटे हुए जीवन को संवारा, हमारे दुखों को उठाया, हमारी आवश्यकताओं से बढ़कर हमें दिया और हमें अपने सत्य के मार्ग पर चलना सिखाया। आइए, अपने पूरे घराने के साथ मिलकर अपने ‘एबेनेज़र’ परमेश्वर को धन्यवाद दें, जिसने यहाँ तक हमें संभाला है और आगे भी संभालता रहेगा!



