मेरे येशु मेरी आदत बनजा Lyrics song
येशु मेरे येशु, मेरी आदत बनजा- आदत बनजा
बदल मुझे ज़िन्दगानी से मेरी, अपना किस्सा सुना
येशु मेरे येशु हां येश…….
1. मेरे दिन की शुरूआत हो तू ही, मेरी रात हो तुझपे ख़तम
मैं बैठा रहूं खोजता हूं, और तुझमें ही रहता मगन येशु
मेरे येशु हां येशशु……
2. वो पाकीज़गी (पवित्रताई) ही अलग है, जो तुझसे मिली है खुदा
ये सलीका है तुझसे मिलन का, अब होना नहीं तुझसे जुदा
तुझसे हां तुझसे हूं, मैं पाक सदा-पाक सदा
येशु मेरे येशु हां येशु…….
3. खिदमत तेरी करता रहूं मैं, तेरे हुक्म को माना करूं
दिल तुझसे तस्सली है पाता, मैं तेरा ही ख्याल करूं
दिल से हां दिल से, तेरी गाऊं सना- गाऊं सना
येशु मेरे येशु हां येशु…….
1. कुम्हार और मिट्टी का पूर्ण समर्पण
इस गीत में भक्त स्वयं को एक मिट्टी के पात्र के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसे प्रभु अपनी इच्छा के अनुसार नया रूप दे सकें। यह पूरी तरह से परमेश्वर की संप्रभुता को स्वीकार करने का प्रतीक है।
- बाइबल वचन:“परन्तु अब, हे यहोवा, तू हमारा पिता है; हम तो मिट्टी हैं, और तू हमारा कुम्हार है; हम सब तेरे हाथ के काम हैं।” (यशायाह 64:8)
- स्पष्टीकरण: यह वचन हमें सिखाता है कि जब हम प्रभु से खुद को बदलने के लिए कहते हैं, तो हम उसे अधिकार देते हैं कि वह हमारे जीवन के टूटे हुए हिस्सों को फिर से जोड़े। जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी को अपनी पसंद के बर्तन में ढालता है, वैसे ही प्रभु हमें अपनी महिमा के पात्र बनाना चाहता है।
2. मन का नवीनीकरण और नई सोच
परिवर्तन की शुरुआत हमारे विचारों और दृष्टिकोण से होती है। गीत हमें संसार की रीति को छोड़कर मसीह की सोच को धारण करने की प्रेरणा देता है।
- बाइबल वचन:“और इस संसार के सदृश न बनो; वरन तुम्हारे मन के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिससे तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।” (रोमियों 12:2)
- स्पष्टीकरण: “बदल दे” की पुकार का अर्थ है—पुरानी कड़वाहट, ईर्ष्या और सांसारिक लालसाओं को त्याग कर प्रभु की पवित्र इच्छा को जानना। जब हमारा मन नया होता है, तो हमारा जीवन स्वतः ही मसीह की सुगंध फैलाने लगता है।
3. नया सृजन (A New Creation)
मसीह में आने का अर्थ केवल एक बेहतर इंसान बनना नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से नई पहचान प्राप्त करना है।
- बाइबल वचन:“इसलिये यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गई हैं।” (2 कुरिन्थियों 5:17)
- स्पष्टीकरण: यह वचन गीत के केंद्र में है। जब यीशु हमें बदलता है, तो वह हमारे पुराने पापमय जीवन को समाप्त कर देता है। वह हमें एक नया हृदय और एक नया उद्देश्य देता है। गीत की हर पंक्ति इसी ‘नई सृष्टि’ बनने की लालसा को व्यक्त करती है।
4. हृदय की शुद्धता की प्रार्थना
परिवर्तन के लिए सबसे आवश्यक है कि हमारा हृदय शुद्ध हो, क्योंकि परमेश्वर का आत्मा पवित्र हृदय में वास करता है।
- बाइबल वचन:“हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।” (भजन संहिता 51:10)
- स्पष्टीकरण: राजा दाऊद की यह प्रार्थना गीत के सार से मेल खाती है। एक भक्त जानता है कि वह अपने आप को शुद्ध नहीं कर सकता। केवल प्रभु का वचन और उसका अनुग्रह ही उसे पाप के दागों से धोकर बर्फ के समान उज्ज्वल बना सकता है।
5. मसीह के तेजस्वी रूप में ढलना
बदलने की यह प्रक्रिया एक बार की घटना नहीं है, बल्कि यह मसीह के समान बनने का एक निरंतर सफर है।
- बाइबल वचन:“परन्तु हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में; और प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश-अंश करके बदलते जाते हैं।” (2 कुरिन्थियों 3:18)
- स्पष्टीकरण: यह वचन स्पष्ट करता है कि जैसे-जैसे हम प्रभु के निकट जाते हैं, हम धीरे-धीरे (अंश-अंश करके) उसके जैसे बनते जाते हैं। गीत हमें इसी आत्मिक उन्नति के प्रति सचेत करता है।


