हर चीज़ बदल जाएगी Lyrics song
हर चीज़ बदल जाएगी पर येशु नाम न बदलेगा
उसकी जात और उसके काम और
पाक कलाम ना बदलेगा ………
1.मौसम दुनिया के बदलेंगे बदलेंगे हालात
ना तबदील वफा और वादे होंगे हर दम साथ
हर चीज़ बदल जाएगी
2.हर एक बशर है घास की मानिंद फूलों जैसे शाम
अब डी राज मसीही का होगा वो सच्चा सुलतान
हर चीज़ बदल जाएगी
3.बीमारी न ठहर सकेगी न होगा नुकसान
येशु कुदरत वाला डाले मुर्दों में भी जान
हर चीज़ बदल जाएगी
4.फतह सदा की येशु की है वो मेरा चौपन
काल और आज अबद तक है वो ऊंची उसकी शा
हर चीज़ बदल जाएगी
गीत का सारांश और बाइबल वचनों का विस्तृत स्पष्टीकरण
यह मसीही गीत इस नश्वर संसार की अस्थिरता और परमेश्वर के वचन व उनके स्वभाव की अपरिवर्तनीयता (न बदलने वाले गुण) के बीच के गहरे अंतर को प्रकट करता है। गीतकार हमें याद दिलाता है कि इस दुनिया में सब कुछ—जैसे मौसम, परिस्थितियां, इंसान का जीवन और उसकी ताकत—समय के साथ खत्म या बदल जाएगी, लेकिन प्रभु यीशु मसीह का नाम, उनका प्रेम, उनके वादे और उनका पवित्र वचन (कलाम) हमेशा एक समान और अटल रहेंगे।
1. यीशु मसीह की अपरिवर्तनीयता (कभी न बदलना)
गीत का मुख्य संदेश (स्थायी) है— “हर चीज़ बदल जाएगी पर यीशु नाम न बदलेगा, उसकी जात और उसके काम और पाक कलाम ना बदलेगा।” यह मसीही विश्वास की सबसे बड़ी चट्टान है कि परमेश्वर कभी नहीं बदलते।
- इब्रानियों 13:8 — “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है।”
- भजन संहिता 119:89 — “हे यहोवा, तेरा वचन आकाश में सदा तक अटल रहता है।”
- मत्ती 24:35 — “आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।”
स्पष्टीकरण: इन वचनों के अनुसार, इंसानी फितरत और दुनिया के नियम हमेशा बदलते रहते हैं, लेकिन यीशु मसीह का चरित्र, उनका प्रेम और उनकी सामर्थ्य युगों-युगों तक वैसी ही रहती है जैसी वह सृष्टि की शुरुआत में थी। उनका “पाक कलाम” (पवित्र वचन) ब्रह्मांड के समाप्त होने के बाद भी जीवित और अटल रहेगा।
2. बदलते हालात और परमेश्वर के वादे
पहले अंतरे में कहा गया है— “मौसम दुनिया के बदलेंगे बदलेंगे हालात, ना तबदील वफा और वादे होंगे हर दम साथ।” इंसान जब दुखों और संकटों से गुजरता है, तो उसके हालात बदल जाते हैं, लेकिन परमेश्वर की वफादारी स्थिर रहती है।
- गिणती 23:19 — “परमेश्वर मनुष्य नहीं कि झूठ बोले, और न वह आदमी है कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो उसने कहा उसे न करे? क्या वह प्रतिज्ञा करके उसे पूरी न करे?”
- यशायाह 54:10 — “चाहे पहाड़ टल जाएं और पहाड़ियां हिल जाएं, तो भी मेरी करुणा तुझ पर से न हटेगी, और मेरी शान्ति की वाचा न टलेगी; यहोवा जो तुझ पर दया करता है, उसका यही वचन है।”
स्पष्टीकरण: बाइबल स्पष्ट करती है कि चाहे हमारे जीवन में कितने ही बड़े संकट क्यों न आएं और दुनिया की व्यवस्था हिल जाए, परमेश्वर ने हमसे जो वादे किए हैं—जैसे हमें कभी न छोड़ने और न त्यागने का वादा—वे कभी नहीं बदलते। उनकी वफादारी ऋतुओं की तरह नहीं बदलती, बल्कि वह हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़े रहते हैं।
3. मनुष्य की नश्वरता और मसीह का अनंत राज्य
दूसरे अंतरे में लिखा है— “हर एक बशर है घास की मानिंद फूलों जैसे शाम, अब डी राज मसीही का होगा वो सच्चा सुलतान।” यहाँ मनुष्य के जीवन की तुलना घास और फूलों से की गई है जो सुबह खिलते हैं और शाम को मुरझा जाते हैं।
- 1 पतरस 1:24-25 — “क्योंकि हर एक प्राणी घास की नाईं है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल की नाईं है; घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है। परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है।”
- दानिय्येल 7:14 — “और उसको ऐसी प्रभुता, महिमा और राज्य दिया गया, कि देश-देश और जाति-जाति के लोग और भिन्न-भिन्न भाषा बोलनेवाले सब उसकी सेवा करें; उसकी प्रभुता सदा तक रहने वाली है जो कभी टलने की नहीं, और उसका राज्य ऐसा है जो कभी नष्ट होने का नहीं।”
स्पष्टीकरण: ‘बशर’ यानी मनुष्य का जीवन बहुत छोटा और नाशवान है। संसार के बड़े-बड़े राजा और साम्राज्य आए और समाप्त हो गए, लेकिन यीशु मसीह “सच्चा सुल्तान” हैं जिनका राज्य आत्मिक और अनंत है। उनका शासन काल और उनकी महिमा कभी समाप्त नहीं होगी।
4. मसीह की चंगाई और जीवन देने की कुदरत
तीसरा अंतरा मसीह की असीमित सामर्थ्य की गवाही देता है— “बीमारी न ठहर सकेगी न होगा नुकसान, यीशु कुदरत वाला डाले मुर्दों में भी जान।”
- मत्ती 8:16-17 — “जब सांझ हुई, तो वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिनमें दुष्टात्माएं थीं; और उसने वचनों से दुष्टात्माओं को निकाल दिया और सब बीमारों को चंगा किया। ताकि जो वचन यशायाह नबी के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो कि उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।”
- यूहन्ना 11:25 — “यीशु ने उससे कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं; जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।”
स्पष्टीकरण: यीशु मसीह के पास प्रकृति, बीमारी और यहाँ तक कि मृत्यु पर भी पूरा अधिकार है। पवित्र शास्त्र गवाही देता है कि यीशु ने लाजर और याइर की बेटी जैसे मरे हुए लोगों को दोबारा जीवन दिया। गीतकार इसी सामर्थ्य पर भरोसा रखते हुए कहता है कि मसीह की उपस्थिति में कोई भी बीमारी या आत्मिक नुकसान ठहर नहीं सकता।
5. यीशु हमारा सच्चा चरवाहा (चौपन)
चौथे अंतरे में कहा गया है— “फतह सदा की यीशु की है वो मेरा चौपन, काल और आज अबद तक है वो ऊंची उसकी शान।” यहाँ ‘चौपन’ (चोपान) का अर्थ चरवाहा है।
- भजन संहिता 23:1 — “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।”
- यूहन्ना 10:11 — “अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।”
- प्रकाशितवाक्य 19:16 — “और उसके वस्त्र और जांघ पर यह नाम लिखा है, राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।”
निष्कर्ष: यीशु मसीह केवल एक शक्तिशाली परमेश्वर ही नहीं, बल्कि वे अपनी भेड़ों (अपने लोगों) की परवाह करने वाले एक प्यारे और अच्छे चरवाहे भी हैं। शैतान, पाप और मृत्यु पर उनकी विजय (फतह) सदा के लिए निश्चित हो चुकी है। यह संपूर्ण गीत विश्वासियों के मन में यह गहरी तसल्ली पैदा करता है कि चाहे पूरी सृष्टि बदल जाए, हमारा उद्धारकर्ता यीशु और उसका अनुग्रह अनंत काल तक स्थिर रहेगा।


