ज़मीन दे वारिस होवणगे Lyrics song
Zameen De Varis Hovange Lyrics
ज़मीन दे वारिस होवणगे,
मुबारिक खुदावंद दे
ज़मीन दे वारिस……..
1. मैं बच्चा सा हुण बूढ़ा हां, पर नसल हां सादिक दी
न वेखी है लाचार कदी, ना टुक्कर मंगदी वी
ज़मीन दे वारिस…..
2. यहोवा कायम रखदा है, नेक बन्दे दे कदमां नूं
यहोवा करदा है पसंद, नेक बन्दे दे राहां नूं
ज़मीन दे वारिस.
3. ओह कर्ज देंदा रहंदा है, रहम करदा है सदा
ते ओहदा हक्क सम्भालदा है, यहोवा पाक खुदा
ज़मीन दे वारिस…….
गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)
यह गीत परमेश्वर के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी ईश्वरीय प्रतिज्ञा और सांत्वना का संदेश है। गीत का मुख्य विषय है “ज़मीन दे वारिस” होना, जिसका आत्मिक अर्थ है पृथ्वी पर परमेश्वर की आशीषों, शांति और अनन्त विरासत को पाना।
इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि जो लोग धर्मी (सादिक) हैं और खराई से जीवन जीते हैं, परमेश्वर उन्हें कभी लाचार या बेसहारा नहीं छोड़ता। राजा दाऊद अपने बचपन से लेकर बुढ़ापे तक के अनुभव से गवाही देते हैं कि उन्होंने कभी किसी धर्मी व्यक्ति या उसकी संतान को दाने-दाने के लिए तरसते या भीख माँगते (टुक्कर मंगदी) नहीं देखा। परमेश्वर नेक लोगों के कदमों को मजबूत करता है और उनके रास्तों को पसंद करता है। ऐसा व्यक्ति दूसरों के सामने हाथ फैलाने के बजाय हमेशा दूसरों को आशीष देने और कर्ज देने वाला बनता है, क्योंकि पवित्र परमेश्वर उसकी विरासत और उसके हक की रक्षा स्वयं करता है।
बाइबल के मुख्य वचन और आत्मिक स्पष्टीकरण (Bible Verses & Explanation)
चूंकि यह गीत मुख्य रूप से भजन संहिता 37 (Zaboor 37) की चुनिंदा आयतों का हूबहू काव्यात्मक रूपांतरण है, आइए इसके एक-एक भाग को बाइबल के शुद्ध वचनों के साथ गहराई से समझते हैं:
1. पृथ्वी के वारिस और धन्य लोग
गीत का संदर्भ: “ज़मीन दे वारिस होवणगे, मुबारिक खुदावंद दे, ज़मीन दे वारिस……..”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 37:11 – “परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शांति के कारण आनंद मनाएँगे।”
भजन संहिता 37:22 – “क्योंकि जो उससे आशीष पाते हैं वे तो पृथ्वी के अधिकारी होंगे, परन्तु जो उससे शापित होते हैं वे काट डाले जाएँगे।”
स्पष्टीकरण: “मुबारिक” का अर्थ है आशीष पाए हुए लोग और “वारिस” का अर्थ है अधिकार पाने वाले। प्रभु यीशु मसीह ने भी पहाड़ी उपदेश में कहा था कि “धन्य हैं वे जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी (वारिस) होंगे।” यह वचन दर्शाता है कि जो लोग परमेश्वर पर भरोसा रखकर नम्रता और खराई से जीवन जीते हैं, परमेश्वर इस पृथ्वी पर भी उन्हें गरिमा, आदर और बहुतायत की आशीषों का वारिस बनाता है।
2. धर्मी की संतान और परमेश्वर की अद्भुत अलौकिक आपूर्ति
गीत का संदर्भ: “मैं बच्चा सा हुण बूढ़ा हां, पर नसल हां सादिक दी, न वेखी है लाचार कदी, ना टुक्कर मंगदी वी…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 37:25 – “मैं लड़कपन से लेकर बुढ़ापे तक देखता आया हूँ; परन्तु न तो कभी धर्मी को तजा हुआ देखा, और न उसकी संतान को टुकड़े माँगते देखा है।”
स्पष्टीकरण: “सादिक” का अर्थ धर्मी होता है और “नसल” का अर्थ संतान या पीढ़ी है। यह बाइबल के सबसे प्रसिद्ध और दिलासा देने वाले वचनों में से एक है। राजा दाऊद अपने पूरे जीवन का निचोड़ सामने रखते हैं कि जो व्यक्ति परमेश्वर का भय मानकर चलता है, परमेश्वर उसकी और उसकी आने वाली पीढ़ियों की सुधि लेता है। अकाल या तंगी के समय में भी धर्मी की संतान कभी लाचार नहीं होती और न ही उसे भोजन के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाने की नौबत आती है, क्योंकि यहोवा स्वयं उनका प्रदाता (यहोवा यिरे) है।
3. नेक बंदों के कदमों की दृढ़ता और ईश्वरीय सुरक्षा
गीत का संदर्भ: “यहोवा कायम रखदा है, नेक बन्दे दे कदमां नूं, यहोवा करदा है पसंद, नेक बन्दे दे राहां नूं…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 37:23 – “मनुष्य के कदम यहोवा की ओर से दृढ़ होते हैं, और उसके मार्ग से वह प्रसन्न होता है।”
स्पष्टीकरण: इस संसार के टेढ़े-मेढ़े और पाप से भरे रास्तों पर इंसान अपनी बुद्धि से सुरक्षित नहीं चल सकता। लेकिन जब कोई “नेक बंदा” (धर्मी पुरुष) अपने जीवन को परमेश्वर को सौंप देता है, तो यहोवा उसके कदमों को “कायम” (स्थिर और दृढ़) रखता है ताकि वह परीक्षाओं में फिसलने न पाए। परमेश्वर ऐसे व्यक्ति के जीवन के तौर-तरीकों और उसके चाल-चलन (राहां) से बेहद प्रसन्न होता है और उसकी हर मोड़ पर अगुवाई करता है।
4. उदारता, दया और हक्क की हिफाज़त
गीत का संदर्भ: “ओह कर्ज देंदा रहंदा है, रहम करदा है सदा, ते ओहदा हक्क सम्भालदा है, यहोवा पाक खुदा…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 37:26 – “वह तो दिन भर तरस खा खाकर उधार देता है, और उसकी संतान आशीष पाती है।”
भजन संहिता 37:28 – “क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता; और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी रक्षा तो सर्वदा होती है…”
स्पष्टीकरण: एक धर्मी व्यक्ति का जीवन संकीर्ण या मतलबी नहीं होता। चूँकि परमेश्वर उसे भरपूर आशीष देता है, इसलिए उसका हृदय उदार हो जाता है। वह दूसरों पर “रहम” (दया) करता है और कमी-घटी में पड़े लोगों की खुलकर मदद करता है व उन्हें उधार देता है। संसार भले ही किसी सीधे और खराई से चलने वाले व्यक्ति का हक मारना चाहे, लेकिन “पाक खुदा” (पवित्र परमेश्वर) स्वयं खड़ा होकर उसके हक और उसकी विरासत को संभालता है और उसकी सर्वदा रक्षा करता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह महान गीत हर एक मसीही विश्वासी को खराई और धर्म के मार्ग पर दृढ़ता से बने रहने की हिम्मत देता है। संसार में चाहे कितनी भी उथल-पुथल क्यों न मची हो, यदि हम ‘सादिक’ (धर्मी) की तरह परमेश्वर के भय में जीवन जी रहे हैं, तो हमारी और हमारी आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का वादा स्वयं सेनाओं के यहोवा ने किया है। हमें कभी लाचार होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारा परमेश्वर हमारे हक को संभालने वाला और हमें अपनी अनन्त आशीषों का वारिस बनाने वाला जीवित खुदा है। आइए, इस भरोसे के साथ जिएं कि — ज़मीन दे वारिस होवणगे, मुबारिक खुदावंद दे! आमीन।
