रहमत नाल है भरेया होया Lyrics song
Rehmat Nal Hai Bhariya Hoya Lyrics
रहमत नाल है भरेया होया पाक यहोवा साडा
गुस्सा ते करन दे विच्च है ओह धीरा
प्यार ते उसदा है डाहडा रहमत नाल है…….
1. साडे उत्ते वी रब्ब साडा, सदा नहीं झुंजलावे
ओड़क तीकर नहीं साडे उत्ते, अपणा क्रोध विखावे,
रहमत नाल है……
2. जेही साडी है बुरेआई, तेहा सलूक ना करदा
साडे पापां वांगर सानूं, बदला नहीं ओह देंदा
रहमत नाल है……
3. जिन्नां चड़दे तो है लहंदा, ओहनी दूर असाडे
पाप खुदा ने चुक के सारे, सुट्टे दूर दुराडे
रहमत नाल है……
भजन का मुख्य सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह गीत परमेश्वर यहोवा के उस स्वभाव को हमारे सामने रखता है जो न्याय से बढ़कर दया (रहमत) को प्राथमिकता देता है। गीत का केंद्रीय संदेश यह है कि हमारा परमेश्वर कोई क्रूर या तुरंत दंड देने वाला शासक नहीं है, बल्कि वह एक प्रेमी पिता की तरह अपने बच्चों की निर्बलताओं को समझता है। वह क्रोध करने में धीमा है और उसका प्रेम ‘डाहडा’ (अत्यंत गहरा और अटूट) है। यदि परमेश्वर हमारे पापों का हिसाब रखने लगे तो कोई भी मनुष्य उसके सामने टिक नहीं सकता, परंतु वह अपने अनुग्रह से हमें क्षमा करता है।
बाइबल के पवित्र वचनों के आधार पर इस गीत का विस्तृत स्पष्टीकरण निम्नलिखित है:
1. रहमत से भरा हुआ यहोवा और उसका धीरज (मुख्य भाग)
गीत की मुख्य पंक्तियां परमेश्वर के करुणामयी चरित्र की घोषणा करती हैं कि वह दया से भरपूर है और मनुष्य की गलतियों पर तुरंत क्रोधित नहीं होता।
- बाइबल का पवित्र वचन:“यहोवा दयालु और अनुग्रहकारी है, वह विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करुणामयी है।” (भजन संहिता 103:8)
- बाइबल का पवित्र वचन:“यहोवा दयालु और धर्मी है; हमारा परमेश्वर दया करने वाला है।” (भजन संहिता 116:5)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: ‘रहमत नाल है भरेया होया’ का अर्थ है कि दया परमेश्वर का स्वभाव है। जब मनुष्य पाप में गिरता है, तो परमेश्वर उसे तुरंत नष्ट नहीं करता, बल्कि उसे मन फिराव का समय देता है क्योंकि वह ‘क्रोध करने के विच्च धीरा’ (धीरजवान) है। उसका प्रेम संसार के किसी भी बंधन से कहीं अधिक मजबूत और गहरा है।
2. सदा का क्रोध न रखना और प्रभु का संयम (अंतरा 1)
यह भाग विश्वासी को यह तसल्ली देता है कि परमेश्वर अपने बच्चों से हमेशा के लिए रूठा नहीं रहता और न ही वह अपने क्रोध को अनंत काल तक खींचता है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, और न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।” (भजन संहिता 103:9)
- बाइबल का पवित्र वचन:“उसका क्रोध तो दो ही क्षण का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सवेरे आनन्द गूँज उठेगा।” (भजन संहिता 30:5)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: ‘ओड़क तीकर’ का अर्थ है अंत तक। जब हम भटक जाते हैं, तो पिता परमेश्वर हमें सुधारने के लिए अनुशासित जरूर करता है, लेकिन वह हमसे कभी भी सदा के लिए मुख नहीं मोड़ता। उसका झुंजलाना (क्रोध) अस्थाई होता है, क्योंकि उसकी मूल इच्छा अपने बच्चों को नष्ट करना नहीं, बल्कि उन्हें वापस अपने करीब लाना है।
3. पापों के अनुसार सलूक न करना (अंतरा 2)
यह अंतरा परमेश्वर के उस अद्भूत न्याय और दया को दर्शाता है जिसके तहत वह हमें हमारे बुरे कामों के अनुपात में दंड नहीं देता।
- बाइबल का पवित्र वचन:“उसने हमारे पापों के अनुसार हमसे व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हमको बदला दिया है।” (भजन संहिता 103:10)
- बाइबल का पवित्र वचन:“हे यहोवा, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु, कौन खड़ा रह सकेगा? परन्तु तुझ से पापों की क्षमा होती है, जिससे तेरा भय माना जाए।” (भजन संहिता 130:3-4)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: यदि परमेश्वर पूर्णतः हमारी बुराई (अधर्म) के अनुसार हमसे ‘सलूक’ करे, तो हम में से कोई भी जीवित रहने के योग्य नहीं है। यह केवल मसीह का अनुग्रह है कि वह हमारे पापों वांगर (पापों के समान) हमसे बदला नहीं लेता, बल्कि हमारे ऊपर अपने दया के द्वार खोल देता है।
4. पूर्व से पश्चिम की दूरी और पापों का मिटाया जाना (अंतरा 3)
गीत का यह सबसे सुंदर और सामर्थी भाग है, जो यह प्रतिज्ञा करता है कि जब परमेश्वर हमारे पापों को क्षमा करता है, तो वह उन्हें हमसे अनंत दूरी पर फेंक देता है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हमसे उतनी ही दूर कर दिया है।” (भजन संहिता 103:12)
- बाइबल का पवित्र वचन:“वह फिर हमसे दया करेगा; वह हमारे अधर्म के कामों को पैर तले रौंद डालेगा। तू उनके सब पापों को गहरे समुद्र में डाल देगा।” (मीका 7:19)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: ‘चड़दे तो है लहंदा’ का अर्थ है पूर्व दिशा से पश्चिम दिशा। बाइबल में उत्तर और दक्षिण की सीमाएं आपस में मिल सकती हैं, लेकिन पूर्व और पश्चिम कभी एक नहीं हो सकते। इसी प्रकार, जब खुदा हमारे पापों को ‘चुक के’ (उठाकर) दूर फेंक देता है, तो वह उन्हें फिर कभी याद नहीं करता और न ही उनका दोष हमारे ऊपर लगाता है। वह हमें मसीह यीशु में पूरी तरह निष्कलंक बना देता है।
निष्कर्ष: यह ज़बूर/गीत टूटे हुए हृदयों के लिए एक मलहम के समान है। यह हमें सिखाता है कि चाहे हमारे पाप कितने ही बड़े क्यों न हों, हमारे परमेश्वर की रहमत (दया) उससे कहीं अधिक बड़ी है। यह पोस्ट पढ़ने वाले हर एक विश्वासी को अपने पापों का बोझ लेकर निराश होने के बजाय, एक सच्चे पिता की तरह दयालु यहोवा के पास आने और उसकी अनंत क्षमा का अनुभव करने के लिए प्रेरित करती है।
