Yahowa Main Pukar Da Haan lyrics

Yahowa Main Pukar Da Haan lyrics
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Yahowa Main Pukar Da Haan lyrics in hindi

यहोवा मैं पुकारदा हां, मेरे वल तू छेती आ
यहोवा मैं पुकारदा हां मसीहा मैं पुकारदा हां
यहोवा मैं पुकारदा हां…

1. जदों पुकारां मैं तैनू खुदाया, सुनलै मेरी गल कन ला
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां…

2. मेरे होंठा दी कर रखवाली, मुंह उत्ते निगाहबान बिठा
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां…

3. मेरी दुआ हुण तेरे हजूर विच्च, पहुंचे वांग बखुर दे जा
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां…

4. जिवे कुर्बानी शम्मां दी होवे, हत्थ चुक तैत्थों मंगा दुआ
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां…

गीत का आत्मिक सारांश (Summary)

यह गीत मुख्य रूप से भजन संहिता 141 (Psalm 141) का पंजाबी से हिंदी रूपांतरण है। इस गीत का केंद्रीय विषय परमेश्वर की उपस्थिति के लिए व्याकुलता, आत्म-शुद्धि की इच्छा और एक स्वीकार्य प्रार्थना जीवन है। जब एक विश्वासी कहता है कि “मेरे वल्ल तू छेती आ” (मेरे पास तू जल्दी आ), तो यह उसके गहरे भरोसे और परमेश्वर पर पूरी तरह निर्भर होने को प्रकट करता है।

इस गीत के माध्यम से भक्त परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि संकट के समय न केवल उसकी बात सुनी जाए, बल्कि उसके चरित्र की भी रक्षा हो। वह अपने होंठों और जुबान पर पहरा बिठाने की मांग करता है ताकि उसके मुंह से कोई गलत शब्द न निकले। वह चाहता है कि उसकी प्रार्थनाएं परमेश्वर के निवास स्थान में सुगंधित धूप की तरह महकें और शाम की भेंट की तरह ग्रहण योग्य हों। यह गीत पूरी तरह से समर्पण, नम्रता और परमेश्वर के सामने हाथ फैलाने की आत्मिक स्थिति को दर्शाता है।


गीत से जुड़े बाइबल के मुख्य वचन और स्पष्टीकरण

यह पूरा गीत बाइबल के भजन संहिता 141 की शुरुआती आयतों का हूबहू रूप है। आइए इसके प्रत्येक भाग को वचनों के साथ समझते हैं:

1. संकट में परमेश्वर को पुकारना और शीघ्र सहायता की मांग

गीत का मुख्य भाग (स्थाई) कहता है: “यहोवा मैं पुकारदा हां, मेरे वल तू छेती आ… जदों पुकारां मैं तैनू खुदाया, सुनलै मेरी गल कन ला”।

भजन संहिता 141:1 “हे यहोवा, मैं ने तुझे पुकारा है; मेरे पास फुर्ती से आ! जब मैं तुझे पुकारूं, तब मेरी ओर कान लगा!”

भजन संहिता 102:2 “मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझ से न छिपा! अपना कान मेरी ओर झुका; जिस दिन मैं पुकारूं, उसी दिन फुर्ती से मेरी सुन!”

स्पष्टीकरण: दाऊद की तरह, जब एक विश्वासी चारों तरफ से परीक्षाओं या मुश्किलों से घिर जाता है, तो वह किसी मनुष्य की ओर नहीं बल्कि सीधे यहोवा की ओर देखता है। “कान लगाना” और “फुर्ती से आना” यह दर्शाता है कि भक्त को पूरा विश्वास है कि उसका परमेश्वर प्रार्थना सुनने वाला और संकट में अति सहज से मिलने वाला सच्चा मददगार है।


2. वाणी की शुद्धता और होठों पर रखवाली की प्रार्थना

गीत का दूसरा अंतरा कहता है: “मेरे होंठा दी कर रखवाली, मुंह उत्ते निगाहबान बिठा”। यह मसीही जीवन के लिए एक बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण प्रार्थना है।

भजन संहिता 141:3 “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठाल, मेरे होंठों के द्वार की रखवाली कर!”

भजन संहिता 39:1 “मैं ने कहा, ‘मैं अपनी चालचलन की चौकसी करूँगा, कि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे सामने रहेगा, तब तक मैं अपने मुंह में लगाम लगाए रहूँगा।'”

स्पष्टीकरण: हमारी आत्मिक आत्म-नियंत्रण की गवाही हमारे शब्दों से होती है। अक्सर विकट परिस्थितियों में इंसान अपने शब्दों से पाप कर बैठता है। इसलिए, यह वचन और गीत हमें सिखाते हैं कि हम परमेश्वर से मांगें कि वह हमारी जुबान पर ‘निगाहबान’ (पहरेदार) बिठाए, ताकि हमारे मुंह से कोई भी ऐसी बात न निकले जो परमेश्वर को नापसंद हो।


3. सुगंधित धूप (बखुर) की तरह प्रार्थना का पहुँचना

गीत की पंक्ति “मेरी दुआ हुण तेरे हजूर विच्च, पहुंचे वांग बखुर दे जा” सीधे तौर पर पवित्रस्थान की आराधना की ओर इशारा करती है। ‘बखुर’ का अर्थ सुगंधित धूप या लोबान होता है।

भजन संहिता 141:2 (अंश-क) “मेरी प्रार्थना तेरे साम्प्रत सुगन्धित धूप ठहरे…”

प्रकाशितवाक्य 8:4 “और उस धूप का धुआँ पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ दूत के हाथ से परमेश्वर के साम्प्रत पहुँच गया।”

स्पष्टीकरण: पुराने नियम के अनुसार, मिलापवाले तम्बू और मंदिर में पवित्र वेदी पर प्रतिदिन सुबह-शाम सुगंधित धूप (बखुर) जलाई जाती थी, जिसकी खुशबू ऊपर उठती थी। नए नियम के अनुसार, एक विश्वासी की शुद्ध और सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना ही वह सुगंधित धूप है जो सीधे परमेश्वर के सिंहासन तक पहुँचती है और उन्हें आनंदित करती है।


4. संध्याकालीन बलिदान और हाथ उठाकर प्रार्थना करना

गीत का अंतिम भाग कहता है: “जिवे कुर्बानी शम्मां दी होवे, हत्थ चुक तैत्थों मंगा दुआ”। यहाँ ‘शम्मां दी कुर्बानी’ का अर्थ शाम के समय चढ़ाई जाने वाली बलि (Evening Sacrifice) से है।

भजन संहिता 141:2 (अंश-ख) “और मेरा हाथ उठाना संध्याकाल का अन्नबलि ठहरे।”

1 तीमुथियुस 2:8 “इसलिए मैं चाहता हूँ कि हर जगह पुरुष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठाकर प्रार्थना किया करें।”

स्पष्टीकरण: पुराने नियम के समय में शाम को परमेश्वर के लिए एक विशेष होम-बलि चढ़ाई जाती थी जो आत्म-समर्पण का प्रतीक थी। आज, जब हम प्रार्थना में अपने हाथ उठाते हैं (“हत्थ चुक”), तो वह केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं होती, बल्कि वह परमेश्वर के सामने पूरी तरह से आत्म-समर्पण करने और अपनी निर्बलता को स्वीकार करते हुए उनकी सामर्थ्य को मांगने का आत्मिक प्रतीक है।


निष्कर्ष: यह सुंदर गीत पूरी तरह से पवित्रशास्त्र की आत्मा में डूबा हुआ है। जब इस गीत को गाया या मनन किया जाता है, तो यह हर मसीही को राजा दाऊद की उसी विनीत और शुद्ध आत्मिक दशा में ले जाता है, जहाँ एक मनुष्य अपने सृजनकर्ता के सामने पूरी तरह से टूटकर और पवित्र होकर अपनी पुकार रखता है।

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