यहोवा दा धनवाद करो Lyrics song
यहोवा दा धंनवाद करो, ओहदी दया सदा दी है
येशु उत्ते विश्वास करो, ओहदी दया सदा दी है
यहोवा दा धंनवाद………
1. ओहदी दया दे नाल, रोगी चंगे हुन्दे ने
ओहदी दया दे नाल, मिलदी नजात ए
रहम-ओ करम जदों, हो जाए मसीहा दा
दिन नालो चिट्टी होजे, गमां वाली रात ए
ऐवे ना दिल नू उदास करो, ओहदी दया सदा दी है
येशु ते विश्वास करो…….
2. दिल विच्च रख के वचन खुदा दा, जीऊंदे यहोवा दी खोज करो
घुटने टिका के हत्थ उठा के, रूहे खुदा से रोज भरो
खुदा लई खुद नू खास करो, ओहदी दया सदा दी है
येशु ते विश्वास करों…..
3. एकलौते बेटे नू जिसने दित्ता है,
सोचो ओ किन्ना भला खुदा है
युगनायुग है उसदी भलयाई, वादा ओहदा साडे नाल सदा है
उसदे कम्मा दा एहसास करो, ओहदी दया सदा दी है
येशु ते विश्वास करों.
“आराधना करें ज़िन्दा खुदा की” – आत्मिक सारांश और बाइबल वचन
यह गीत एक आराधक के दिल की गहरी पुकार है, जो हमें इस बात का अहसास कराता है कि हमारी हर सांस, हमारी खुशी और हमारा पूरा अस्तित्व केवल हमारे जीवित परमेश्वर यीशु मसीह पर निर्भर है। इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि यीशु के बिना मानव जीवन अधूरा और खोखला है। यह गीत प्रभु यीशु की भलाई, उनकी सुरक्षा, चंगाई, पापों की क्षमा और उनकी पवित्र आत्मा की उपस्थिति को बहुत ही सुंदर रीति से प्रकट करता है।
नीचे इस गीत के अंतरा-वार भावार्थ और उससे जुड़े पवित्र बाइबल के वचनों का स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. मुख्य भाग (स्थायी): ज़िन्दा खुदा की आराधना और जीवन का आधार
गीत की शुरुआत ही इस सत्य को घोषित करती है कि जिसके बिना न तो कोई सच्ची जिंदगी है और न ही कोई सच्ची खुशी, वही हमारा जीवित परमेश्वर है। बाइबल हमें सिखाती है कि सच्चा आनंद और अनंत जीवन केवल मसीह में ही मिल सकता है।
- भजन संहिता 16:11 – “तू मुझे जीवन का मार्ग दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।”
- यूहन्ना 14:6 – “यीशु ने उससे कहा, ‘मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।'”
2. पहला अंतरा: बोझ उठाने वाला और हमारी पनाह
इस भाग में विश्वास योग्य यीशु मसीह की भलाई का वर्णन है। जब हम दुखों और चिंताओं के बोझ से दब जाते हैं, तब यीशु हमारे सारे बोझ को इस तरह उठा लेता है मानो वह बोझ उसका खुद का हो। वह विपत्ति के समय हमारी सबसे सुरक्षित पनाहगाह (गढ़) बनता है।
- मत्ती 11:28 – “हे सब परिश्रम करने वाले और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।”
- 1 पतरस 5:7 – “अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है।”
- भजन संहिता 46:1 – “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।”
3. दूसरा अंतरा: चंगाई, सुरक्षा और अभिषेक (मसाह)
यह अंतरा परमेश्वर की सर्वव्यापी दृष्टि और उसकी चंगाई सामर्थ्य (शिफ़ा) को दर्शाता है। परमेश्वर की निगाहें हमेशा अपने बच्चों पर बनी रहती हैं। वह न केवल हमारे आत्मिक और शारीरिक घावों को चंगा करता है, बल्कि अपने पवित्र अभिषेक (मसाह) से हमारे जीवन के रास्तों को आसान बनाता है और हमें सही राह पर चलना सिखाता है।
- भजन संहिता 32:8 – “मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उसमें तेरी अगवाई करूँगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा और सम्मति दिया करूँगा।”
- यशायाह 53:5 – “परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।”
- भजन संहिता 23:3 – “वह मेरे प्राण में जी ले आता है; धार्मिकता के मार्गों में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगवाई करता है।”
4. तीसरा अंतरा: प्रार्थनाओं का उत्तर, पापों की क्षमा और पवित्र आत्मा का दान
यह भाग मसीही जीवन के सबसे महान सत्य को उजागर करता है—प्रार्थना का सुना जाना और पापों की क्षमा। हमारा खुदा हमारी हर पुकार सुनता है, हमारी खताओं (गलतियों) को माफ करता है और हमें नया जीवन देने के लिए अपनी पवित्र आत्मा (रूह-ए-पाक) को हमारे भीतर उंडेलता है। वह कभी न छोड़ने वाला परमेश्वर है जो हर पल हमारे संग रहता है।
- 1 यूहन्ना 1:9 – “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।”
- यहेजकेल 36:27 – “और मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर देकर ऐसा करूँगा कि तुम मेरी विधियों पर चलोगे और मेरे नियमों को मानकर उनके अनुसार करोगे।”
- मत्ती 28:20 – “और देखो, मैं जगत के अन्त तक सर्वदा तुम्हारे संग हूँ।”
- भजन संहिता 34:17 – “धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको उनके सब संकटों से छुड़ाता है।”
