Vo Kahta Gaya Sab Banta Gaya Lyrics

Vo Kahta Gaya Sab Banta Gaya Lyrics
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वो कहता गया सब बनता गया Lyrics song

Vo Kahta Gaya Sab Banta Gaya Lyrics

बेडोल सी भूमि सुनसान पड़ी थी
गहरे जल पर रूह मंडला रही थी
वचन यहोवा का एक एक फलता गया
वो कहता गया सब बनता गया
उसके सांचे में सब ढलता गया
वो कहता गया सब बनता गया…….

1. सब से पहले दिन रात बनाया दसरे दिन आकाश बनाया
सूखी भूमि पर दिन तीसरे पेड़ पौधे जनता गया
वो कहता गया सब बनता गया…….

2. चांद सितारे चौथे दिन में बने थे
मंडल गृह तारे आसमां में टिके थे
पांचवे दिन सब पक्षी पशुओं को रचता गया
वो कहता गया सब बनता गया……..

3. छठवें दिन आदम को बनाया
अपनी सांसों से उसको जिलाया
अच्छा है ये सब कह कर दिन सातवां सबत का बना
वो कहता गया सब बनता गया……..

गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल आधारित स्पष्टीकरण

1. रचना से पहले की स्थिति और वचन की सामर्थ्य

गीत की शुरुआत बाइबल की शुरुआती आयतों से होती है, जहाँ सृष्टि रचना से पहले भूमि बेडौल, सुनसान और अंधकार से भरी थी, और परमेश्वर की आत्मा (रूह) जल के ऊपर मंडला रही थी। परमेश्वर ने किसी औजार से नहीं, बल्कि केवल अपने ‘वचन’ (बोलने) से पूरी कायनात को अस्तित्व में लाया।

  • उत्पत्ति 1:1-2 – “आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: और परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।”
  • भजन संहिता 33:9 – “क्योंकि उसने कहा और हो गया; उसने आज्ञा दी और वह स्थिर हुआ।”
  • इब्रानियों 11:3 – “विश्वास ही से हम जानते हैं कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है; यह नहीं कि जो कुछ दिखाई देता है, वह देखी हुई वस्तुओं से बना हो।”

2. पहला, दूसरा और तीसरा दिन (प्रकाश, आकाश और वनस्पति)

गीत के पहले अंतरे में सृष्टि के शुरुआती तीन दिनों का वर्णन है। पहले दिन परमेश्वर ने उजाले और अंधेरे को अलग कर दिन-रात बनाया। दूसरे दिन जल के बीच आकाश (अंतरिक्ष) की रचना की। तीसरे दिन जल को एक जगह इकट्ठा कर सूखी भूमि को प्रगट किया और उस पर हर प्रकार के पेड़-पौधों को उगाया।

  • उत्पत्ति 1:3-5 (पहला दिन) – “तब परमेश्वर ने कहा, ‘उजियाला हो’: और उजियाला हो गया… और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ; इस प्रकार पहला दिन हो गया।”
  • उत्पत्ति 1:6-8 (दूसरा दिन) – “फिर परमेश्वर ने कहा, ‘जलों के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए’… और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ; इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।”
  • उत्पत्ति 1:11 (तीसरा दिन) – “फिर परमेश्वर ने कहा, ‘पृथ्वी से हरी घास, और बीजवाले छोटे-छोटे पौधे, और फलदायक वृक्ष भी अपनी-अपनी जाति के अनुसार पृथ्वी पर उगें जिनमें उन्हीं के बीज हों’: और वैसा ही हो गया।”

3. चौथा और पांचवां दिन (ज्योतिियां और जीव-जंतु)

दूसरे अंतरे के अनुसार, चौथे दिन परमेश्वर ने आकाश में सूर्य, चांद और तारों को बनाया ताकि वे समय, ऋतुओं और दिनों के चिन्ह ठहरें। पांचवें दिन परमेश्वर ने जल के जीवों और आकाश में उड़ने वाले पक्षियों की रचना की। (नोट: गीत में पांचवें दिन पशु-पक्षियों का उल्लेख है, जबकि बाइबल के अनुसार जंगली और घरेलू भूमि के पशु छठवें दिन बनाए गए, और जल-आकाश के जीव पांचवें दिन)।

  • उत्पत्ति 1:16 (चौथा दिन) – “तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उनमें से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया।”
  • उत्पत्ति 1:20-21 (पांचवां दिन) – “फिर परमेश्वर ने कहा, ‘जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें।’ इसलिये परमेश्वर ने बड़े-बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब चलने वाले प्राणियों की भी सृष्टि की जो जल में बहुत भर गए थे… और सब प्रकार के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।”

4. छठवां दिन: मनुष्य की रचना (परमेश्वर का स्वरूप)

छठवें दिन परमेश्वर ने अपनी सबसे श्रेष्ठ रचना—मनुष्य (आदम) को अपने स्वरूप और समानता में बनाया। उसने मिट्टी से मनुष्य को गढ़ा और उसके नथनों में अपने जीवन का श्वास फूंका, जिससे मनुष्य एक जीवित प्राणी बन गया।

  • उत्पत्ति 1:27 – “तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने उनकी सृष्टि की।”
  • उत्पत्ति 2:7 – “और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा, और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवित प्राणी बन गया।”

5. सातवां दिन: सबत का विश्राम (Sabbath)

जब परमेश्वर ने अपनी पूरी सृष्टि को देखा, तो वह “बहुत ही अच्छा” था। सातवें दिन परमेश्वर ने अपने काम को पूरा कर विश्राम किया और उस दिन को पवित्र ठहराया, जिसे सबत का दिन कहा जाता है।

  • उत्पत्ति 1:31 – “तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ; इस प्रकार छठवां दिन हो गया।”
  • उत्पत्ति 2:2-3 – “और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया; और उसने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया। और परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्र ठहराया; क्योंकि उसमें उसने अपनी सृष्टि की रचना के सारे काम से विश्राम किया।”

निष्कर्ष

यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारा परमेश्वर कोई निर्जीव कल्पना नहीं, बल्कि एक जीवित रचनाकार है। जिसके मात्र एक शब्द बोल देने से शून्य में से आकाशगंगाएं, पृथ्वी, नदियां और जीवन का निर्माण हो गया। जब हम इस गीत को गाते हैं, तो हमारा विश्वास मजबूत होता है कि जो परमेश्वर केवल कहकर पूरी सृष्टि को उसके सांचे में ढाल सकता है, वह हमारे बिखरे हुए और बेडौल जीवन को भी अपने वचनों के द्वारा फिर से सुंदर और फलवंत बना सकता है।

परमेश्वर इस अद्भुत सृष्टि के खोजी और इन पवित्र वचनों के द्वारा आपको आत्मिक आशीष दे। आमीन!

Vo Kahta Gaya Sab Banta Gaya Lyrics in hindi

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