तेरी स्तुति में करूँ Lyrics song
तेरी स्तुति में करूँ
आराधना करूँ, दिल से दिल से
से दिल से
1. मेरी सांसों तेरा नाम रहे
मेरी सांसों तेरा नाम रहे
हे प्रभु तू ही तू
तेरी स्तुति में करूँ
आराधना करूँ, दिल से दिल से
से दिल से
2. जहाँ मेरी नजर जाए
वहाँ तेरी स्तुति हो
जहाँ मेरी नजर जाए
वहाँ तेरी स्तुति हो
सारी दुनिया का रखवाला तू
सारी दुनिया का रखवाला तू
ये यीशु तू ही तू प्रभु
3. खुशी और ग़म में साथ हो तेरा
प्रारंभ और अंत में नाम हो तेरा
खुशी और ग़म में साथ हो तेरा
प्रारंभ और अंत में नाम हो तेरा
मेरे जीवन का सहारा तू
मेरे जीवन का सहारा तू
हे प्रभु तू ही तू प्रभु
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह मसीही गीत एक विश्वासी के हृदय की उस गहरी इच्छा को प्रकट करता है, जहाँ वह अपने पूरे अस्तित्व, अपनी हर एक साँस और अपने जीवन की हर परिस्थिति को प्रभु यीशु मसीह के चरणों में समर्पित कर देता है। यह गीत केवल शब्दों की स्तुति नहीं, बल्कि ‘दिल से’ की जाने वाली सच्ची आराधना और परमेश्वर की संप्रभुता को स्वीकार करने की गवाही है।
नीचे इस गीत के अंतरा-वार भाव और उससे जुड़े बाइबल के प्रामाणिक वचनों का पूरा विवरण दिया गया है:
1. पूर्ण समर्पण और निरंतर स्तुति (स्थायी भाव और पहला अंतरा)
गीत का मुख्य संदेश यह है कि हमारी आराधना केवल बाहरी दिखावा न हो, बल्कि हृदय की गहराई (दिल से) से निकली हो। जब मनुष्य अपनी हर एक साँस में केवल प्रभु के नाम को बसा लेता है, तब उसका पूरा जीवन एक जीवित वेदी बन जाता है।
- भजन संहिता 103:1 — “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!”
- स्पष्टीकरण: यह वचन गीत की इस भावना को प्रमाणित करता है कि हमारी स्तुति ऊपरी नहीं, बल्कि हमारे भीतर के पूरे अस्तित्व और ‘दिल से’ होनी चाहिए।
- भजन संहिता 146:2 — “मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूँगा; जब तक मैं बना रहूँगा, तब तक अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूँगा।”
- स्पष्टीकरण: गीत की पंक्ति ‘मेरी सांसों में तेरा नाम रहे’ इसी सत्य को दर्शाती है कि जब तक हमारे भीतर जीवन की साँसें बाकी हैं, तब तक हमारा एकमात्र उद्देश्य प्रभु यीशु की स्तुति करना है।
2. परमेश्वर की व्यापकता और सृष्टि का रखवाला (दूसरा अंतरा)
दूसरा अंतरा हमें याद दिलाता है कि हमारी नज़रें जहाँ कहीं भी जाएँ, हमें परमेश्वर की महिमा और उसकी रचना दिखाई देनी चाहिए। वह किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ‘सारी दुनिया का रखवाला’ है, जो पूरी सृष्टि का संचालन अपनी सामर्थ्य से करता है।
- भजन संहिता 121:5-6 — “यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरे दाहिने हाथ की ओर तेरी छाया है। न तो धूप से तेरी कुछ हानि होगी, और न चाँदनी से रात को।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन स्पष्ट करता है कि प्रभु यीशु ही हमारा और ‘सारी दुनिया का रखवाला’ है, जो रात-दिन अपने बच्चों की सुरक्षा करता है और किसी भी विपत्ति को उन पर हावी नहीं होने देता।
- भजन संहिता 19:1 — “आकाश परमेश्वर की महिमा का वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।”
- स्पष्टीकरण: गीत की पंक्ति ‘जहाँ मेरी नजर जाए, वहाँ तेरी स्तुति हो’ इस सत्य को उजागर करती है कि पूरी प्रकृति और ब्रह्मांड परमेश्वर की गवाही देते हैं, और उसे देखकर हमारा हृदय उसकी स्तुति से भर जाता है।
3. सुख-दुख में सहभागिता और आदि-अंत परमेश्वर (तीसरा अंतरा)
तीसरा अंतरा मसीही जीवन के एक बहुत बड़े सच को सामने रखता है। विश्वासी का भरोसा केवल सुख के दिनों में ही नहीं, बल्कि ग़म और परीक्षाओं की घड़ियों में भी प्रभु पर बना रहता है। यीशु मसीह हमारे जीवन का आदि और अंत है, और वही हमारे जीवन का एकमात्र सच्चा ‘सहारा’ है।
- प्रकाशितवाक्य 22:13 — “मैं अलफा और ओमेगा, पहला और पिछला, आदि और अन्त हूँ।”
- स्पष्टीकरण: गीत की यह सुंदर पंक्ति ‘प्रारंभ और अंत में नाम हो तेरा’ सीधे तौर पर प्रभु यीशु के इस स्वर्गीय रहस्य को प्रकट करती है कि हमारा जीवन जिस खुदा से शुरू होता है, उसी पर जाकर समाप्त होता है।
- भजन संहिता 46:1 — “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।”
- स्पष्टीकरण: जब गीत कहता है कि ‘खुशी और ग़म में साथ हो तेरा’, तो यह वचन हमें तसल्ली देता है कि चाहे जीवन में कैसा भी दुःख या ग़म क्यों न आए, वह संकट में तुरंत मिलने वाला हमारा एकमात्र ‘सहारा’ है।
- फिलिप्पियों 4:12-13 — “मैं दीन होना भी जानता हूँ और बढ़ना भी जानता हूँ; हर एक बात और सब दशाओं में मैंने तृप्त होना और भूखा रहना, और बढ़ना और घटता सीखा है। जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन सिखाता है कि हर परिस्थिति में, चाहे खुशी हो या ग़म, मसीह का साथ ही हमें स्थिर रखता है।
निष्कर्ष (Conclusion):
यह आराधना गीत इस बात का सुंदर निचोड़ है कि एक मसीह विश्वासी का जीवन पूरी तरह से प्रभु यीशु पर निर्भर है। यह गीत और इससे जुड़े बाइबल के पवित्र वचन हमें यह सिखाते हैं कि प्रभु यीशु हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक, हमारी हर साँस में, हमारी दृष्टि के हर दायरे में और हमारे हर सुख-दुख में हमारे संग रहने वाला जीवित और सामर्थ्यी रखवाला है।


