Main Sunn Saku Teri Baaton ko Lyrics

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मैं सुन सकूं तेरी बातों को | Lyrics song

मैं सून सकू तेरी बातों को 
रूहानी कानों को खोल दे खुदा 
पापो पे दे दे फ़तेह मुझको तू 
अंधेरे को मुझसे करदे जुदा 
ए खुदा – ए खुदा 
अपने कामो के लिए कर मसाह 
मैं सून सकू……..

1. तुझसा ही हूं – ब – हूं ऐ येशु मैं बनना चाहता हूं
तेरे मैं कामों को ए खुदा, करना चाहता हूं 
तेरे नबियो और रसूलो की मनिद ऐ येशु
तेरे रूह पाक के फलों से भरना चाहता हूं 
बुद्धि को मेरी तू छू के खुदाया 
सोचो को मेरी तू करदे नया 
येशु आ…….

2. जीवन का सोता तू मुझको जीवन देता है 
पानी के झरनो के जैसे मुझसे बहता है 
सासों को जैसे मुझे तेरी जरूरत है येशु 
होना ना तू जुदा कभी मुझसे ये दिल कहता है 
करदे खतम मुझसे मेरे ईरादे 
जैसा तू चाहें तू मुझको बना
येशु आ……..

3. तूने ही मुझको हाथो से बनाया है येशु 
जीवन की सासों को मुझमे समाया है येशु
तुझको जब जाना तो यह जाना यह जीवन मेरा 
बिन तेरे ढलता हुआ एक साया है येशु 
आँखो से मेरे सब परदे हटाकर 
अपनी दया को तू मुझको दिखा 
येशु आ……….

गीत का सारांश (Summary)

इस गीत का मुख्य विषय परमेश्वर की उपस्थिति और उनकी आज्ञाकारिता है। गीत की शुरुआत एक समर्पण से होती है, जहाँ विश्वासी प्रार्थना करता है कि उसके ‘रूहानी कान’ (आत्मिक कान) खुल जाएँ ताकि वह दुनिया के शोर में परमेश्वर की धीमी और मधुर आवाज़ को सुन सके। यह हमें सिखाता है कि मसीही जीवन केवल बाहरी नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि परमेश्वर के साथ एक जीवंत संबंध रखना है।

गीत में पापों से आज़ादी और अंधेरे से अलगाव की मांग की गई है। यह एक मसीही के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—पवित्रिकरण। जब हम मसीह के पीछे चलते हैं, तो हम पुराने जीवन और पापों को छोड़कर ज्योति के पुत्र बनना चाहते हैं।

गीत का एक और महत्वपूर्ण भाग ‘मसाह’ (Anointing) की मांग है। परमेश्वर के कामों को करने के लिए हमें मानवीय शक्ति की नहीं, बल्कि स्वर्गीय शक्ति की आवश्यकता होती है। मसीह के समान बनने की इच्छा (हूबाहू यीशु जैसा बनना) और पवित्र आत्मा के फलों से भरने की तड़प इस गीत को बहुत प्रभावशाली बनाती है। अंत में, यह जीवन के सोता यानी यीशु मसीह पर निर्भरता को दर्शाता है, जिनके बिना हमारा अस्तित्व अधूरा है।


गीत से जुड़े बाइबल वचन (Bible Verses)

इस गीत की हर पंक्ति बाइबल की गहरी सच्चाइयों पर आधारित है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण वचन दिए गए हैं:

1. आत्मिक कान खोलने के विषय में:

“जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।” (प्रकाशितवाक्य 2:7)
यह वचन स्पष्ट करता है कि परमेश्वर हमसे बात करना चाहते हैं, लेकिन हमें आत्मिक रूप से संवेदनशील होने की आवश्यकता है।

2. पापों पर जय और अंधकार से दूरी:

“अन्धकार के निष्फल कामों में सहभागी न हो, वरन उन पर उलाहना दिया करो।” (इफिसियों 5:11)
गीत की प्रार्थना कि “अंधेरे को मुझसे कर दे जुदा”, इस वचन को दर्शाती है कि हमें पाप के अंधेरे से दूर रहना है।

3. मसीह के स्वरूप में बदलना:

“परन्तु हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जैसा दर्पण में; और प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश-अंश करके बदलते जाते हैं।” (2 कुरिन्थियों 3:18)
गीत की लाइन “तुझसा ही हूबाहू ऐ यीशु, मैं बनना चाहता हूं”, इसी आत्मिक बदलाव की ओर इशारा करती है।

4. परमेश्वर के कामों के लिए सामर्थ्य (मसाह):

“प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उसने मेरा अभिषेक (मसाह) किया है कि कंगालों को सुसमाचार सुनाऊं…” (लूका 4:18)
बिना अभिषेक के हम परमेश्वर की सेवा नहीं कर सकते। यह गीत हमें बार-बार इस सामर्थ्य को मांगने के लिए प्रेरित करता है।

5. जीवन का सोता:

“परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर कभी प्यासा न होगा; वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।” (यूहन्ना 4:14)
यीशु ही वह जीवन का सोता हैं जो हमारी आत्मिक प्यास बुझाते हैं।

6. पवित्र आत्मा के फल:

“परन्तु आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, दया, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं…” (गलातियों 5:22-23)
गीत में “तेरे रूह पाक के फलों से भरना चाहता हूं” की प्रार्थना हमें इन गुणों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।


यह गीत हर विश्वासी के लिए एक आत्मिक दर्पण है, जो हमें याद दिलाता है कि हमारा लक्ष्य मसीह में बढ़ना और उनकी मर्जी को पूरा करना है।

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