खूबी नहीं मुझमे कोई | Ankur Narula Ministry | Lyris in hindi
खूबी नहीं मुझमें कोई
तेरे फज़ल से आया हूं
टूटा सा मन रुह और बदन
परस्तिश को करने लाया हूं
हाल्लेलुईयाह हो सना
1. ऐ तख़्त-नशों (तख्त पर विराजमान)
ऐ मेरे मसीह
करता हूं तेरी तमजीदों ताजीम ….. 4
(परमेश्वर मैं तेरी स्तुति करता हूं)
मसकीनों (दोनों) का आका है तू
शुकराना दिल से लाया हूं ….. 4
2. तू कमाल है बेमिसाल है
औढ़े हुए कैसा जलाल है ….. 2
रुह की कलम से लिखें हुए
लबों पे तराने लाया हूं ….. 2
3. यहोवा यरी बन मुहईयां करें तू
घटियों को मेरी पुरा करे तू ….. 4
(प्रकाश का बादशाह)
शाह-ए-नूरानी मेरे मसीह
सजदे में सर को झुकाया हूं ….. 4


