Kaun Hai Kaun Hai Lyrics

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कौन है कौन है | Lyrics song

कौन है कौन है
राजाओं का राजा ?
कौन है कौन है
दुनियां का बादशाह ……. 2
यीशु है उसका नाम ……. 2
तो करो जय जयकार ……. 4

1) पानी पे चलता है
भीड़ को खिलाता है ……. 2
शैतान भी डरता है
यीशु के नाम से ……. 2

2) क्रूस को उठाया है
मौत को हराया है …….. 2
अनुग्रह से उसके
हमने उद्धार पाया है …….. 2

गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)

यह गीत प्रभु यीशु मसीह की सर्वोच्चता, उनके सामर्थ्य, उनके चमत्कारों और मानव जाति के लिए उनके द्वारा किए गए बलिदान की एक सुंदर घोषणा है। गीत की शुरुआत दो महत्वपूर्ण प्रश्नों से होती है जो यीशु की पहचान को स्थापित करते हैं—वे ‘राजाओं के राजा’ और ‘दुनिया के बादशाह’ हैं। यह केवल एक उपाधि नहीं है, बल्कि उनकी सार्वभौमिक संप्रभुता को दर्शाती है। गीत हमें उनकी जय-जयकार करने और उनकी आराधना करने के लिए प्रेरित करता है।

इस गीत के दो मुख्य भाग (अंतरे) हैं, जो यीशु के सेवकाई काल और उनके क्रूस के कार्य को दर्शाते हैं:

  • पहला भाग (सामर्थ्य और चमत्कार): यह भाग यीशु के ईश्वरीय अधिकार को प्रकट करता है। वे प्रकृति के नियमों से ऊपर हैं (पानी पर चलना), वे मनुष्यों की भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं (भीड़ को खिलाना), और उनके नाम में इतनी शक्ति है कि अंधकार की शक्तियां और शैतान भी उनके सामने टिक नहीं सकते।
  • दूसरा भाग (क्रूस, मृत्यु पर विजय और उद्धार): यह मसीही विश्वास का केंद्र बिंदु है। यीशु ने स्वेच्छा से क्रूस का दुःख उठाया और तीसरे दिन जी उठकर मौत को हमेशा के लिए हरा दिया। मनुष्य अपने कर्मों से नहीं, बल्कि केवल यीशु के अनुग्रह (Grace) के कारण पापों से क्षमा और अनंत जीवन (उद्धार) पाता है।

गीत से जुड़े बाइबल के मुख्य वचन और स्पष्टीकरण (Bible Verses & Explanation)

इस गीत के हर एक शब्द का आधार पवित्र शास्त्र बाइबल में मिलता है। यहाँ उन वचनों को उनके पूर्ण संदर्भ के साथ स्पष्ट किया गया है:

1. राजाओं का राजा और दुनिया का बादशाह

यीशु मसीह की सर्वोच्च सत्ता और राजाओं के ऊपर उनके अधिकार को प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में स्पष्ट रूप से लिखा गया है।

प्रकाशितवाक्य 19:16 “और उसके वस्त्र और जांघ पर यह नाम लिखा है, ‘राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।’“

स्पष्टीकरण: यह वचन प्रमाणित करता है कि यीशु इस संसार के किसी भी सांसारिक शासक से ऊंचे हैं। वे पूरी सृष्टि के एकमात्र न्यायधर्मी बादशाह हैं, इसलिए गीत कहता है कि हमें उनकी जय-जयकार करनी चाहिए।

2. पानी पर चलना (प्रकृति पर अधिकार)

यीशु का पानी पर चलना उनके परमेश्वर होने का और प्रकृति पर उनके नियंत्रण का सबसे बड़ा प्रमाण था।

मत्ती 14:25-27 “और वह रात के चौथे पहर झील पर चलते हुए उनके पास आया। चेले उसे झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए और बोले, ‘यह कोई भूत है!’ और डर के मारे चिल्लाने लगे। परन्तु यीशु ने तुरंत उनसे बातें की और कहा, ‘ढाढ़स बांधो, मैं हूँ; डरो मत।’“

स्पष्टीकरण: जब चेले तूफान में फंसे थे, तब यीशु पानी पर चलकर उनके पास आए। यह दर्शाता है कि हमारे जीवन के तूफानों और विपरीत परिस्थितियों पर भी यीशु का पूरा नियंत्रण है।

3. भीड़ को खिलाना (अद्भुत प्रावधान)

यीशु केवल आत्मिक नहीं, बल्कि हमारी शारीरिक ज़रूरतों को भी पूरा करने वाले परमेश्वर हैं। उन्होंने पांच रोटी और दो मछलियों से पांच हज़ार से अधिक लोगों को तृप्त किया था।

मत्ती 14:19-20 “तब उसने भीड़ को घास पर बैठने की आज्ञा दी, और उन पांच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने भीड़ को दीं। और सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकरियां उठाईं।”

स्पष्टीकरण: यह चमत्कार दिखाता है कि यीशु यहोवा-यिरे (प्रबंध करने वाला परमेश्वर) हैं। कमी के समय में भी वे बहुतायत से आशीष देने की सामर्थ्य रखते हैं।

4. शैतान पर यीशु के नाम का अधिकार

यीशु के नाम में दुष्टात्माओं और अंधकार की शक्तियों को भगाने की सामर्थ्य है। उनके नाम के सामने दुष्टात्माएं कांपती हैं।

लूका 10:17 “वे सत्तर आनन्द करते हुए लौटे और कहने लगे, ‘हे प्रभु, तेरे नाम से दुष्टात्माएं भी हमारे वश में हैं।’“

याकूब 2:19 “तुझे विश्वास है कि एक ही परमेश्वर है; तू अच्छा करता है; दुष्टात्माएं भी विश्वास रखती हैं, और थरथराती हैं।”

स्पष्टीकरण: जब मसीही विश्वासी यीशु के नाम का इस्तेमाल करते हैं, तो शैतान को पीछे हटना पड़ता है क्योंकि यीशु ने क्रूस पर शैतान के सिर को कुचल दिया है।

5. क्रूस उठाना और मृत्यु पर विजय

यीशु ने हमारे पापों का बोझ उठाने के लिए क्रूस उठाया और मृत्यु को हराकर तीसरे दिन जी उठे।

फिलिप्पियों 2:8 “और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि क्रूस की मृत्यु भी सह ली।“

1 कुरिन्थियों 15:55-57 “‘हे मृत्यु तेरी जय कहाँ रही? हे मृत्यु तेरा डंक कहाँ रहा?’ मृत्यु का डंक पाप है, और पाप का बल व्यवस्था है। परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है।”

स्पष्टीकरण: यीूस की मृत्यु और पुनरुत्थान मसीही मसीहियत की नींव है। उन्होंने मृत्यु के डर को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।

6. अनुग्रह से उद्धार

हम अपने किसी अच्छे काम से स्वर्ग का राज्य या मुक्ति नहीं पा सकते, यह केवल यीशु के मुफ्त दान (अनुग्रह) के द्वारा संभव है।

इफिसियों 2:8-9 “क्योंकि अनुग्रह ही से विश्वास के द्वारा तुम्हारा उद्धार हुआ है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है; और न कर्मों के कारण, ताकि कोई घमण्ड न कर सके।”

स्पष्टीकरण: गीत की यह अंतिम पंक्ति बाइबल के सबसे गहरे सत्य को बयां करती है। हमारा उद्धार प्रभु यीशु मसीह के लहू और उनके अनुग्रह की वजह से हुआ है, जो हमें मुफ्त में मिला है।

यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारा राजा जीवित है, सामर्थी है, और आज भी हमारे जीवन में चमत्कार करने की ताकत रखता है।

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