दे भरपूरी आत्मा दी Lyrics song
हे येशु महान, तू है मेहरबान दे भरपूरी आत्मा दी
मैं होवागा जवान हे येशु महान….
1. रुह शरीर जान नू,
मैं लैके आया हां भरदे पाक आत्मा नाल,
मेरी सुणके तू दुआ -2 पाक कर लिबास मेरा,
अपने तू समान-2,
दे भरपूरी आत्मा दी…
2. दे मिलाप मैंनू, तू सेवका दा,
मेरी सुणले तू दुआ होवा कामिल सेवका तो,
तेरा सुणके मैं कलाम -2
आ गया शरीर लैके, जीऊंदा बलिदान-2,
दे भरपूरी आत्मा दी….
3. आखिरी दिहाड़े जद आप आवेगा,
जद आप आवेगा मैंनू वी संता दे नाल,
लैके जावेगा -2 ताके मैं सिव्योन विच्च,
गावागां सना-2,
दे भरपूरी आत्मा दी…
1. पूर्ण समर्पण और पवित्र आत्मा की भरपूर मांग
गीत का मुख्य भाग और पहला अंतरा पूरी तरह से खुद को परमेश्वर के हाथों में सौंपने और पवित्र आत्मा से भरने की प्रार्थना है। जब एक विश्वासी प्रभु के सम्मुख आता है, तो वह केवल ऊपरी तौर पर नहीं, बल्कि अपनी पूरी सत्ता (आत्मा, प्राण और शरीर) को शुद्ध करने की दुआ करता है ताकि वह मसीह के स्वरूप में बदल सके।
इस विचार को प्रमाणित करने वाले बाइबल के मुख्य वचन निम्नलिखित हैं:
1 थिस्सलुनीकियों 5:23 “शांति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी तरह पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें।”
इफिसियों 5:18 “और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर पवित्र आत्मा से भरते जाओ।”
2 कुरुन्थियों 3:18 “परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के आत्मा के द्वारा हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश करके बदलते जाते हैं।”
2. संगति, आत्मिक परिपक्वता और जीवित बलिदान
गीत का दूसरा अंतरा हमें परमेश्वर के दासों (सेवकों) की संगति और उनके द्वारा दिए जाने वाले परमेश्वर के वचन (कलाम) की अहमियत सिखाता है। विश्वासी प्रार्थना करता है कि वह वचन सुनकर आत्मिक रूप से सिद्ध (कामिल) बने। साथ ही, वह अपने शरीर को एक जीवित बलिदान के रूप में प्रभु की सेवा के लिए अर्पित करता है।
इस समर्पण और संगति को बाइबल के इन वचनों में स्पष्ट देखा जा सकता है:
रोमियों 12:1 “इसलिये हे भाइयो, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।”
इफिसियों 4:11-12 “और उसने कुछ को प्रेरित नियुक्त करके, और कुछ को भविष्यद्वक्ता नियुक्त करके, और कुछ को सुसमाचार सुनानेवाले नियुक्त करके, और कुछ को रखवाले और उपदेशक नियुक्त करके दे दिया; जिससे पवित्र लोग सिद्ध हों, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए।”
इब्रानियों 10:25 “और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों-ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों-त्यों और भी अधिक ऐसा किया करो।”
3. अंतिम दिन (प्रभु का आगमन) और सियोन में अनंत महिमा
गीत का अंतिम अंतरा मसीही जीवन की सबसे बड़ी आशा को दर्शाता है—प्रभु यीशु मसीह का बादलों पर दोबारा आना। अंतिम दिनों में जब प्रभु अपने संतों (विश्वासियों) को लेने आएंगे, तब सच्चा कलीसियाई समाज उनके साथ उठा लिया जाएगा। इसके बाद, स्वर्ग के पवित्र पर्वत ‘सियोन’ (सिव्योन) पर परमेश्वर की स्तुति और आराधना (सना) हमेशा-हमेशा के लिए गूंजेगी।
इस महान और धन्य आशा को बाइबल के इन वचनों में साफ तौर पर लिखा गया है:
1 थिस्सलुनीकियों 4:16-17 “क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से ललकार, और प्रधान दूत के शब्द, और परमेश्वर की तुरही फूंके जाने के साथ उतर आएगा; और जो मसीह में मरे हैं, वे पहले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिए जाएंगे कि हवा में प्रभु से मिलें; और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।”
प्रकाशितवाक्य 14:1 “फिर मैं ने दृष्टि की, और देखो, वह मेम्ना सिय्योन पहाड़ पर खड़ा है, और उसके साथ एक लाख चौवालिस हजार जन हैं, जिनके माथे पर उसका और उसके पिता का नाम लिखा हुआ है।”
भजन संहिता 147:12 “हे यरूशलेम, यहोवा की प्रशंसा कर! हे सिय्योन, अपने परमेश्वर की स्तुति कर!”
