Aawaj Aasma Se Gunj Rahi Hai Ye Lyrics

Aawaj Aasma Se Gunj Rahi Hai Ye Lyrics
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आवाज आसमा से गुंज रही है ये | Lyrics song

आवाज़ आसमां पे, गूंज रही है ये
पवित्र पवित्र पवित्र तू ही तो यहोवा …… 2

1. दूतों ने मिलकर फिर इक नया गीत ऊंचे सुरो में है गाया
वो ही नया गीत बनके मेरा मीत मेरे लबों पे है आया …… 2
क्या साज वो बजाते है और क्या उनको बजाने वाले है …… 2
तख़्त जलाली है जिसका लगा, वो तू ही तो यहोवा
आवाज़ आसमां पे …

2. दाऊद भी देखो यहोवा के आंगन में झूम झूम कर गाए
उसकी परस्तिश में ऐसा वो नाचे की पाव भी थमने न पाएं …… 2
मैं भी दाऊद के जैसे गाऊंगा मैं भी उसकी परस्तिश में नाचुंगा …… 2
मेरे लबों पे है जिसकी सना, वो तू ही तो यहोवा
आवाज़ आसमां पे …

3. अदभुत अनुग्रह हुवायों में फैला है कैसा है अदभुत नज़ारा
मूसा के पास देखो बैठा एलिशा और यूसुफ है कितना प्यारा …… 2
जहां सजदो पे सजदे होते है सब घुटने जहां पर झुकते है …… 2
जिसकी महोब्बत में दिल मेरा डूबा, वो तू ही तो यहोवा
आवाज़ आसमां पे …

गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)

यह मसीही गीत स्वर्ग और पृथ्वी के बीच की आराधना के मिलन को दर्शाता है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा परमेश्वर यहोवा “पवित्र, पवित्र, पवित्र” है, जिसकी महिमा में स्वर्ग के दूत दिन-रात लीन रहते हैं। गीत का मुख्य संदेश यह है कि जब हम इस धरती पर परमेश्वर की स्तुति करते हैं, तो हम उसी स्वर्गीय आराधना का हिस्सा बन जाते हैं जो सिंहासन के सामने हो रही है।

इस गीत में राजा दाऊद के उत्साहपूर्ण नृत्य, स्वर्ग के अद्भुत साजों, और पुराने नियम के महान भक्तों (मूसा, एलिशा, यूसुफ) का स्मरण कराया गया है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची आराधना में कोई शर्म या हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। जब हम अपने पूरे तन-मन से, घुटने टेककर उस जलाली (महिमामयी) परमेश्वर को साष्टांग प्रणाम करते हैं, तो हम उसके अद्भुत अनुग्रह का अनुभव करते हैं। यह गीत हर विश्वासी को पूरे दिल से यहोवा की स्तुति करने के लिए प्रेरित करता है।

गीत के अंतरों के अनुसार बाइबल वचन और स्पष्टीकरण

1. स्वर्ग में गूंजती “पवित्र, पवित्र, पवित्र” की आवाज (स्थायी)

बाइबल स्पष्ट रूप से बताती है कि परमेश्वर के सिंहासन के चारों ओर रहने वाले प्राणी और दूत निरंतर उसकी पवित्रता की घोषणा करते हैं।

प्रकाशितवाक्य 4:8 — “और चारों प्राणियों के चार चार पंख हैं, और चारों ओर और भीतर आंखें ही आंखें हैं; और वे रात दिन बिना विश्राम लिए यह कहते रहते हैं, ‘पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु परमेश्वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आने वाला है।'”

यशायाह 6:3 — “और वे एक दूसरे से पुकार पुकारकर कह रहे थे: ‘सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसकी महिमा से भरपूर है!'”

2. दूतों का नया गीत और जलाली तख्त (अंतरा 1)

जब पापी पश्चाताप करते हैं या परमेश्वर का कोई नया कार्य प्रकट होता है, तो स्वर्ग में नया गीत गाया जाता है। परमेश्वर का सिंहासन आग की ज्वाला और तेज से भरा हुआ (जलाली) है।

प्रकाशितवाक्य 5:9 — “और वे यह नया गीत गाने लगे: ‘तू इस पुस्तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तू ने वध होकर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।'”

दानिय्येल 7:9 — “मैं देखता ही रहा जब तक कि सिंहासन रखे गए, और वह अति प्राचीन विराजमान हुआ; उसका वस्त्र पाले के समान उजला, और सिर के बाल शुद्ध ऊन के सदृश थे; उसका सिंहासन आग की ज्वाला और उसके पहिए धधकती हुई आग के से दिखाई देते थे।”

3. राजा दाऊद का झूमकर नाचना और परस्तिश (अंतरा 2)

जब परमेश्वर का वाचा का संदूक यरूशलेम लाया जा रहा था, तब राजा दाऊद ने अपनी सारी प्रतिष्ठा को भूलकर यहोवा के सामने आनंद से नृत्य किया था। हमें भी उसी उत्साह से स्तुति करनी चाहिए।

2 शमूएल 6:14 — “और दाऊद यहोवा के सम्मुख अपनी सारी शक्ति से नाचता रहा; और दाऊद सन का एपोद पहने हुए था।”

भजन संहिता 149:3 — “वे नाचते हुए उसके नाम की स्तुति करें, और डफ़ और वीणा बजाते हुए उसका भजन गाएं!”

4. मूसा, एलिशा, यूसुफ और अद्भुत अनुग्रह (अंतरा 3)

यह अंतरा हमें उन संतों की याद दिलाता है जिन्होंने परमेश्वर के अनुग्रह को करीब से देखा। मूसा ने परमेश्वर की महिमा देखी, एलिशा ने दुगनी सामर्थ्य पाई और यूसुफ को परमेश्वर ने ऊंचे पद पर बैठाया। स्वर्ग में ये सभी भक्त मिलकर मेम्ने की महिमा करते हैं।

इब्रानियों 12:22-23 — “परन्तु तुम सियोन के पहाड़ के पास, और जीवित परमेश्वर के नगर अर्थात् स्वर्गीय यरूशलेम के पास, और लाखों स्वर्गदूतों के पास आए हो। और उन पहिलौठों की साधारण सभा और कलीसिया के पास जिनके नाम स्वर्ग में लिखे हुए हैं…”

प्रकाशितवाक्य 15:3 — “और वे परमेश्वर के दास मूसा का गीत, और मेम्ने का गीत गा गाकर कहते थे: ‘हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, तेरे काम बड़े और अद्भुत हैं; हे युग युग के राजा, तेरी चाल ठीक और सच्ची है।'”

5. घुटने टेकना और उसकी मोहब्बत में डूबना (अंतरा 3)

परमेश्वर की महिमा इतनी महान है कि एक दिन सृष्टि के हर एक प्राणी को उसके सामने झुकना पड़ेगा और उसकी आराधना करनी पड़ेगी।

फिलिप्पियों 2:10-11 — “कि यीशु के नाम पर हर एक घुटना झुके—चाहे स्वर्गियों का हो, चाहे पृथ्वी पर के रहनेवालों का, चाहे पृथ्वी के नीचे रहनेवालों का हो—और हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है, जिससे पिता परमेश्वर की महिमा हो।”

भजन संहिता 95:6 — “आओ हम झुककर दण्डवत् करें, और अपने बनाने वाले यहोवा के सम्मुख घुटने टेकें!”

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