आसमां से खुशखबरी आई है ये | Lyrics song
आसमां से खुशखबरी आई है ये
है स्वर्ग की राह खुल गई
जाहिर हुई खुद जिन्दगी
खुशियों की हर-सू (हर तरफ) घटा छाई है ये
1. बिछडे हुए तुझसे खुदा
सदियां थी बीतं गई
भटके थे हम वापिसी, की कोई भी राह ना थी
इंसान का रूप लिए, खुद आ गया पास मेरे
आसमां से खुशखबरी आई है ये ……..
2. अब डर नहीं मुझको कोई
खुद तू मेरे साथ है फजल तेरा मेरे खुदा,
मुझपे तेरे हाथ है
दूर हुए सब फांसले,
दीप जले है प्यार के
आसमां से खुशखबरी आई है ये ……..
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचन आधारित स्पष्टीकरण
यह सुंदर मसीही गीत मानव जाति के उद्धार, परमेश्वर के असीम प्रेम और प्रभु यीशु मसीह के संसार में देहधारण (मनुष्य रूप में आने) के महान संदेश को दर्शाता है। गीत के बोल सीधे बाइबल के मूल सिद्धांतों और परमेश्वर के वचनों से मेल खाते हैं। नीचे इस गीत के प्रत्येक भाग का बाइबल के वचनों के साथ स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. आसमां से खुशखबरी और स्वर्ग का मार्ग (स्थाई का संदेश)
गीत की शुरुआत कहती है कि स्वर्ग से एक खुशखबरी आई है और स्वर्ग का बंद रास्ता खुल गया है क्योंकि स्वयं जीवन (यीशु) प्रकट हो गया है।
बाइबल बताती है कि जब यीशु का जन्म हुआ, तो स्वर्गदूतों ने चरवाहों को सबसे बड़ी खुशखबरी दी थी। साथ ही, यीशु ने स्वयं को स्वर्ग का एकमात्र मार्ग और जीवन बताया है।
- लूका 2:10-11“तब स्वर्गदूत ने उनसे कहा, ‘मत डरो; क्योंकि देखो, मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिये होगा। कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है।'”
- यूहन्ना 14:6“यीशु ने उससे कहा, ‘मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।'”
- यूहन्ना 1:4“उसमें जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी।”
2. परमेश्वर से बिछड़ना और मनुष्य रूप में आना (अंतरा 1 का स्पष्टीकरण)
गीत का पहला अंतरा बताता है कि पाप के कारण मनुष्य सदियों से अपने सृजनहार परमेश्वर से बिछड़ गया था। भटकने के बाद वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं था, लेकिन परमेश्वर ने स्वयं मनुष्य का रूप धारण किया ताकि हमें बचा सके।
उत्पत्ति की पुस्तक में आदम और हव्वा के पाप के बाद मनुष्य परमेश्वर की उपस्थिति से दूर हो गया था। इस दूरी को मिटाने के लिए परमेश्वर ‘इम्मानुएल’ अर्थात “परमेश्वर हमारे साथ” होकर संसार में आया।
- यशायाह 53:6“हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सब के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।”
- यूहन्ना 1:14“और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।”
- फिलिप्पियों 2:7-8“वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का रूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।”
3. भय से मुक्ति, अनुग्रह और परमेश्वर की संगति (अंतरा 2 का स्पष्टीकरण)
गीत का दूसरा अंतरा मसीही जीवन के भरोसे को दिखाता है। जब यीशु हमारे साथ है, तो किसी बात का डर नहीं है। उसका अनुग्रह (फजल) और उसका हाथ हमेशा हमारे ऊपर रहता है। पाप के कारण परमेश्वर और मनुष्य के बीच जो फासले (दूरी) थे, वे यीशु के क्रूस के बलिदान से समाप्त हो गए हैं और अब चारों तरफ प्रेम का प्रकाश है।
- भजन संहिता 23:4“चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूँ, तो भी हानि से न डरूँगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।”
- इफिसियों 2:8-9“क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है; और न कर्मों के कारण, ताकि कोई घमण्ड न कर सके।”
- रोमियों 8:38-39“क्योंकि मैं दृढ़ निश्चय जानता हूँ कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएँ, न वर्तमान वस्तुएँ, न भविष्य की वस्तुएँ, न सामर्थ्य, न ऊँचाई, न गहराई, और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के उस प्रेम से जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।”
- 1 यूहन्ना 4:18“प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर भगा देता है; क्योंकि भय का सम्बन्ध दण्ड से होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।”
निष्कर्ष
यह गीत पूरी तरह से रोमियों 5:8 के सत्य को प्रमाणित करता है: “परन्तु परमेश्वर हमारे प्रति अपने प्रेम की भलाई इस प्रकार प्रगट करता है कि जब हम पापी ही थे, तब मसीह हमारे लिये मरा।” यह रचना हमें याद दिलाती है कि हम भटके हुए थे, लेकिन यीशु मसीह ने स्वर्ग से आकर हमें गले लगाया, हमारे डर को दूर किया और हमें पिता परमेश्वर से मिला दिया।


