Tu Lukne Di Jaa Hai Meri Lyrics

 Tu Lukne Di Jaa Hai Meri Lyrics
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तू लुकने दी जा है मेरी | Lyrics song

तू लुकने दी जा (जगह) है मेरी, 
येसु तू पनाह है मेरी तू ही इब्तिदा (आरंभ), 
तू ही इन्तेहा (अंत) तू लुकने दी जा (जगह) है मेरी…

1. जित्थे – जित्थे पैरा दे, निशान तेरे होणगे, 
ओत्थे ओत्थे पैर मेरे, येसु जी ख्लोणगे -2 
तू ज़िन्दगी दी राह है मेरी, 
जीण दी वजह है मेरी तू ही इब्तिदा (आरंभ)… 
तू ही है सहारा मेरा…..

2. जग उत्ते रब्बा तेरी, तारीफ़ सदा करांगा, 
हर गल्ल विच्च उच्चा, नाम तेरा करांगा -2 
तू सदा दी वफ़ा ए मेरी, जीण दी वजह है मेरी-2 
तू ही इब्तिदा (आरंभ)… 
तू ही है सहारा मेरा…

गीत का मुख्य सारांश (Song Summary)

यह गीत एक आराधक के दिल की गहरी पुकार है, जो पूरी तरह से प्रभु यीशु मसीह पर निर्भर है। गीत के बोलों में समर्पण, सुरक्षा, मार्गदर्शन और परमेश्वर की महिमा करने का अटूट संकल्प झलकता है। ‘लुकने दी जा’ (छिपने का स्थान) और ‘पनाह’ जैसे शब्द यह दर्शाते हैं कि जब दुनिया में चारों तरफ मुश्किलें और तूफान होते हैं, तब यीशु ही एकमात्र सुरक्षित गढ़ है। यह गीत हमें सिखाता है कि यीशु ही हमारे जीवन का आरंभ (इब्तिदा) और अंत (इन्तेहा) है। हमारा अस्तित्व उसी से है और उसी में समाप्त होता है। जीवन के हर मोड़ पर उसके पीछे चलना, उसकी संगति में बने रहना और उसकी वफादारी का प्रचार करना ही एक सच्चे विश्वासी का परम कर्तव्य है।

गीत से जुड़े मुख्य बाइबल वचन और स्पष्टीकरण (Bible Verses & Explanation)

इस गीत के हर एक भाग को पवित्र शास्त्र बाइबल के वचनों के आधार पर गहराई से समझा जा सकता है:

1. यीशु हमारी शरणस्थान और पनाह है

“तू लुकने दी जा है मेरी, येसु तू पनाह है मेरी…”

यह पंक्ति हमें बताती है कि परमेश्वर संकट के समय हमारा सबसे सुरक्षित ठिकाना है। जब हम डरे हुए या थके हुए होते हैं, तो हम उसकी उपस्थिति में शांति पाते हैं।

  • भजन संहिता 32:7 – “तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।”
  • भजन संहिता 91:2 – “मैं यहोवा के विषय कहूँगा, ‘वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, जिस पर मैं भरोसा रखता हूँ।'”
  • स्पष्टीकरण: दाऊद की तरह लेखक भी यह स्वीकार करता है कि जब संसार में कोई सहारा नहीं दिखता, तब प्रभु यीशु मसीह ही हमारी वह चट्टान बनता है जहाँ शैतान की कोई भी शक्ति हमें छू नहीं सकती।

2. यीशु ही आदि और अंत है

“तू ही इब्तिदा, तू ही इन्तेहा…”

यह पंक्तियाँ मसीह की सर्वशक्तिमानता और उसकी अनंतता को प्रकट करती हैं। वह समय और सृष्टि से परे है।

  • प्रकाशितवाक्य 22:13 – “मैं अल्फ़ा और ओमेगा, पहला और पिछला, आदि और अन्त हूँ।”
  • इब्रानियों 12:2 – “और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें…”
  • स्पष्टीकरण: हमारा विश्वास यीशु से शुरू होता है और उसी पर पूरा होता है। वह हमारे जीवन की शुरुआत भी है और हमारी अंतिम मंजिल भी।

3. मसीह के पदचिन्हों पर चलना

“जित्थे – जित्थे पैरा दे, निशान तेरे होणगे, ओत्थे ओत्थे पैर मेरे, येसु जी ख्लोणगे…”

यह अंतरा पूरी तरह से मसीह के पीछे चलने और उसकी आज्ञाकारिता में जीवन बिताने के समर्पण को दिखाता है।

  • 1 पतरस 2:21 – “और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुःख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है कि तुम भी उसके पद-चिह्नों पर चलो।”
  • भजन संहिता 119:105 – “तेरा वचन मेरे पाँवों के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।”
  • स्पष्टीकरण: एक विश्वासी का मार्ग खुद की मर्जी का नहीं, बल्कि यीशु के दिखाए रास्ते पर चलना है। जहाँ यीशु खड़ा है, वहीं उसका दास भी खड़ा होना चाहता है।

4. जीवन की राह और जीने की वजह

“तू ज़िन्दगी दी राह है मेरी, जीण दी वजह है मेरी…”

यीशु के बिना जीवन दिशाहीन और अर्थहीन है। वह केवल एक मार्गदर्शक नहीं, बल्कि खुद ‘मार्ग’ है।

  • यूहन्ना 14:6 – “यीशु ने उससे कहा, ‘मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।'”
  • फिलिप्पियों 1:21 – “क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।”
  • स्पष्टीकरण: प्रेरित पौलुस की तरह यह गीत भी यह घोषणा करता है कि मसीह ही हमारे जीने का एकमात्र उद्देश्य और कारण है।

5. परमेश्वर की स्तुति और बड़ाई करना

“जग उत्ते रब्बा तेरी, तारीफ़ सदा करांगा, हर गल्ल विच्च उच्चा, नाम तेरा करांगा…”

यह भाग परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता और दुनिया के सामने उसके नाम को ऊँचा उठाने के संकल्प को दर्शाता है।

  • भजन संहिता 145:1-2 – “हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तेरा गुणानुवाद करूँगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूँगा। हर दिन मैं तुझे धन्य कहा करूँगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूँगा।”
  • मत्ती 5:16 – “उसी प्रकार तुम्हारा उजाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें।”
  • स्पष्टीकरण: हमारा जीवन ऐसा होना चाहिए जिससे परमेश्वर की महिमा हो। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमारे होठों पर हमेशा उसकी तारीफ होनी चाहिए।

निष्कर्ष: यह गीत केवल गाने के लिए नहीं, बल्कि मसीही जीवन को पूरी तरह से यीशु के हाथों में सौंपने का एक जीवंत प्रकटीकरण है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी सुरक्षा, हमारा अस्तित्व, हमारा मार्ग और हमारी महिमा केवल और केवल प्रभु यीशु मसीह में ही सुरक्षित हैं।

 Tu Lukne Di Jaa Hai Meri Lyrics in hindi

तू लुकने दी जा है मेरी | Lyrics song in hindi

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