जीवन है तू रास्ता है | Lyrics song
जीवन है तू रास्ता है ……
तू ही तो सच है खुदा है ….
१. है तेरा वादा छोडूंगा न मैं …….
ना ही मैं त्यागूँगा …….
फिर तू बता कैसे कह दूँ ……
यीशु तू मुझसे जुदा है …….
२. बीमार हो या लाचार हो या …….
या हों गमों से परेशान …….
तुझसे शिफ़ा पा गया वो ……
जिसने भी तुझको छुआ है …….
३. साँसे हैं तेरी आँखे हैं तेरी ….
तेरी जुबां से मैं गाऊँ ….
मुझमें जो है सब है तेरा ….
अपना भला मुझमें क्या है ….
गीत का मुख्य सारांश (Song Summary)
यह गीत एक आराधक के अटूट विश्वास, परमेश्वर की वफ़ादारी, चंगाई की सामर्थ्य और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। यह मुख्य रूप से प्रभु यीशु मसीह की पहचान (कि वे ही मार्ग, सत्य और जीवन हैं) और उनके कभी न बदलने वाले वादों पर आधारित है। जब मनुष्य हर तरफ से निराश हो जाता है, तब यीशु का अनुग्रह और उसकी छुअन जीवन को बदल देती है।
गीत के अंतरा-अनुसार बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
1. मुख्य भाग: यीशु ही मार्ग, सत्य और जीवन है
गीत की शुरुआत ही प्रभु यीशु के उस महान दावे से होती है जहाँ वे खुद को जीवन, रास्ता और सत्य बताते हैं। पवित्र शास्त्र बाइबल में यीशु ने स्वयं को परमेश्वर तक पहुँचने का एकमात्र जरिया बताया है।
- यूहन्ना 14:6 (पूर्ण वचन):“यीशु ने उससे कहा, ‘मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।'”
- स्पष्टीकरण: यह वचन यह साफ़ करता है कि संसार में भटके हुए मानव जीवन को सही दिशा और अनंत जीवन केवल यीशु मसीह के माध्यम से ही मिल सकता है।
2. पहला अंतरा: परमेश्वर का वादा और कभी न छोड़ने का विश्वास
इस अंतरे में विश्वास की दृढ़ता है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, परमेश्वर अपने लोगों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। उसका वादा अटल है, इसलिए विश्वासी दावा करता है कि यीशु उससे कभी जुदा नहीं हो सकता।
- इब्रानियों 13:5 (पूर्ण वचन):“तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, ‘मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा।'”
- व्यवस्थाविवरण 31:6 (पूर्ण वचन):“तू हियाव बाँध और दृढ़ हो, उनसे न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलनेवाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझको न धोखा देगा और न छोड़ेगा।”
- रोमियों 8:35 (पूर्ण वचन):“कौन हमको मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?”
- स्पष्टीकरण: ये वचन हमें ढाढस बंधाते हैं कि इंसानी रिश्ते भले ही साथ छोड़ दें, लेकिन जीवित परमेश्वर का हाथ हमारे ऊपर हमेशा बना रहता है। मसीह का प्रेम इतना गहरा है कि कोई भी सांसारिक मुसीबत हमें उससे अलग नहीं कर सकती।
3. दूसरा अंतरा: चंगाई और लाचारी से छुटकारा (शिफ़ा)
यह भाग यीशु मसीह की चंगाई की सामर्थ्य को प्रकट करता है। सुसमाचारों में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ लोगों ने केवल यीशु के वस्त्र के छोर को छुआ और वे पूरी तरह चंगे हो गए।
- मत्ती 14:36 (पूर्ण वचन):“और उससे विनती करने लगे कि वह उन्हें अपने वस्त्र के आँचल ही को छूने दे; और जितनों ने छुआ, वे सब चंगे हो गए।”
- मर्कुस 5:28-29 (पूर्ण वचन – लहू बहने वाली स्त्री का विवरण):“क्योंकि वह कहती थी, ‘यदि मैं उसके वस्त्र ही को छू लूँगी, तो चंगी हो जाऊँगी।’ और तुरंत उसका लोहू बहना बंद हो गया, और उसने अपनी देह में जान लिया कि मैं उस बीमारी से चंगी हो गई हूँ।”
- यशायाह 53:5 (पूर्ण वचन):“परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।”
- स्पष्टीकरण: चाहे कोई बीमारी शारीरिक हो, मानसिक हो या दुखों का पहाड़ हो, यीशु के पास हर लाचारी का इलाज है। जिसने भी विश्वास से उसे पुकारा और छुआ, उसने परमेश्वर की सामर्थ्य (शिफ़ा) को अपने जीवन में महसूस किया।
4. तीसरा अंतरा: पूर्ण समर्पण और कृतज्ञता
गीत का आखिरी भाग पूरी तरह से मसीह के प्रति समर्पण को दिखाता है। हमारी साँसें, हमारी आँखें और हमारा पूरा अस्तित्व उसी का दिया हुआ है। मनुष्य के भीतर स्वतः कोई भलाई नहीं है, जो कुछ भी श्रेष्ठ है वह मसीह का अनुग्रह है।
- गलातियों 2:20 (पूर्ण वचन):“मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है; और मैं शरीर में अब जो जीवन बिताता हूँ, तो केवल उस परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास से बिताता हूँ, जिसने मुझसे प्रेम किया और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।”
- रोमियों 7:18 (पूर्ण वचन):“क्योंकि मैं जानता हूँ कि मुझ में अर्थात् मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती; इच्छा तो मुझ में है, पर भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन हमें सिखाता है कि एक मसीही जीवन का असली अर्थ खुद को शून्य करके यीशु को अपने जीवन में बढ़ने देना है। हमारी अपनी कोई योग्यता नहीं है, बल्कि मसीह का आत्मा ही है जो हमसे भले काम करवाता है और हमें उसकी महिमा गाने की शक्ति देता है।
निष्कर्ष: यह गीत केवल एक भजन नहीं, बल्कि पूरी बाइबल का एक सुंदर निचोड़ है, जो हमें याद दिलाता है कि यीशु में ही हमारा सब कुछ छिपा है।


