Tera Shukar Kra main Yeshu Ji Lyrics song
तेरा शुक्र करां मैं येसु जी
सुबह तो लैके शाम
तू सुंदा मेरियां दुआवा नू
राखे सांभ सांभ मेरे सहावां नू
लावां दिल तो मैं तेरा नाम
1. रूलदे (रोते) होएं नू येसु गल नाल लाया
मुझे पापी नू तू अपना बनाया
इक पल वी दूर ना जावां मैं
येसु दर तेरा ते आवां मैं
दस्सा सब नू तेरा पैगाम
2. येसु मेरे लाई तू सब कुंझ कीता
मौत का प्याला मेरे लाई पीटा
तू कटदा मेरिया सजावां नू
पूरे करदा मेरीया चाहंवां नू
मिले तेरे तो आराम, मिले तेरे तो आराम….
3. रुह अपने-नाल येसु मैंनू भरदे
अपना मसह मेरे ते करदे
तेरे नाम लई शाफी गावां मैं
हुण करां ना कोई ख़तावां मैं
रखा दिल विच तेरा कलाम
1. निरंतर धन्यवाद और प्रार्थनाओं का उत्तर (स्थायी भाव)
गीत की शुरुआत सुबह से शाम तक प्रभु का धन्यवाद करने और इस विश्वास से होती है कि वे हमारी हर दुआ सुनते हैं और हमारी हर सांस की रक्षा करते हैं।
- बाइबल वचन और स्पष्टीकरण:1 थिस्सलुनीकियों 5:16-18 “सर्वदा आनन्दित रहो। निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो। हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।”यह वचन गीत की मुख्य पंक्ति “तेरा शुक्र करां मैं येसु जी, सुबह तो लैके शाम” को पूरी तरह प्रमाणित करता है। बाइबल हमें हर परिस्थिति में निरंतर धन्यवाद देने की शिक्षा देती है, क्योंकि हमारी सांसें और हमारा जीवन उसी की देन है।1 यूहन्ना 5:14 “और हमें उसके सामने जो ढीठाई होती है, वह यह है; कि यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो वह हमारी सुनता है।”गीतकार कहता है “तू सुंदा मेरियां दुआवा नू”। यह वचन हमें आश्वस्त करता है कि जब हम सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, तो जीवित परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं को अनसुना नहीं करता।
2. पापियों का उद्धार और प्रभु का आलिंगन (अंतरा 1)
गीत का पहला अंतरा बयां करता है कि जब मनुष्य संसार में भटक रहा था और रो रहा था (“रूलदे होएं नू”), तब प्रभु यीशु ने उसे गले से लगाया और अपने अमूल्य लहू से शुद्ध करके अपना बना लिया।
- बाइबल वचन और स्पष्टीकरण:लूका 19:10 “क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुए को ढूंढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।”गीत की पंक्ति “मुझे पापी नू तू अपना बनाया” इस वचन का जीवंत रूप है। यीशु इस संसार में धर्मियों के लिए नहीं, बल्कि पापियों के उद्धार के लिए आए ताकि भटके हुओं को सही राह दिखा सकें।भजन संहिता 34:18 “यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसों हुओं का उद्धार करता है।”जब मनुष्य दुखी और अकेला होता है, तो प्रभु उसके सबसे करीब होते हैं। “गल नाल लाया” (गले से लगाना) परमेश्वर के इसी अगाध प्रेम और सांत्वना को प्रकट करता है।
3. यीशु का बलिदान और पापों से मुक्ति (अंतरा 2)
दूसरे अंतरे में यीशु मसीह के क्रूस के बलिदान का वर्णन है, जहाँ उन्होंने हमारे पापों, सजाओं और बीमारियों को अपने ऊपर ले लिया और हमें अनंत शांति (आराम) दी।
- बाइबल वचन और स्पष्टीकरण:यशायाह 53:5 “परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।”गीत की पंक्तियां “मौत का प्याला मेरे लाई पीटा, तू कटदा मेरिया सजावां नू” सीधे तौर पर यशायाह की इस भविष्यवाणी को पूरा करती हैं। हमारे पापों की जो सजा मृत्यु थी, उसे यीशु ने क्रूस पर स्वयं सह लिया।मत्ती 11:28 “हे सब परिश्रम करने वालो और बोझ से दबे लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।”गीत के अंत में कहा गया है “मिले तेरे तो आराम”। संसार की चिंताएं और पाप मनुष्य को थका देते हैं, लेकिन यीशु के पास आने से आत्मा को वह सच्चा विश्राम और शांति मिलती है जो संसार नहीं दे सकता।
4. पवित्र आत्मा की भरपूरी और पवित्र जीवन (अंतरा 3)
अंतिम अंतरे में भक्त प्रभु से प्रार्थना करता है कि वह उसे अपने पवित्र आत्मा और सामर्थ्य (मसह/Anointing) से भर दे ताकि वह एक पवित्र जीवन जी सके और फिर कभी कोई पाप (ख़तावां) न करे।
- बाइबल वचन और स्पष्टीकरण:इफिसियों 5:18 “और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।”“रुह अपने-नाल येसु मैंनू भरदे” का अर्थ यही है कि एक मसीही का जीवन पवित्र आत्मा के नियंत्रण में होना चाहिए, जिससे उसके जीवन से मसीह की महिमा प्रकट हो।भजन संहिता 119:11 “मैंने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं।”गीत की आखिरी पंक्ति है “रखा दिल विच तेरा कलाम” (कलाम अर्थात परमेश्वर का वचन)। यह वचन स्पष्ट करता है कि जब हम परमेश्वर के पवित्र वचनों को अपने दिल में बसा लेते हैं, तो वह वचन हमें पाप और बुराई के मार्ग पर जाने से रोकता है।
निष्कर्ष:
यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं बल्कि एक आस्तिक की आत्मिक यात्रा है। यह याद दिलाता है कि यीशु मसीह का अनुग्रह हमारे जीवन में कितना बड़ा है, और हमारा एकमात्र कर्तव्य पूर्ण समर्पण के साथ उनका धन्यवाद करना है।
