आज यरूशलेम में यीशु जी Lyrics song
Aaj Jerusalem Mai Yeshu Ji Lyrics
आज यरूशलेम में, यीशु जी आए हैं
अपने हाथों को उठाके, और तालीं बजा के
हम गाएं सारे होशाना-होशाना
आज यरूशलेम में……
1. हमकों पापों से वो छुड़ाने, यीशु जगत में आया
इन्सान बनके यीशु जगत में, पाप मिटाने आया
अपने हाथों को उठाके…….
2. इन्सान से वो नफ़रत ना करता,
पाप से नफरत करता हैं
अपने मसह से वो सबको भरता,
रूह जब जुम्बश करता हैं
अपने हाथों को उठाके……
3. राजाओं का राजा है वो, प्रभुओ का प्रभु वो है
पाक कलाम पे जो है चलता, उसको वो ऊंचा करता है
अपने हाथों को उठाके…….
1. यरूशलेम में विजयी प्रवेश और ‘होशाना’ का जयजयकार (मुख्य भाग)
गीत का मुख्य भाग मसीह के यरूशलेम प्रवेश के ऐतिहासिक और आत्मिक आनंद को दर्शाता है, जहाँ पूरी कलीसिया को हाथ उठाकर और ताली बजाकर स्तुति करने के लिए प्रेरित किया गया है।
मत्ती 21:9
“और जो भीड़ आगे-आगे जाती और पीछे-पीछे चली आती थी, पुकार-पुकार कर कहती थी, ‘दाऊद की सन्तान को होशाना! धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है! आकाश में होशाना!'”
भजन संहिता 47:1
“हे देश-देश के सब लोगो, तालियाँ बजाओ! ऊँचे शब्द से परमेश्वर के लिये जयजयकार करो!”
भजन संहिता 134:2
“अपने हाथ पवित्र स्थान की ओर उठाकर यहोवा को धन्य कहो!”
स्पष्टीकरण: जब प्रभु यीशु मसीह गधे के बच्चे पर सवार होकर यरूशलेम आए, तो लोगों ने अपने वस्त्र और खजूर की डालियाँ बिछाकर उनका स्वागत राजा के रूप में किया। ‘होशाना’ का अर्थ है “अभी उद्धार कर।” यह गीत हमें सिखाता है कि आज हमें भी उसी उमंग, आदर और शारीरिक मुद्रा (हाथ उठाकर और ताली बजाकर) के साथ अपने जीवित परमेश्वर का स्वागत और आराधना करनी चाहिए।
2. मसीह का देहधारण और पापों का निवारण (पहला अंतरा)
यह भाग सुसमाचार के सबसे बुनियादी सत्य को प्रकट करता है कि उद्धारकर्ता ने स्वर्ग का वैभव छोड़कर मनुष्य का रूप क्यों लिया। वह संसार की राजनैतिक व्यवस्था को बदलने नहीं, बल्कि मानव जाति को पाप के चंगुल से छुड़ाने आए।
मत्ती 1:21
“वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”
1 तीमुथियुस 1:15
“यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिनमें सब से बड़ा मैं हूँ।”
1 यूहन्ना 3:5
“और तुम जानते हो कि वह इसलिये प्रगट हुआ कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्वभाव में पाप नहीं।”
स्पष्टीकरण: आदम के कारण मनुष्य जाति में जो पाप आया, उसे कोई भी इंसान अपने अच्छे कामों से नहीं मिटा सकता था। इसलिए, यीशु मसीह ‘इंसान बनकर जगत में आए’ ताकि क्रूस पर स्वयं को एक बार और सदा के लिए बलिदान करके हमारे पापों की पूरी कीमत चुका दें।
3. पापी से प्रेम, पाप से घृणा और पवित्र आत्मा की जुम्बिश (दूसरा अंतरा)
यह अंतरा परमेश्वर के अद्भुत चरित्र और उनके काम करने के तरीके को समझाता है। परमेश्वर पापी से प्रेम करते हैं पर पाप से घृणा करते हैं। जब उनका आत्मा कार्य करता है, तो विश्वासी उनके मसह (अभिषेक) से भर जाते हैं।
रोमियों 5:8
“परन्तु परमेश्वर हमारे लिये अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।”
उत्पत्ति 1:2
“और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी, और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था; तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।” (यहाँ मण्डलाने शब्द का मूल अर्थ ‘गतिमान होना’ या ‘जुम्बिश करना’ है)
1 यूहन्ना 2:27
“और तुम्हारा वह अभिषेक जो उसकी ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इसका प्रयोजन नहीं कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन् जैसे वह अभिषेक जो उसकी ओर से किया गया है तुम्हें सब बातें सिखाता है और वह सच्चा है और झूठा नहीं, और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है, वैसे ही तुम उसमें बने रहते हो।”
स्पष्टीकरण: यीशु मसीह ने कभी भी पापियों का तिरस्कार नहीं किया, बल्कि उन्हें मन फिराव की ओर बुलाया। वे आज भी हमसे प्रेम करते हैं, लेकिन हमारे भीतर के पाप से नफरत करते हैं। जब परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे जीवन में ‘जुम्बिश’ (कार्य) करता है, तो अंधकार दूर होता है और हमें वह ‘मसह’ (अभिषेक) प्राप्त होता है जो हमें पवित्रता में चलना सिखाता है।
4. राजाओं का राजा और जीवित कलाम का सामर्थ्य (तीसरा अंतरा)
यह अंतरा मसीह यीशु के सर्वोच्च स्थान को घोषित करता है और साथ ही यह प्रतिज्ञा देता है कि जो कोई परमेश्वर के जीवित वचन (पाक कलाम) पर विश्वास रखकर चलता है, उसे परमेश्वर कभी नीचा होने नहीं देते।
प्रकाशितवाक्य 19:16
“और उसके वस्त्र और जाँघ पर यह नाम लिखा है: राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।”
यहोशू 1:8
“व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में रात-दिन ध्यान दिए रहना, इसलिए कि जो कुछ उसमें लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।”
भजन संहिता 119:9
“जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से!”
याकूब 4:10
“प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।”
स्पष्टीकरण: यीशु मसीह इस ब्रह्मांड के सर्वोच्च अधिकारी, ‘राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु’ हैं। जो कोई मनुष्य उनके ‘पाक कलाम’ (बाइबल के वचनों) के अनुसार अपनी चाल-चलन को रखता है और उनके प्रति वफादार रहता है, परमेश्वर प्रतिज्ञा के अनुसार उसे दुनिया के सामने आत्मिक और व्यावहारिक दोनों रूपों में ‘ऊँचा करते हैं’ और आदर की आशीष देते हैं।


