मैं मन फिराऊंगा Lyrics song
मैं मन फिराऊंगा,
मैं मन फिराऊंगा-2
तेरी हजूरी में, तेरी महिमा गाऊंगा
मैं मन फिराऊंगा…
1. मैं सुन चुका हूं तेरे वचनों को,
मैं देख चुका हूं तेरे कामों को
मैं चलता जाऊंगा -2, तेरी सुनाई बातों पे
मैं चलता जाऊंगा, मैं मन फिराऊंगा….
2. मुझे दुनियां नहीं ज़रूरी, तेरी हजूरी हैं,
तेरी आत्मा की मुझपे भरपूरी है, भरपूरी है (2)
मैं बढता जाऊंगा,
मैं तो बढ़ता जाऊंगा,
तेरी हजूरी में मैं बढ़ता जाऊंगा
मैं मन फिराऊंगा…
3. मेरी ज़िंदगी में मसीहा, जब से आया है,
मेरा तन और मन दोनों को, पाक बनाया है (2)
मैंने मन फिराया है -2, तेरी स्वर्गी रोटी को,
आज मैंने खाया है
मैंने मन फिराया हैं-मैंने मन फिराया हैं,
तेरी हजूरी में तेरा बेटा आया हैं
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचन (स्पष्टीकरण)
मसीही विश्वास में ‘मन फिराव’ का अर्थ केवल अपने पापों के लिए पछताना नहीं, बल्कि पाप के मार्ग को पूरी तरह छोड़कर परमेश्वर की ओर मुड़ जाना है। यह गीत इसी आत्मिक समर्पण को बयां करता है, जहाँ एक विश्वासी दुनिया की सारी अभिलाषाओं को त्यागकर पवित्र आत्मा की भरपूरी और परमेश्वर की संगति को अपने जीवन का सबसे मुख्य भाग चुनता है।
नीचे गीत के मुख्य भावों और उनसे जुड़े पवित्र शास्त्र बाइबल के वचनों का स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. मन फिराव और परमेश्वर की हजूरी में आना (स्थाई)
गीत की मुख्य पंक्ति “मैं मन फिराऊंगा, तेरी हजूरी में, तेरी महिमा गाऊंगा” यह दर्शाती है कि परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने की पहली शर्त मन फिराना है। जब मनुष्य अपने पुराने मार्ग से मुड़कर प्रभु की हजूरी में आता है, तब उसका जीवन स्तुति और महिमा से भर जाता है।
मत्ती 4:17 — “उस समय से यीशु प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, ‘मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है।'” प्रेरितों के काम 3:19 — “इसलिए मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएं, जिससे प्रभु के सम्मुख से विश्रान्ति के दिन आएं।”
2. वचनों को सुनना और उन पर चलना (अंतरा-1)
पंक्ति “मैं सुन चुका हूं तेरे वचनों को… मैं चलता जाऊंगा, तेरी सुनाई बातों पे” यह प्रकट करती है कि केवल वचन सुनना काफी नहीं है, बल्कि उस सुने हुए वचन पर आज्ञाकारिता के साथ चलना ही सच्चा मसीही जीवन है।
याकूब 1:22 — “परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।” भजन संहिता 119:105 — “तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।” लूका 11:28 — “उसने कहा, ‘हाँ, परन्तु धन्य वे हैं जो परमेश्वर का वचन सुनते और मानते हैं।'”
3. संसार का त्याग और पवित्र आत्मा की भरपूरी (अंतरा-2)
पंक्तियाँ “मुझे दुनियां नहीं ज़रूरी, तेरी हजूरी हैं, तेरी आत्मा की मुझपे भरपूरी है… मैं तो बढ़ता जाऊंगा” विश्वासी के आत्मिक जीवन की परिपक्वता को दिखाती हैं। संसार और उसकी वस्तुएं नाशवान हैं, इसलिए एक मसीही का मुख्य लक्ष्य पवित्र आत्मा की सामर्थ्य में दिन-प्रतिदिन आत्मिकता में आगे बढ़ना है।
1 यूहन्ना 2:15 — “तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्तुओं से प्रेम रखो। यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।” इफिसियों 5:18 — “और दाख रस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।” 2 पतरस 3:18 — “परन्तु हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।”
4. मसीह में नई सृष्टि और स्वर्गीय रोटी (अंतरा-3)
गीत का यह भाग “मेरी ज़िंदगी में मसीहा, जब से आया है, मेरा तन और मन दोनों को, पाक बनाया है… तेरी स्वर्गी रोटी को, आज मैंने खाया है” मसीह में मिलने वाली शुद्धता और आत्मिक पोषण को उजागर करता है। जब यीशु जीवन में आते हैं, तो वे हमें अपने लहू से धोकर पवित्र (पाक) कर देते हैं, और वचन रूपी स्वर्गीय रोटी से हमें तृप्त करते हैं।
2 कुरुन्थियों 5:17 — “इसलिए यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गई हैं।” यूहन्ना 6:35 — “यीशु ने उनसे कहा, ‘जीवन की रोटी मैं हूँ: जो मेरे पास आता है वह कभी भूखा न होगा, और जो मुझ पर विश्वास करता है वह कभी प्यासा न होगा।'” यूहन्ना 6:51 — “जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूँ; यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा; और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।” मत्ती 5:9 — “धन्य हैं वे जो मेल कराने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।” (गीत की पंक्ति ‘तेरा बेटा आया है’ के संदर्भ में)।



