मैं पल्ला यीशु दा कदी नहीं छडना Lyrics song
मैं पल्ला यीशु दा कदी नहीं छडना
ज़माना वैरी लख होवे -2
कदी ऐसा न दिन आवे
जदों मैथों ओ वख होवे -2
मैं पल्ला यीशु दा कदी नहीं छडना
ज़माना वैरी लख होवे
1. ओहदे कदमा ते बंदगी चे
हर एक पल मैं गुज़ारांगा -2
इबादत कर के सजदे चे
मैं किस्मत नूं संवारांगा
मैं जो मंगना मिलेगा जे
कदे मैनू न शक होवे
कदी ऐसा न दिन आवे...
मैं हुक्मां ते ओहदे सदा चलदा रवांगा
मुनादी हमेशा ओहदी करदा रवांगा
मैं पल्ला कदी वी मसीहा दा नहीं छडना -2
2 . मैनू चुनया मसीहा ने
मेरा रखदा परम वी ए -2
मैं इस लायक कदी नहीं सी
ऐ गल सारी करम दी ए
मेरे दिल ते मेरी रूह ते
सदा यीशु दा हक़ होवे
कदी ऐसा न दिन आवे...
गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल वचन स्पष्टीकरण
“मैं पल्ला यीशु दा कदे नहीं छड़ना” केवल एक मसीही गीत नहीं है, बल्कि यह एक विश्वासी का प्रभु यीशु मसीह के प्रति अटूट विश्वास, पूर्ण समर्पण और दृढ़ निश्चय का जीवंत प्रमाण है। इस गीत का मुख्य संदेश यही है कि संसार में चाहे कितनी भी मुश्किलें, बीमारियाँ, निंदा या परेशानियाँ क्यों न आएँ, हमें प्रभु यीशु का हाथ (पल्ला) कभी नहीं छोड़ना है। यह गीत हमें सिखाता है कि यीशु मसीह ही हमारी अंतिम चट्टान, उद्धारकर्ता और एकमात्र सहारा हैं।
नीचे इस गीत के गहरे अर्थ को समझने के लिए बाइबल के मुख्य वचन और उनका स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. प्रभु पर अटूट भरोसा और उसका पल्ला थामे रखना
गीत की मुख्य पंक्ति “मैं पल्ला यीशु दा कदे नहीं छड़ना” हमें याद दिलाती है कि जब हम मसीह को अपना लेते हैं, तो वह हमारा हाथ थाम लेते हैं। हमें भी हर परिस्थिति में उनके साथ बने रहना है।
यशायाह 41:13
“क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहूँगा, ‘मत डर, मैं तेरी सहायता करूँगा।'”
स्पष्टीकरण: यह वचन इस गीत की आत्मा है। जब संसार में तूफ़ान आते हैं, तो इंसान घबरा जाता है। लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर खुद हमारा दाहिना हाथ थामने का वादा करते हैं। जब स्वयं सृष्टिकर्ता ने हमारा पल्ला थाम रखा है, तो एक विश्वासी का भी यह कर्तव्य है कि वह मसीह के प्रेम और विश्वास से कभी पीछे न हटे।
2. बीमारियों और दुखों में यीशु ही एकमात्र चंगा करने वाला
मसीही जीवन में बीमारियाँ और शारीरिक कष्ट आ सकते हैं, लेकिन यह गीत घोषित करता है कि यीशु के कोड़े खाने से हम चंगे हो चुके हैं। वह हमारी हर कमजोरी को दूर करने की सामर्थ्य रखते हैं।
मत्ती 8:17
“ताकि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो: ‘उसने आप हमारी कमजोरियों को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।'”
यशायाह 53:5
“परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएँ।”
स्पष्टीकरण: गीत के भाव इन वचनों से पूरी तरह मेल खाते हैं। यीशु मसीह ने क्रूस पर केवल हमारे पापों का ही नहीं, बल्कि हमारी बीमारियों का भी दाम चुका दिया है। जब कोई रोगी सच्चे मन से कहता है कि “मैं यीशु का पल्ला नहीं छोड़ूँगा”, तो वह यीशु के कोड़े खाने की सामर्थ्य पर विश्वास प्रकट करता है और अद्भुत चंगाई को प्राप्त करता है।
3. परीक्षाओं और संकट के समय दृढ़ता
जब हम मसीह के मार्ग पर चलते हैं, तो सताव, निंदा और दुःख आना स्वाभाविक है। यह गीत हमें सिखाता है कि परीक्षाओं के समय पीछे हटने के बजाय मसीह में और अधिक दृढ़ हो जाना चाहिए।
रोमियो 8:35
“कौन हमको मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नग्नता, या जोखिम, या तलवार?”
स्पष्टीकरण: संत पौलुस का यह वचन इस गीत के दृढ़ निश्चय को दर्शाता है। संसार की कोई भी ताकत, कोई भी दुःख या संकट हमें मसीह के पल्ले से अलग नहीं कर सकता। यीशु का पल्ला थामने का अर्थ है कि हमने अपने जीवन की नाव उनके हाथों में सौंप दी है, जो हमें हर तूफ़ान से सुरक्षित पार लगाएगी।
4. अंत तक वफ़ादार रहना और अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा
यीशु मसीह का साथ अंत तक निभाना ही एक सच्चे मसीही का लक्ष्य है। जो अंत तक धीरज धरेगा और मसीह को थामे रहेगा, वही जीवन का मुकुट पाएगा।
प्रकाशितवाक्य 2:10
“जो दुःख तुझ को झेलने होंगे, उनसे मत डर… प्राण देने तक विश्वासी रह, तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूँगा।”
भजन संहिता 23:4
“चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूँ, तो भी हानि से न डरूँगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।”
स्पष्टीकरण: यह गीत हमें अनन्त जीवन की ओर अग्रसर करता है। घोर अंधकार और मृत्यु की वादी में भी यीशु की उपस्थिति हमारे साथ रहती है। जब हम उनका पल्ला थामे रखते हैं, तो उनकी लाठी और सोंटा (उनका वचन और पवित्र आत्मा) हमारी रक्षा करते हैं।
निष्कर्ष
यह गीत हर एक विश्वासी को आत्मिक रूप से मजबूत करता है। यह हमें सिखाता है कि मसीह यीशु में हमारा विश्वास केवल अच्छे दिनों के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर होना चाहिए। यदि हम पवित्रशास्त्र के इन वचनों के अनुसार प्रभु यीशु मसीह पर अपना विश्वास दृढ़ रखेंगे और उनका पल्ला थामे रहेंगे, तो हम इस संसार में जय से भी बढ़कर जय पाने वाले बनेंगे।
