तेरा येशु नाम लै के | Lyrics song
तेरा येसू नाम लै के दिल न सकून मिलदा ए-2
तेरियां गल्लां सुण के दिल न सकून मिलदा ए-2
चिंन्ता जेही मुक्क जांदी ए तेरे घर आ के येसु
मेरा जीवन बदल गया ए तैनू पा के येसु
हां डिग्ग के वी उठण दा जनून मिलदा ए
1. गल्लां तेरियां ए येसु सच्चीया ते सूच्चीया
शहद नालो मिट्ठीया ते दुध नालों चिट्टीया -2
जो मंगदा तेरे कोलो ओहनू जरुर मिलदा ए-2
तेरा येसु नाम लै के….
2. कदमां च तेरे येसु मिलदा आराम ए
सब नाल प्यार करों तेरा ए पैगाम ए -2
हां मैंनू वी तेरे नां तो सरुर मिलदा ए-2
तेरा येसु नाम लै के…
भजन का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल वचन
यह भजन प्रभु यीशु मसीह के नाम की सामर्थ्य, उनके वचनों की मधुरता और उनकी संगति से मिलने वाली असीम शांति का एक सुंदर वर्णन है। यह गीत एक विश्वासी के जीवन में आने वाले बदलाव और परमेश्वर के प्रेम को दर्शाता है।
नीचे इस भजन के मुख्य भागों का आध्यात्मिक स्पष्टीकरण और उससे संबंधित बाइबल के वचन दिए गए हैं:
1. यीशु के नाम और उपस्थिति में मिलने वाला सुकून
भजन की शुरुआत कहती है कि यीशु का नाम लेने से और उनके घर (संगति) में आने से सारी चिंताएं समाप्त हो जाती हैं और दिल को आत्मिक सुकून मिलता है। जब कोई इंसान टूट जाता है, तो यीशु का नाम उसे फिर से उठने का हौसला (जुनून) देता है।
बाइबल इस बात की पुष्टि करती है कि सच्ची शांति केवल यीशु में है:
मत्ती 11:28 — “हे सब परिश्रम करने वालो और बोझ से दबे लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।”
फिनिप्पियों 4:6-7 — “किसी भी बात की चिन्ता न करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विन्ती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।”
2. यीशु के वचनों की सच्चाई और शुद्धता
भजन के पहले अंतरे में यीशु की बातों को “सच्ची, सुच्ची (पवित्र), शहद से मीठी और दूध से चिट्ठी (सफेद/शुद्ध)” कहा गया है। परमेश्वर का वचन आत्मा को तृप्त करता है और इंसान की हर जरूरत को पूरा करता है।
पवित्र शास्त्र में परमेश्वर के वचनों की तुलना शहद और शुद्धता से इस प्रकार की गई है:
भजन संहिता 119:103 — “तेरे वचन मेरे चखने में क्या ही मीठे हैं, वे मेरे मुंह में शहद से भी बढ़कर मीठे हैं!”
भजन संहिता 12:6 — “यहोवा के वचन शुद्ध हैं; उस चांदी के समान जो भट्ठी में मिट्टी पर ताई गई और सात बार निर्मल की गई हो।”
मत्ती 7:7 — “मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ो, तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा।”
3. प्रभु के चरणों में आराम और प्रेम का पैगाम
भजन के दूसरे अंतरे में बताया गया है कि यीशु के चरणों में आने से जीवन को आराम मिलता है। उनका सबसे बड़ा पैगाम (संदेश) यह है कि हम एक-दूसरे से प्रेम करें। यही प्रेम मसीही जीवन का आधार है और इसी नाम से जीवन में एक आत्मिक आनंद (सरूर) मिलता है।
आपसी प्रेम और यीशु के पैगाम को लेकर बाइबल का सबसे बड़ा आदेश यह है:
यूहन्ना 13:34 — “मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो; जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।”
1 यूहन्ना 4:19 — “हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहले उसने हमसे प्रेम किया।”
यूहन्ना 14:27 — “मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता। तुम्हारा मन व्याकुल न हो और न डरे।”
निष्कर्ष:
यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि बाइबल की जीवित सच्चाइयों का निचोड़ है। जो कोई भी सच्चे मन से यीशु मसीह के पास आता है, उसे अपनी चिंताओं से मुक्ति मिलती है, गिरने के बाद दोबारा खड़े होने का बल मिलता है, और उसका जीवन हमेशा के लिए बदल जाता है।
