यहोवा मैं पुकारदा हां Lyrics song
Yahowa Main Pukarda Haan Lyrics
यहोवा मैं पुकारदा हां, मेरे वल तू छेती आ
यहोवा मैं पुकारदा हां मसीहा मैं पुकारदा हां
यहोवा मैं पुकारदा हां……
1. जदों पुकारां मैं तैनू खुदाया, सुनलै मेरी गल कन ला
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां……
2. मेरे होंठा दी कर रखवाली, मुंह उत्ते निगाहबान बिठा
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां……
3. मेरी दुआ हुण तेरे हजूर विच्च, पहुंचे वांग बखुर दे जा
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां……
4. जिवे कुर्बानी शम्मां दी होवे, हत्थ चुक तैत्थों मंगा दुआ
मेरे वल्ल तू छेती आ, यहोवा मैं पुकारदा हां……
गीत का आत्मिक सारांश (Summary)
यह गीत एक विश्वासी के हृदय की व्याकुलता और परमेश्वर के प्रति उसकी गहरी निर्भरता को प्रकट करता है। जब मनुष्य चारों तरफ से परीक्षाओं या मुश्किलों से घिर जाता है, तो वह अपने उद्धारकर्ता को पुकारता है।
- तुरंत सहायता की गुहार: गीत का मुख्य भाग “मेरे वल तू छेती आ” यह दर्शाता है कि एक मसीही जीवन में जब भी संकट आता है, तो हमारा पहला कदम किसी मनुष्य की ओर देखना नहीं, बल्कि अपने जीवित परमेश्वर यहोवा को दुहाई देना है।
- वाणी का संयम और पवित्रता: जब इंसान दुःख में होता है, तो अक्सर उसके मुंह से गलत शब्द निकल जाते हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि हम परमेश्वर से अपने होंठों की रखवाली मांगें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी हमारे मुंह से कोई पाप न हो।
- प्रार्थना का आत्मिक मूल्य: सच्चा मसीही जीवन प्रार्थना का जीवन है। हमारी प्रार्थनाएं परमेश्वर के भवन में जलने वाले पवित्र लोबान (बखुर) और ढलते दिन की भेंट (शाम की कुर्बानी) के समान हैं, जो परमेश्वर को बेहद प्रिय हैं।
गीत से जुड़े बाइबल के मुख्य वचन और स्पष्टीकरण
यह पूरा गीत मुख्य रूप से भजन संहिता 141 (Psalm 141) की आयतों पर आधारित है। यहाँ पवित्र शास्त्र के पूरे वचन और उनका स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. यहोवा को पुकारना और तुरंत सहायता की याचना
भजन संहिता 141:1 — “हे यहोवा, मैंने तुझे पुकारा है; मेरे पास फुर्ती से आ! जब मैं तुझे पुकारूँ, तब मेरी ओर कान लगा!”
- स्पष्टीकरण: गीत का मुखड़ा और पहला अंतरा सीधे तौर पर इसी वचन से लिया गया है। दाऊद प्रार्थना करता है कि “यहोवा मैं पुकारदा हां, मेरे वल तू छेती आ।” यह वचन हमें सिखाता है कि परमेश्वर हमारी पुकार सुनने के लिए हमेशा तैयार रहता है। जब हम सच्चे दिल से और कन लगाकर (ध्यान से) सुनने की प्रार्थना करते हैं, तो वह हमारी ओर अपना कान लगाता है।
2. वाणी की रखवाली और होंठों पर पहरा
भजन संहिता 141:3 — “हे यहोवा, मेरे मुंह का पहरा बैठाल; मेरे होंठों के द्वार की रखवाली कर!”
- स्पष्टीकरण: गीत का दूसरा अंतरा कहता है, “मेरे होंठा दी कर रखवाली, मुंह उत्ते निगाहबान बिठा।” बाइबल बताती है कि जीभ में जीवन और मृत्यु दोनों की सामर्थ्य है। परीक्षाओं के समय अपने मुंह को बड़बड़ाने या न्याय करने से बचाने के लिए हमें परमेश्वर से एक ‘निगाहबान’ (पहरेदार) नियुक्त करने की विनती करनी चाहिए, ताकि हमारे शब्दों से परमेश्वर का नाम महिमा पाए।
3. धूप (सुगंध) के समान प्रार्थना का पहुँचना
भजन संहिता 141:2 (भाग 1) — “मेरी प्रार्थना तेरे सम्मुख सुगन्धित धूप ठहरे…”
- स्पष्टीकरण: गीत का तीसरा अंतरा कहता है, “मेरी दुआ हुण तेरे हजूर विच्च, पहुंचे वांग बखुर दे जा।” पुराने नियम के मंदिर में ‘बखुर’ यानी पवित्र सुगंधित धूप प्रतिदिन जलाई जाती थी, जिसकी खुशबू ऊपर उठती थी। नए नियम में, हमारे दिलों से निकलने वाली सच्ची प्रार्थनाएं ही वह सुगंधित धूप हैं जो सीधे परमेश्वर के सिंहासन तक पहुँचती हैं और उसे प्रसन्न करती हैं।
4. सांझ की वेदी की भेंट और हाथ उठाना
भजन संहिता 141:2 (भाग 2) — “…और मेरा हाथ उठाना संध्याकाल का अन्नबलि ठहरे।”
- स्पष्टीकरण: गीत का चौथा अंतरा कहता है, “जिवे कुर्बानी शम्मां दी होवे, हत्थ चुक तैत्थों मंगा दुआ।” इस्राएल के इतिहास में हर शाम को (शम्मां दी कुर्बानी) परमेश्वर के लिए एक विशेष होम-बलि चढ़ाई जाती थी। यह वचन स्पष्ट करता है कि जब एक विश्वासी प्रार्थना में अपने हाथ उठाता है, तो उसका यह समर्पण परमेश्वर की दृष्टि में संध्याकाल की उस पवित्र वेदी की भेंट की तरह ग्रहणयोग्य होता है।
5. प्रार्थना के विषय में नया नियम (पूरक वचन)
प्रकाशितवाक्य 8:4 — “और उस धूप का धुआं पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं सहित दूत के हाथ से परमेश्वर के साम्हने उठ गया।”
- स्पष्टीकरण: भजन संहिता के साथ-साथ यह वचन गीत के तीसरे अंतरे (वांग बखुर) को और भी गहराई से स्पष्ट करता है। स्वर्ग में हमारी प्रार्थनाओं को पवित्र धूप की तरह परमेश्वर के सामने पेश किया जाता है, जो यह साबित करता है कि हमारी हर एक दुआ खुदावंद के लिए कितनी अनमोल है।
निष्कर्ष: यह ज़बूर हमें एक सच्चे प्रार्थना योद्धा का जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम संकट में हों, तो धीरज न खोएं, बल्कि अपने मुंह की पवित्रता को बनाए रखते हुए, अपने हाथ उठाकर खुदावंद के सामने अपनी दुआ पेश करें, क्योंकि वह हमारी पुकार सुनकर बहुत जल्द हमारी सहायता के लिए आता है।
