तेरा राई दे दाने जेहा विश्वास Lyrics song
तेरा राई दे दाने जेहा विश्वास, वड्डे-वड्डेया
पहाड़ा नू हटा देवेगा-2
तेरा राई दे दाने जेहा विश्वास….
1. दाऊद वांगू रब्ब नाल, जे मित्त तेरी होवेगी
जंग दे मैदान विच्च, जित तेरी होवेगी-2
तेरे वैरीयां दा करेगा ओह नाश, गोलियथ
जे तुफाना च हरा देवेगा ….
2.दे के मौत ते बिमारियां नू, हार लंग जांदे ने
चीर के समुद्रा नू, पार लंग जांदे ने-2
तेरा छड्डे ना यहोवा कदे साथ, तैनू जंगलां
च रस्ते दिखा देवेगा ….
3. दुखा ते मुसीबता च, डोल ना ए जावी तू
नासरी चट्टान घर, ओहदे ते बणावी तू-2
घर होण नदियों देवेगा ओह नाश, वड्डे हत्त्थ
नाल तैनू ओह बचा लवेगा ….
गीत का मुख्य संदेश, बाइबल वचन और स्पष्टीकरण
यह गीत मुख्य रूप से अटूट विश्वास, परमेश्वर के साथ संगति (मित्त), संकटों में सुरक्षा और मसीह रूपी चट्टान पर जीवन का घर बनाने के सिद्धांतों पर आधारित है।
1. राई के दाने के समान विश्वास और पहाड़ों का हटना
गीत की मुख्य टेक प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार के वचनों पर आधारित है। राई का दाना बहुत छोटा होता है, लेकिन उसमें एक विशाल पेड़ बनने की क्षमता होती है। इसी प्रकार, मसीह पर किया गया थोड़ा सा भी सच्चा विश्वास हमारे जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं (पहाड़ों) को उखाड़ फेंकता है।
मत्ती 17:20 “यीशु ने उनसे कहा, ‘अपने अविश्वास के कारण; क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूँ, यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, यहाँ से सरककर वहाँ चला जा, तो वह चला जाएगा; और तुम्हारे लिये कुछ भी असम्भव न होगा।'”
मरकुस 11:23 “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जो कोई इस पहाड़ से कहे, ‘तू उखड़ जा और समुद्र में जा पड़’, और अपने मन में सन्देह न करे, वरन विश्वास करे कि जो कहता हूँ वह हो जाएगा, तो उसके लिये वही होगा।”
वचन का स्पष्टीकरण: हमारे जीवन में पहाड़ का अर्थ है—ऐसी बीमारियां, कर्ज या समस्याएं जो इंसानी ताकत से हल नहीं हो सकतीं। जब हमारा विश्वास दृढ़ होता है, तो परमेश्वर की सामर्थ्य काम करती है और वो असंभव पहाड़ जैसी मुसीबतें हमारे रास्ते से हट जाती हैं।
2. दाऊद जैसी मित्रता और गोलियथ रूपी शत्रुओं पर विजय
पहले अंतरे में राजा दाऊद के जीवन का उदाहरण दिया गया है। दाऊद का परमेश्वर यहोवा के साथ गहरा रिश्ता (मित्त) था, जिसके कारण उसने एक साधारण चरवाहा होते हुए भी एक विशाल योद्धा ‘गोलियथ’ को धूल चटा दी।
1 शमूएल 17:45 “दाऊद ने पलिश्ती से कहा, ‘तू तो तलवार और भाला और सांग लिए हुए मेरे पास आता है; परन्तु मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से तेरे पास आता हूँ, जो इस्राएली सेना का परमेश्वर है, और जिसका तू ने तिरस्कार किया है।'”
1 शमूएल 17:47 “और यह समस्त मण्डली जान लेगी कि यहोवा तलवार या भाले के द्वारा जयवन्त नहीं करता, इसलिये कि संग्राम तो यहोवा का है, और वही तुम्हें हमारे हाथ में कर देगा।'”
वचन का स्पष्टीकरण: जब हमारी मित्रता परमेश्वर से होती है, तो युद्ध हमारा नहीं बल्कि परमेश्वर का हो जाता है। हमारे जीवन में आने वाले बड़े से बड़े शैतानी तूफान और गोलियथ जैसे भयानक संकटों को प्रभु यीशु मसीह अपने नाम की सामर्थ्य से पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।
3. समुद्र का दो भाग होना और जंगलों में मार्ग मिलना
दूसरे अंतरे में मूसा और इस्राएलियों के मिस्र से निकलने की ऐतिहासिक घटना का वर्णन है, जहाँ परमेश्वर ने लाल समुद्र को दो भाग कर दिया था। यह वचन दर्शाता है कि मौत और बीमारियां भी विश्वास के सामने हार मान लेती हैं और यहोवा जंगलों (निर्जन स्थानों) में भी रास्ता बना देता है।
निर्गमन 14:21-22 “जब मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया, तब यहोवा ने रात भर प्रचण्ड पुरवाई चलाकर समुद्र को पीछे हटाया, और उसे सूखी भूमि बना दिया; और जल दो भाग हो गया। और इस्राएली समुद्र के बीच सूखी भूमि पर होकर चले, और जल उनकी दाहिनी और बाईं ओर दीवार का काम देता था।”
यशायाह 43:19 “देखो, मैं एक नई बात करता हूँ; वह अभी प्रगट होगी, क्या तुम उससे अनजान रहोगे? मैं जंगल में एक मार्ग बनाऊँगा और मरुभूमि में नदियाँ बहाऊँगा।”
वचन का स्पष्टीकरण: जब जीवन में आगे कोई रास्ता दिखाई नहीं देता और पीछे से मुसीबतें घेर लेती हैं, तब परमेश्वर अपने लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ता। वह असंभव परिस्थितियों में भी (समुद्र चीरकर या जंगल के बीच) सुरक्षा का मार्ग निकाल देता है।
4. नासरी चट्टान (यीशु) पर घर बनाना और दुखों में स्थिरता
तीसरे अंतरे में विश्वासियों को दुखों और मुसीबतों में विचलित (डोलना) न होने की चेतावनी दी गई है। बुद्धिमान मनुष्य वह है जो अपना आत्मिक घर ‘नासरी चट्टान’ यानी प्रभु यीशु मसीह पर बनाता है, जिसे नदियां या बाढ़ (संसार की विपत्तियां) कभी नष्ट नहीं कर सकतीं।
मत्ती 7:24-25 “इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन्हें मानता है, वह उस बुद्धिमान मनुष्य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आँधियाँ चलीं, और उस घर पर टकराईं; तौभी वह नहीं गिरा, क्योंकि उसकी नींव चट्टान पर डाली गई थी।”
1 कुरिन्थियों 10:4 “और सब ने एक ही आत्मिक जल पिया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे जो उनके साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था।”
भजन संहिता 91:14-15 “उसने जो मुझसे स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊँगा; मैं उसको ऊँचे स्थान पर रखूँगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है। जब वह मुझे पुकारे, तब मैं उसकी सुनूँगा; संकट में मैं उसके संग रहूँगा, मैं उसको छुड़ाकर उसकी महिमा बढ़ाऊँगा।”
वचन का स्पष्टीकरण: संसार में मसीह यीशु ही हमारी एकमात्र अडिग चट्टान हैं। यदि हमारा विश्वास उन पर मजबूत है, तो चाहे कितनी भी बड़ी परीक्षाओं और दुखों की नदियां हमारे जीवन से क्यों न टकराएं, हम कभी आत्मिक रूप से नष्ट नहीं होंगे। परमेश्वर अपने सामर्थी हाथ (‘वड्डे हत्थ’) को बढ़ाकर हमें हर विपत्ति से सुरक्षित बचा लेगा।
निष्कर्ष (Post Summary)
यह गीत हर एक मसीह भाई-बहन को अपने विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है। विश्वास की शक्ति इस बात पर निर्भर नहीं करती कि हम कितने शक्तिशाली हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि हमारा परमेश्वर कितना महान है। जब हम यीशु (नासरी चट्टान) पर भरोसा रखते हैं, तो वह हमारी जंग जीतता है, गोलियथ को हराता है, समुद्रों में राहें निकालता है और पहाड़ों को हटा देता है। अपने विश्वास को राई के दाने के समान शुद्ध और जीवित बनाए रखें!



