दुःखां दे वेले Lyrics song
दुःखां दे वेले तेरी यहोवा सुणे दुआ
इज्जत तेरी वधावेगा, याकूब दा खुदा
दुःखां दे वेले…….
1. कुर्बानी तेरी सारी करे, आप ओह कबूल
फिर नज़ां तेरीयां नू, ओह याद करेगा
दुःखां दे वेले……..
2. गावांगे गीत या रब्बा, तेरी नज़ात दे
झण्डा करांगे उच्चा, आपणे खुदावंद दा
दुःखां दे वेले…….
3. बख्शेगा तैनूं सब जो तेरे, दिल दी है मुराद
पूरा करेगा तेरा, ओह मतलब ज़रा ज़रा
दुःखां दे वेले……..
भजन का मुख्य सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह गीत विश्वासियों के लिए एक महान आशीष और प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। इसका मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य चारों तरफ से दुखों और मुसीबतों से घिर जाता है, तब केवल ‘याकूब का खुदा’ (यहोवा) ही उसकी पुकार सुनने और उसे ऊंचा उठाने की सामर्थ्य रखता है। यह गीत हमें सिखाता है कि संकट के दिनों में सांसारिक सहारों पर भरोसा करने के बजाय हमें अपनी प्रार्थनाओं के साथ परमेश्वर की वेदी के सम्मुख आना चाहिए, क्योंकि वही हमारी इच्छाओं को पूरा करने वाला वफादार परमेश्वर है।
बाइबल के पवित्र वचनों के आधार पर इस गीत का विस्तृत स्पष्टीकरण निम्नलिखित है:
1. संकट के समय प्रार्थना की सुनवाई और याकूब का खुदा (मुख्य भाग)
गीत का मुख्य भाग विश्वासी को ढाढस बंधाता है कि दुखों के समय यहोवा हमारी दुआओं को अनसुना नहीं करता, बल्कि हमें सुरक्षा देकर हमारी इज्जत बढ़ाता है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“संकट के दिन यहोवा तेरी सुन ले! याकूब के परमेश्वर का नाम तुझे ऊंचे स्थान पर सुरक्षित रखे!” (भजन संहिता 20:1)
- बाइबल का पवित्र वचन:“जब वह मुझे पुकारे, तब मैं उसकी सुनूँगा; संकट में मैं उसके संग रहूँगा, मैं उसको छुड़ाकर उसकी महिमा बढ़ाऊँगा।” (भजन संहिता 91:15)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: बाइबल में परमेश्वर को ‘याकूब का खुदा’ इसलिए कहा गया है क्योंकि याकूब के जीवन में जब भी भारी संकट और डर का समय आया, परमेश्वर ने उसकी सुधि ली और उसे संभाला। ‘इज्जत वधावेगा’ का अर्थ है कि जब संसार हमें नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तब यहोवा हमें संकट से निकालकर ऊंचे स्थान पर खड़ा करता है और आदर देता है।
2. भेंट और कुर्बानियों की स्वीकार्यता (अंतरा 1)
यह भाग इस बात को रेखांकित करता है कि जब हम सच्चे हृदय और समर्पण के साथ परमेश्वर के सामने आते हैं, तो वह हमारी भेंटों और मन की इच्छाओं (नज़ों) को याद रखता है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“वह तेरे सब अन्नबलियों को स्मरण करे, और तेरे होमबलियों को ग्रहण करे!” (भजन संहिता 20:3)
- बाइबल का पवित्र वचन:“इसलिये हे भाइयो, मैं तुमसे परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर बिनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।” (रोमियों 12:1)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: पुराने नियम में लोग होमबलि और कुर्बानियां चढ़ाते थे। नए नियम में हमारे टूटे हुए मन की प्रार्थनाएं, हमारा समय और हमारा संपूर्ण जीवन ही हमारी आत्मिक कुर्बानी है। जब हम दुखों में भी परमेश्वर की संगति नहीं छोड़ते, तो वह हमारी ‘कुर्बानी’ को कबूल करता है और हमारी मन्नतों को याद रखकर उनका उत्तर देता है।
3. उद्धार का आनंद और जयजयकार का झंडा (अंतरा 2)
यहाँ विश्वासी संकटों के बीच भी परमेश्वर द्वारा मिलने वाले उद्धार (नज़ात) की खुशी में विजय के गीत गाने और उसका झंडा ऊंचा करने का संकल्प लेता है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“तब हम तेरे उद्धार के कारण ऊंचे स्वर से गाएँगे, और अपने परमेश्वर के नाम से अपने झण्डे खड़े करेंगे। यहोवा तेरी सब बिनतियों को पूरा करे!” (भजन संहिता 20:5)
- बाइबल का पवित्र वचन:“परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हमें जय के उत्सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान की सुगन्धि हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।” (2 कुरुन्थियों 2:14)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: ‘नज़ात’ का अर्थ होता है मुक्ति या उद्धार। जब परमेश्वर हमें दुखों से छुड़ाता है, तो हमारा रोना आनंद के गीतों में बदल जाता है। ‘झंडा उच्चा करना’ विजय का प्रतीक है। एक विश्वासी का झंडा उसका खुदावंद है, और उसकी गवाही देकर हम मसीह की जीत का परचम संसार के सामने ऊंचा करते हैं।
4. दिल की मुराद और हर एक मनोरथ का पूरा होना (अंतरा 3)
गीत का अंतिम भाग परमेश्वर की उस उदारता और प्रतिज्ञा को दिखाता है जिसके तहत वह अपने बच्चों के दिल की हर एक जायज मुराद और योजना (मतलब) को पूरी तरह से सफल करता है।
- बाइबल का पवित्र वचन:“वह तेरे मन की इच्छा को पूरी करे, और तेरी सारी युक्ति को सफल करे!” (भजन संहिता 20:4)
- बाइबल का पवित्र वचन:“यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। अपने मार्ग का बोझ यहोवा पर डाल और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।” (भजन संहिता 37:4-5)
- आत्मिक स्पष्टीकरण: हमारा परमेश्वर हमारी इच्छाओं को आधा-अधूरा नहीं, बल्कि ‘ज़रा ज़रा’ यानी पूरी बारीकी से मुकम्मल करता है। जब हमारा उठना-बैठना और सोचना परमेश्वर की मर्जी के अनुसार होता है, तो वह हमारे दिल की गुप्त इच्छाओं (मुरादों) को जानता है और अपने सर्वोत्तम समय पर उन्हें पूरा करके हमें आशीषों से तृप्त करता है।
निष्कर्ष: यह ज़बूर/गीत संकट के दौर से गुजर रहे हर एक मसीही के लिए एक महान दिलासा है। यह हमें याद दिलाता है कि दुख का समय हमेशा रहने वाला नहीं है, क्योंकि याकूब का खुदा हमारी दुआ सुन रहा है। यह पोस्ट पढ़ने वाले हर एक व्यक्ति को यह विश्वास दिलाती है कि जब वे अपनी परीक्षाओं में धीरज धरकर प्रभु को पुकारेंगे, तो उनका रोना आनंद के गीतों में बदल जाएगा और परमेश्वर उनके जीवन में अपनी बड़ी विजय को प्रगट करेगा।
