दुआवां मेरी सुणदा ऐ मेरा रब्ब सोहना | Lyrics song
दुआवां मेरी सुनदा ए मेरा रब्ब सोहणा ना
ओहदे जेहां कोई ए ना कोई होणा
दुआवां मेरी सुनदा….
1. मैं देवां की मिसाल ओहदी
ओह बड़ा बेमिसाल ए
जो वी हां मैं अज्ज सारा येसु दा कमाल ए
मैं ओहदे नालों वध के कदी किसे नू नहीं चोहणा
ना ओहदे जेहां कोई ए ना कोई होणा दुआवां मेरी सुनदा….
2. जो होवें मैंथो भुल कोई ओह कर देंदा माफ़ ए
लहू ओहदा धो के मैंनु कर देंदा साफ़ ए
है दर ओहदे तो पाया मैं मंगेया वी जो नां
ना ओहदे जेहां कोई ए ना कोई होणा दुआवां मेरी सुनदा….
3. जीवागां सदा तेरे लई गावांगा तेरे नां च
करांगा मैं मुनादी तेरी दुनियां जहां च
मैं प्यार मसीहा दा कदी नहीं भूलोणा
ना ओहदे जेहां कोई ए ना कोई होणा दुआवां मेरी सुनदा….
गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल वचन
यह गीत परमेश्वर (येसु मसीह) की असीम करुणा, उनकी प्रार्थना सुनने की शक्ति, उनके क्षमाशील स्वभाव और उनके प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। यह एक आस्तिक के दिल की पुकार है जो अपने जीवन की हर सफलता और आशीष का श्रेय केवल यीशु मसीह को देता है।
नीचे इस गीत के मुख्य भागों का सारांश और उनसे जुड़े बाइबल के प्रामाणिक वचन दिए गए हैं:
1. प्रार्थना सुनने वाला और बेमिसाल परमेश्वर
गीत की शुरुआत इस विश्वास के साथ होती है कि हमारा रब्ब (परमेश्वर) बहुत सुंदर और भला है, जो हमारी हर दुआ को सुनता है। उसके जैसा ब्रह्मांड में कोई दूसरा नहीं है। हमारा आज का अस्तित्व पूरी तरह से यीशु का ही कमाल (अनुग्रह) है।
- भजन संहिता 65:2 — “हे प्रार्थना के सुनने वाले, सब प्राणी तेरे ही पास आएंगे।”
- भजन संहिता 86:8 — “हे प्रभु, देवताओं में तेरे समान कोई नहीं, और तेरे कामों के तुल्य कोई काम नहीं।”
- 1 कुरिन्थियों 15:10 — “परन्तु मैं जो कुछ भी हूँ, परमेश्वर के अनुग्रह से हूँ; और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं गया।”
2. पापों की क्षमा और लहू की सामर्थ्य
गीत का दूसरा भाग परमेश्वर के क्षमाशील स्वभाव को प्रकट करता है। इंसान से अक्सर गलतियाँ (भूल) हो जाती हैं, लेकिन यीशु मसीह अपने पवित्र लहू से धोकर हमें शुद्ध कर देते हैं। वह हमें हमारी मांग और सोच से भी बढ़कर आशीषें देते हैं।
- 1 यूहन्ना 1:7 — “परन्तु यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो हमारी एक दूसरे से सहभागिता है; और उसके पुत्र यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है।”
- 1 यूहन्ना 1:9 — “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।”
- इफिसियों 3:20 — “अब जो ऐसा सामर्थी है कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है।”
3. मसीह के लिए जीने और सुसमाचार प्रचार का संकल्प
गीत के अंतिम भाग में एक आस्तिक का दृढ़ संकल्प दिखाई देता है। वह कहता है कि वह जीवन भर केवल यीशु के लिए जिएगा, उसके नाम की महिमा के गीत गाएगा और पूरी दुनिया में उसकी ‘मुनादी’ (सुसमाचार का प्रचार) करेगा। वह मसीह के प्रेम को कभी न भूलने की प्रतिज्ञा करता है।
- फिलिप्पियों 1:21 — “क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।”
- मरकुस 16:15 — “और उसने उनसे कहा, ‘तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।'”
- रोमियो 8:39 — “और न ऊंचाई, न गहराई, और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के उस प्रेम से जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।”
- भजन संहिता 104:33 — “मैं जीवन भर यहोवा का गीत गाता रहूंगा; जब तक मैं बना रहूंगा, तब तक अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा।”
निष्कर्ष
यह गीत केवल एक भजन नहीं, बल्कि एक मसीही जीवन का पूरा सार है। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम प्रार्थना करते हैं, तो परमेश्वर सुनता है; जब हम गिरते हैं, तो उसका लहू हमें उठाता है; और जब हम उसकी आशीषों को देखते हैं, तो हमारा जीवन उसकी गवाही और प्रचार के लिए समर्पित हो जाना चाहिए। प्रभु यीशु मसीह का प्रेम अतुलनीय और शाश्वत है।
