दस तार वाले बाजे नाल Lyrics song
वीणा सारंगी असी, ओस लई बजावांगे
हर रोज़ गीत नवा, येसू जी लई गावांगे
येसू नासरी नू असी प्यार, पूरे दिल नाल करांगे
दस तार वाले बाजे नाल, ओहदी महिमा करांगे
वीणा सारंगी असी ……..
1. रूह दी प्यास नाल, असी तेरे कोल आवांगे
येसू कोलो येसू जी दे, आत्मा नू पावांगे
भावे है डरौंदा शैतान, असी कदी ना डरांगे
दस तार वाले बाजे नाल ……..
2. आत्मा दे सारे हथियार, इकट्ठे करांगे
वैरी शैतान दा वी, सामना करांगे
पाक रूह दी लै के तलवार, जंग अपनी लड़ांगे
दस तार वाले बाजे नाल ……..
3. येसू मेरा जिंदा ते, शैतान शर्मिंदा है
हत्थ लैंदा फड़ कदे, डिगण ना देंदा है
येसू दा इलाही कलाम, नित्त रूह नाल पढ़ांगे
दस तार वाले बाजे नाल.
4. दुनियां ते जा के असी, रूहा नू बचौंना है
येसू नासरी दा, प्रचार फैलौना है
झूठ दी नी साडे नाल सांझ, गल्ल सच्च दी करागें
दस तार वाले बाजे नाल…
गीत का मुख्य सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण
यह गीत एक आविश्वासी या विश्वासी के हृदय की उस गहरी इच्छा को दर्शाता है जहाँ वह अपने पूरे प्राण, बुद्धि और सामर्थ्य से प्रभु यीशु मसीह की महिमा करना चाहता है। इस गीत के चार मुख्य भाग हैं: स्तुति और आराधना, आत्मिक युद्ध, मसीह में सुरक्षा, और सुसमाचार का प्रचार।
1. वाद्ययंत्रों के साथ पूरे दिल से परमेश्वर की स्तुति (स्थाई)
गीत की शुरुआत ही वाद्ययंत्रों (वीणा, सारंगी, दस तार वाला बाजा) के साथ यीशु नासरी से पूरे दिल से प्यार करने और उसकी महिमा करने के संकल्प से होती है। बाइबल हमें सिखाती है कि परमेश्वर अपने लोगों की स्तुति में वास करता है और हमें नए गीतों से उसकी महिमा करनी चाहिए।
- भजन संहिता 33:2-3“वीणा बजाकर यहोवा का धन्यवाद करो, दस तार वाली सारंगी बजाकर उसका भजन गाओ! उसके लिये एक नया गीत गाओ, आनन्द के जयजयकार के साथ निपुणता से बजाओ!”
- भजन संहिता 150:3-4“तुरही फूंकते हुए उसकी स्तुति करो; सारंगी और वीणा बजाते हुए उसकी स्तुति करो! डफ बजाते और नाचते हुए उसकी स्तुति करो; तार वाले बाजों और बांसुरी बजाते हुए उसकी स्तुति करो!”
2. पवित्र आत्मा की प्यास और निर्भयता (अंतरा 1)
गीत का पहला पद आत्मा की प्यास और शैतान के डर पर विजय पाने की बात करता है। जब एक विश्वासी पवित्र आत्मा से भर जाता है, तो संसार का कोई भी डर या शैतान की चालें उसे डरा नहीं सकतीं।
- यूहन्ना 7:37-38“परमेश्वर के उत्सव के अन्तिम और मुख्य दिन यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, ‘यदि कोई प्यासा हो, तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है, उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी।'”
- 2 तीमुथियुस 1:7“क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं, पर सामर्थ्य, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।”
3. आत्मा के हथियार और आत्मिक युद्ध (अंतरा 2)
दूसरे पद में विश्वासी को आत्मिक युद्ध के लिए तैयार होने का आह्वान किया गया है। हमारा युद्ध मांस और लोहू से नहीं, बल्कि आत्मिक दुष्टताओं से है। इसलिए हमें परमेश्वर के सारे हथियार बांधने और पवित्र आत्मा की तलवार (परमेश्वर का वचन) उठाने की आवश्यकता है।
- इफिसियों 6:11“परमेश्वर के सारे हथियार बान्ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको।”
- इफिसियों 6:13“इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार उठा लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हने कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर रह सको।”
- इफिसियों 6:17“और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार ले लो, जो परमेश्वर का वचन है।”
4. मसीह में सुरक्षा और जीवित परमेश्वर (अंतरा 3)
तीसरा पद इस बात की गवाही देता है कि हमारा प्रभु यीशु मसीह जीवित है। वह हमें कभी गिरने नहीं देता, बल्कि हमारा हाथ थामकर रखता है। शैतान मसीह के जी उठने से शर्मिंदा हो चुका है। विश्वासी नित्य परमेश्वर का वचन (इलाही कलाम) पढ़कर आत्मिक रूप से मजबूत होता है।
- प्रकाशितवाक्य 1:18“और मैं जीवित हूँ; मैं मर गया था, और देख, मैं युगानुयुग जीवता हूँ; और मृत्यु और अधोलोक की कुंजियाँ मेरे ही पास हैं।”
- भजन संहिता 37:23-24“मनुष्य के पैर यहोवा की ओर से दृढ़ होते हैं, और उसके मार्ग से वह प्रसन्न होता है। चाहे वह गिरे, तो भी पड़ा न रहेगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है।”
- भजन संहिता 119:105“तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।”
5. सुसमाचार का प्रचार और सच्चाई का जीवन (अंतरा 4)
गीत का अंतिम भाग मसीह के महान आदेश को पूरा करने पर जोर देता है। हमें दुनिया में जाकर खोई हुई रूहों (आत्माओं) को बचाना है, यीशु का प्रचार फैलाना है और झूठ का त्याग करके हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलना है।
- मरकुस 16:15“और उसने उनसे कहा, ‘तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।'”
- इफिसियों 4:25“इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम एक दूसरे के अंग हैं।”
- यूहन्ना 8:32“और तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतन्त्र करेगा।”
निष्कर्ष: यह गीत हर मसीही विश्वासी को याद दिलाता है कि हमारा जीवन केवल एक साधारण जीवन नहीं, बल्कि स्तुति, आत्मिक सजगता, वचन की गहराई और सुसमाचार की जिम्मेदारी से भरा हुआ एक विजयी जीवन है।
