Behad Yeshu Tera Pyar Lyrics

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बेहद येसु तेरा प्यार Lyrics song

बेहद येसु तेरा प्यार, 
भूलेया भूलायां जा नहीं सकदा 
मेरे ते करम, बे-शुमार, 
कदे गिनेया वी जा, नहीं सकदा 
बेहद येसु तेरा प्यार…

1. ऐसिया निभाईयां, मेरे नाल 
यारियां, लाहनता मुकाईयां 
मेरे उत्तो सरियां, ज़िन्दगी च 
येसु, जेहा यार भूलेया भूलायां 
जा, नहीं सकदा, बेहद येसु 
तेरा प्यार…

2. कीत्तियां वंफावां, बेवफईयां 
बदले, इज़्ज़ता वधाईयां 
रुसवाईयां बदले, कीत्तियां 
वफावां, हर वार भूलेया 
भूलायां जा, नहीं सकदा, बेहद 
येसु तेरा प्यार…

गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)

यह गीत प्रभु यीशु मसीह के उस असाधारण और अपार प्रेम को प्रकट करता है, जो इंसानी सोच, समझ और सीमाओं से बिल्कुल परे है। गीत का केंद्रीय विषय यह है कि यीशु का प्रेम “बेहद” (असीमित) है, जिसे एक विश्वासी अपने जीवन में अनुभव करने के बाद कभी भूल नहीं सकता। हमारे जीवन पर उसके करम और उसकी आशीषें इतनी “बे-शुमार” (अनगिनत) हैं कि संसार की कोई भी गिनती उन्हें मापने में असमर्थ है।

यह गीत मसीह की अद्भुत संगति और उनकी सच्ची संगति को रेखांकित करता है। जब मनुष्य अपने पापों, कमियों या परिस्थितियों के कारण “लाहनतों” (श्राप, निंदा या तिरस्कार) के नीचे दबा होता है, तब यीशु हमारा सच्चा मित्र बनकर उन सभी श्रापों को अपने ऊपर ले लेता है और हमें पूरी तरह आजाद करता है। सबसे गहरी आत्मिक सच्चाई इस गीत के दूसरे भाग में दिखाई देती है: जब हम मनुष्य अपने आत्मिक जीवन में कमजोर पड़ जाते हैं या “बेवफाई” कर बैठते हैं, तब भी प्रभु हमारे बदले हमेशा “वफादारी” (वंफावां) दिखाता है। वह हमारी रुसवाइयों और अपमान के बदले हमें गरिमा देता है और समाज में हमारी “इज़्ज़त” को बढ़ाता है। यह सारांश हमें सिखाता है कि मसीह का प्रेम बिना किसी शर्त के है, जो हर बार हमारी गिरावट पर अपने अनुग्रह से जय पाता है।

गीत से जुड़े बाइबल के मुख्य वचन और स्पष्टीकरण

इस गीत की आत्मिक गहराई को समझने के लिए बाइबल के इन पवित्र और अपरिवर्तित वचनों को ध्यान से पढ़ें, जहाँ मसीह के प्रेम, उसकी वफादारी, और मनुष्य को गरिमा देने का स्पष्ट प्रमाण मिलता है:

1. यीशु का बेहद और अनगिनत प्रेम (बे-शुमार करम)

गीत की मुख्य पंक्ति “बेहद येसु तेरा प्यार, भूलेया भूलायां जा नहीं सकदा, मेरे ते करम, बे-शुमार” परमेश्वर की असीम दया और करुणा को दर्शाती है।

  • भजन संहिता 103:2-4“हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, वही तो तेरे प्राण को गढ़े से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करुणा और दया का मुकुट बांधता है।”
  • भजन संहिता 139:17-18“हे परमेश्वर, मेरे लिये तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है! यदि मैं उन्हें गिनता, तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते।”
  • स्पष्टीकरण: बाइबल स्पष्ट करती है कि परमेश्वर के उपकार और हमारे लिए उसकी करुणा के विचार इतने अधिक हैं कि उन्हें उंगलियों पर गिना नहीं जा सकता। वह हमारे प्राण को नाश होने से बचाता है और दया का मुकुट पहनाता है।

2. मसीह की सच्ची मित्रता और श्रापों का अंत (लाहनता मुकाईयां)

अंतर की पंक्ति “ऐसिया निभाईयां, मेरे नाल यारियां, लाहनता मुकाईयां मेरे उत्तो सरियां” मसीह की उस महान मित्रता को दिखाती है जिसके द्वारा उसने हमारे सारे आत्मिक बंधन खत्म कर दिए।

  • यूहन्ना 15:13“इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।”
  • गलातियों 3:13“मसीह ने जो हमारे लिये शापित बना, हमें व्यवस्था के श्राप से छुड़ाया क्योंकि लिखा है, ‘जो कोई काठ पर लटकाया जाता है वह शापित है’।”
  • स्पष्टीकरण: संसार में यीशु जैसा कोई मित्र नहीं है, जिसने अपने मित्रों (मानवता) को बचाने के लिए क्रूस पर अपना लहू बहा दिया। उसने स्वयं क्रूस पर बलिदान होकर हमारे जीवन की सारी “लाहनतें” (पाप के श्राप) हमेशा के लिए मुका (खत्म) दीं।

3. हमारी बेवफाई के बदले मसीह की वफादारी (कीत्तियां वंफावां)

पंक्ति “कीत्तियां वंफावां, बेवफईयां बदले… हर वार भूलेया भूलायां जा नहीं सकदा” दर्शाती है कि मनुष्य के बदलने पर भी परमेश्वर का स्वभाव कभी नहीं बदलता।

  • 2 तीमुथियुस 2:13“यदि हम अविश्वासी भी हों, तौभी वह विश्वासी बना रहता है, क्योंकि वह अपना इन्कार नहीं कर सकता।”
  • रोमियो 5:8“परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।”
  • स्पष्टीकरण: मानव स्वभाव कई बार आत्मिक रूप से कमजोर और “बेवफा” हो जाता है, लेकिन यीशु का चरित्र अटल वफादारी का है। हमारे गुनाहों और कमियों के बावजूद वह हर बार अपनी वफादारी का हाथ बढ़ाकर हमें थाम लेता है।

4. अपमान के बदले आदर और गरिमा देना (इज़्ज़ता वधाईयां, रुसवाईयां बदले)

गीत के अंतिम भाग की पंक्ति “इज़्ज़ता वधाईयां, रुसवाईयां बदले” परमेश्वर के उस अद्भुत अनुग्रह को प्रकट करती है जहाँ वह टूटे और अपमानित लोगों को ऊँचा उठाता है।

  • यशायाह 61:7“तुम्हारी लज्जा के बदले दुगना भाग मिलेगा, और अनादर के बदले तुम अपने भाग के कारण जयजयकार करोगे; तुम अपने देश में दुगने भाग के अधिकारी होगे; और तुम्हारे लिये सदा का आनन्द बना रहेगा।”
  • 1 पतरस 2:9“परन्तु तुम एक चुना हुआ वंश, और राजपदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो।”
  • स्पष्टीकरण: जब यह संसार हमें हमारे अतीत या हमारी गलतियों की वजह से रुसवा (अपमानित) करता है, तब यीशु मसीह हमें अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाकर, अपने लहू से शुद्ध करके हमें “राजपदधारी याजक” और अपनी “निज प्रजा” होने का आदर प्रदान करता है।

Behad Yeshu Tera Pyar Lyrics in hindi

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