अज्ज सूली उत्ते इब्ने खुदा देख के Lyrics song
करां दर्द मसीह दा ब्यान किवे, हद होवे ते हद दी, गल्ल करा
मेरे वास्ते शकलो बेशक़ल होया,
ता जो विगड़े हालात नू वल्ल करां
जिंद वेच के मिले जे प्यार ओहदा,
ते सौदा नफे दा देर ना पल करां
मेरे उछले नैणा दे दरिया देख के
अज्ज सूली उत्ते इब्ने खुदा देख के
1. मेरे हिस्से दी ओह मौत मर गया मेरे लई,
ओहदे जिस्म तो मास झड गया मेरे लई
ओहनू हुंदा शर्मिंदा बे वजह देख के,
मेरे उछले नैणा दे…….
जो कुझ तू कीत्ता मेरे लई, किवे लफ्ज़ां विच्च ब्यान करां
ऐ जिस्म अमानत येसु दी, मै येसु तो कुरबान करां
2. ओहदे ज़ख्मी बदन विच्चो लहू चो रेहा ए,
मैली चादर दे वांगू साडे पाप धो रेहा ए
मेरे पापा दी येशु नू होई सज़ा देख के,
मेरे उछले नैणा दे…….
सेह लई कोड़िया दी मार नाले बेपत (पीटा) होया
पर फेर वी ना अपना तू मुंह खोलेया
एह नहीं जान दे एह लोकी की करदे पये ने
पिता माफ़ कर सूली उत्तों येशु बोलेया
मै विच्च गुनाहां बंधुआ सी, आज़ाद कराया येसु ने
मेरा जीवन बीयाबान जिहा, आबाद कराया येसु ने
3. ओहनू ठठे ते मखौलां च उडाया जा रेहा ऐ
बेरहमी नाल येसु नू सताया जा रेहा ऐ
ओहदे अपने ने किता जो दगा देख के
मेरे उछले नैणा दे…….
होके धरती वी भरे तेरी पिड़ देख के
नाल अक्खां भरी खड़ा आसमान नासरी
जेहड़े तेरे उत्ते आए ने तसिहेयां दी हद
किवे लफ्ज़ा करा मैं ब्यान नासरी
ओहदे लहू दे इक्क इक्क कतरे दी, मैं कीमत नहीं चुका सकदा
ओहने जिवे धो के साफ़ किता, मै कदे वी नहीं भुला सकदा
ओहनू ठठे ते मखौलां च, उडाया जा रेहा
4. नेजेया दे नाल मेरे येशु कोहेया तू गया
मेरी मौत दा प्याला येशु तू पी लेया
जेहड़ी साडे नाल किती तू वफ़ा देख के
मेरे उछले नैणा दे…….
गीत का आध्यात्मिक सारांश
यह गीत मुख्य रूप से “इब्ने खुदा” यानी परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने की घटना पर केंद्रित है। गीत का सारांश निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
- बलिदान की पराकाष्ठा: गीत वर्णन करता है कि कैसे निर्दोष यीशु को अपराधियों की तरह सूली पर चढ़ाया गया। उनके हाथों और पैरों में कीलें ठोंकी गईं और उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया। यह सब उन्होंने हमारे अपराधों के बदले सहा।
- परमेश्वर का असीम प्रेम: सूली पर यीशु का होना इस बात का प्रमाण है कि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि अपने इकलौते पुत्र को भी कुर्बान कर दिया। गीत का भाव हमें उस प्रेम की गहराई को महसूस करने के लिए मजबूर करता है।
- पापों से मुक्ति: गीत यह संदेश देता है कि जो लहू क्रूस से बहा, वह केवल पानी या खून नहीं था, बल्कि वह एक ऐसा सोता था जिसमें धुलकर पूरी मानव जाति के पापों का प्रायश्चित हुआ।
- मौन सहनशीलता: जैसे एक मेमना वध होने के समय चुप रहता है, वैसे ही यीशु ने अपमान, कोड़े और क्रूस की पीड़ा को बिना किसी शिकायत के सहा ताकि परमेश्वर की योजना पूरी हो सके।
गीत से जुड़े पवित्र बाइबल के वचन (विस्तृत व्याख्या सहित)
इस गीत के भावों को समझने के लिए निम्नलिखित बाइबल वचन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
१. कांटों का ताज और अपमान
“और उन्होंने कांटों का मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा, और उसके दाहिने हाथ में एक सरकंडा दिया; और उसके आगे घुटने टेककर उसे ठट्ठों में उड़ाने लगे, कि ‘हे यहूदियों के राजा, नमस्कार!'” (मत्ती 27:29)
- स्पष्टीकरण: गीत में जब हम यीशु के दुखों को देखते हैं, तो यह वचन हमें याद दिलाता है कि उन्होंने न केवल शारीरिक पीड़ा सही, बल्कि मानसिक अपमान भी सहा ताकि हमें महिमा का मुकुट मिल सके।
२. हमारे अपराधों के लिए घायल होना
“परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।” (यशायाह 53:5)
- स्पष्टीकरण: यह भविष्यवाणी यीशु के क्रूस पर चढ़ने से सैकड़ों साल पहले की गई थी। गीत की हर पंक्ति इसी सत्य को दोहराती है कि यीशु की चोटें हमारे आत्मिक और शारीरिक चंगेपन का कारण बनीं।
३. परमेश्वर के पुत्र का प्रेम
“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।” (यूहन्ना 3:16)
- स्पष्टीकरण: गीत में ‘इब्ने खुदा’ (परमेश्वर का पुत्र) शब्द का प्रयोग इसी प्रेम को दर्शाने के लिए किया गया है। सूली वह स्थान है जहाँ न्याय और प्रेम का मिलन हुआ।
४. कीलों से बिंधे हाथ और पैर
“क्योंकि कुत्तों ने मुझे घेर लिया है; कुकर्मियों की मण्डली मेरे चारों ओर लगी हुई है; वे मेरे हाथ और मेरे पांव छेदते हैं।” (भजन संहिता 22:16)
- स्पष्टीकरण: यह दाऊद का भजन यीशु के क्रूस के दृश्यों का सटीक वर्णन करता है। जब गीत में सूली पर टंगे यीशु का ज़िक्र होता है, तो यह वचन उस शारीरिक कष्ट की पुष्टि करता है जो उन्होंने सहा।
५. जगत का पाप उठा ले जाने वाला मेमना
“दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, ‘देखो, यह परमेश्वर का मेमना है, जो जगत का पाप उठा ले जाता है!'” (यूहन्ना 1:29)
- स्पष्टीकरण: इब्ने खुदा का सूली पर चढ़ना एक बलिदान था। पुराने नियम में पापों की क्षमा के लिए मेमने की बलि दी जाती थी, लेकिन यीशु ने एक ही बार में अपना बलिदान देकर हमें सदा के लिए पापों से छुड़ा लिया।
६. पिता से क्षमा की प्रार्थना
“तब यीशु ने कहा, ‘हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं’।” (लूका 23:34)
- स्पष्टीकरण: गीत का एक गहरा पहलू यीशु की दया है। सूली पर होने के बावजूद उन्होंने अपने सताने वालों के लिए प्रार्थना की, जो उनके ईश्वरीय चरित्र को प्रकट करता है।
७. क्रूस का संदेश
“क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के लिये मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के लिये परमेश्वर की सामर्थ्य है।” (1 कुरिन्थियों 1:18)
- स्पष्टीकरण: गीत हमें इसी सामर्थ्य को देखने का आह्वान करता है। जिसे दुनिया हार समझ रही थी, वास्तव में वह शैतान और पाप पर यीशु की सबसे बड़ी जीत थी।
