नहीं जीणा तेरे बाजों | Lyrics song
मैं तेरे बाजों की जीणा
जीणा मैं की नासरी
होवा जे तेरे तो जुदा साह होवेगा आखिरी ….. 2
नहीं जीणा तेरे बाजों नहीं जीणा तेरे बाजों ….. 2
1. लक्ख हो जावें वैरी ज़माना तेरा ही रहणा मैं ….. 2
रज्ज – रज्ज भावें मैंनू सतावें हस्स – हस्स सहणा मैं ….. 2
देवा मीसाला मैं सदा येसु तेरे प्यार दी
2. मेरे दिल दा मेरी रूह दा मालिक येसु तू ….. 2
शाम सवेरे सिखर दुपहरी दिसदा तू ही तू ….. 2
तेरी हम्दा दे विच्च गुजरे इक्क – इक्क साह मेरा ….. 2
हर दम होंठा उत्ते रेहंदा मिट्ठा नाम तेरा ….. 2
गीत का आध्यात्मिक सारांश (Song Summary)
यह गीत एक आराधक के दिल की गहरी पुकार है, जो यीशु मसीह के प्रति अटूट प्रेम, पूर्ण समर्पण और निर्भरता को दर्शाता है। गीत का केंद्रीय भाव यह है कि मसीह के बिना जीवन पूरी तरह से व्यर्थ और निष्प्राण है। चाहे दुनिया कितनी भी विरोधी क्यों न हो जाए, या जीवन में कितनी भी मुश्किलें आएं, मसीह का प्यार और उनका साथ ही विश्वासी के जीने का एकमात्र आधार है। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक मसीही जीवन की उस अवस्था को बयां करता है जहाँ हर एक सांस (साह) सिर्फ और सिर्फ प्रभु यीशु की महिमा के लिए चलती है।
गीत के अंतर्निहित भाव और पवित्र बाइबल के वचन (Bible Verses with Explanation)
1. “नहीं जीणा तेरे बाजों… साह होवेगा आखिरी” (मसीह में ही जीवन और सांसें हैं)
गीत की ये पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि हमारा पूरा अस्तित्व प्रभु यीशु मसीह में ही है। उनके बिना आत्मिक रूप से हम मृत हैं।
- प्रेरितों के काम 17:28“क्योंकि हम उसी में जीते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि ‘हम तो उसी के वंश भी हैं।’”
- स्पष्टीकरण: यह वचन साफ करता है कि हमारी हर एक सांस और हमारा अस्तित्व परमेश्वर की मर्जी से है। प्रभु से अलग होकर मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं है, ठीक जैसा गीत में कहा गया है कि “तेरे बिन जीना आखरी सांस जैसा है।”
- फिलिप्पियों 1:21“क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।”
- स्पष्टीकरण: प्रेरित पौलुस का यह दृढ़ विश्वास गीत के इस भाव से पूरी तरह मेल खाता है कि मसीह के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। मसीह ही जीवन का वास्तविक केंद्र हैं।
2. “लक्ख हो जावें वैरी ज़माना तेरा ही रहणा मैं… हस्स – हस्स सहणा मैं” (सताव में वफादारी)
जब कोई मसीह को अपना लेता है, तो संसार उसका विरोधी हो जाता है, लेकिन सच्चा विश्वासी मसीह के प्रेम के कारण हर दुख को हंसते-हंसते सहने के लिए तैयार रहता है।
- रोमियों 8:35“कौन हमको मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नग्नता, या जोखिम, या तलवार?”
- स्पष्टीकरण: यह वचन प्रतिज्ञा करता है कि दुनिया की कोई भी ताकत, चाहे वो कितनी भी बड़ी वैरी (दुश्मन) क्यों न बन जाए, हमें मसीह के प्यार से जुदा नहीं कर सकती।
- मत्ती 5:11-12“धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं, और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बातें कहें। आनन्दित और मगन होना क्योंकि स्वर्ग में तुम्हारे लिये बड़ा फल है।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन सिखाता है कि मसीह के नाम के कारण यदि जमाना वैरी भी हो जाए, तो एक विश्वासी दुखी नहीं होता, बल्कि गीत की पंक्तियों के अनुसार “हंस-हंस के” सहता है और आनंदित रहता है।
3. “मेरे दिल दा मेरी रूह दा मालिक येसु तू” (यीशु का प्रभुत्व और स्वामित्व)
हमारा तन, मन और आत्मा सब कुछ यीशु मसीह का है क्योंकि उन्होंने हमें अपने बहुमूल्य लहू से खरीदा है।
- 1 कुरिन्थियों 6:19-20“क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है? और तुम अपने नहीं हो। क्योंकि तुम दाम देकर खरीदे गए हो; इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन प्रमाणित करता है कि हमारी रूह और दिल के मालिक खुद यीशु हैं, क्योंकि क्रूस पर उन्होंने हमारी जान की कीमत चुकाई है।
4. “शाम सवेरे सिखर दुपहरी दिसदा तू ही तू” (हर पल प्रभु की उपस्थिति)
यह पंक्ति चौबीसों घंटे प्रभु के ध्यान में मग्न रहने और हर परिस्थिति में उनकी उपस्थिति को महसूस करने को दर्शाती है।
- भजन संहिता 16:8“मैंने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।”
- स्पष्टीकरण: राजा दाऊद का यह भजन दर्शाता है कि चाहे सुबह हो, शाम हो या दोपहर, जब हम प्रभु को अपने सामने रखते हैं, तो हमारा ध्यान केवल उसी पर केंद्रित रहता है।
- यहोशू 1:9“क्या मैंने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्ध और दृढ़ हो जा; न तो भय खा और न तेरा मन कच्चा हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा, वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।”
- स्पष्टीकरण: परमेश्वर की यह प्रतिज्ञा कि वह हर समय, हर पल हमारे साथ हैं, हमें यह अहसास कराती है कि चारों तरफ सिर्फ वही दिखाई देते हैं।
5. “तेरी हम्दा दे विच्च गुजरे इक्क – इक्क साह मेरा… मिट्ठा नाम तेरा” (निरंतर स्तुति और नाम की मिठास)
हमारी जीभ और हमारे होंठ हमेशा प्रभु के मीठे नाम की आराधना (हम्द) के लिए इस्तेमाल होने चाहिए।
- भजन संहिता 34:1“मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन गीत की इस भावना को पूरी तरह सच साबित करता है कि विश्वासी की हर एक सांस प्रभु की स्तुति (हम्द) में ही बीतनी चाहिए।
- भजन संहिता 119:103“तेरे वचन मेरे चखने में क्या ही मीठे हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी अनोखे हैं!”
- स्पष्टीकरण: प्रभु यीशु का नाम और उनका वचन शहद से भी ज्यादा मीठा है, जो हर दम विश्वासी के होंठों पर वास करता है।
