Tu Hi Meri Chattan Lyrics

Tu Hi Meri Chattan Lyrics
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तू ही मेरी चट्टान Lyrics song

Tu Hi Meri Chattan Lyrics

स्थायी:
तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।
तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।

अंतरा 1:
चाहे दुःख का पहाड़ हो या, चाहे गहरा सुकून,
चाहे हार की खाई हो या, चाहे आशा का शिखर
हर मौसम हर समय, तू रहता एक सा,
तुझ पे ही ईमान है, तुझ पर यक़ीन है, डगमगाऊँगा ना मैं।

तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।
तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।

अंतरा 2:
निर्भर ना इंसानों पर, ना ही अधिपतियों पर,
धन-संपत्ति पर भी नहीं, ना ही खुद की शक्ति पर।
भले तुझको भूलूँ मैं, तू ना भूले मुझे,
तुझ पे ही ईमान है, तुझ पर यक़ीन है, डगमगाऊँगा ना मैं।

तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।
तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।

अंतरा 3:
तू हो जीवन का दीपक, हो मार्गदर्शक बचाते गिरने से
तुम हो मेरे जनक-जननी, सच्चे साथी, मुझे पूरा करते हो

समाप्ति:
तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।
तू ही मेरी चट्टान है, तुझ पर ईमान है,
तू छुपाने का स्थान है, तुझ में रहूँगा मैं।
डगमगाऊँगा ना मैं, डगमगाऊँगा ना मैं, डगमगाऊँगा ना मैं।

१. परमेश्वर हमारी दृढ़ चट्टान और शरणस्थान है

गीत की शुरुआत में परमेश्वर को एक चट्टान और छिपने का स्थान कहा गया है। इसका अर्थ है कि जिस प्रकार एक मजबूत चट्टान तूफानों में अटल रहती है, उसी प्रकार जीवन के हर संकट में परमेश्वर हमें सुरक्षा प्रदान करता है।

भजन संहिता 18:2 – “यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा परमेश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूँ, वह मेरी ढाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊंचा स्थान है।”

भजन संहिता 32:7 – “तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे उद्धार के गीतों से घेर लेगा।”

स्पष्टीकरण: इन वचनों के अनुसार, जब हम परमेश्वर पर अपना ईमान (विश्वास) रखते हैं, तो वह हमारे लिए एक ऐसा सुरक्षित गढ़ बन जाता है जहाँ कोई भी सांसारिक दुःख या निराशा हमें छू नहीं सकती। परमेश्वर में रहकर ही हम वास्तविक आत्मिक सुरक्षा का अनुभव कर सकते हैं।

२. हर मौसम और परिस्थिति में अपरिवर्तनीय परमेश्वर

गीत में दुःख के पहाड़, हार की खाई और आशा के शिखर का वर्णन है। जीवन में सुख-दुःख आते-जाते रहते हैं, लेकिन परमेश्वर का स्वभाव कभी नहीं बदलता।

इब्रानियों 13:8 – “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक सा है।”

भजन संहिता 62:2 – “सचमुच वही मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; इसलिए मैं बहुत न डिगूंगा।”

स्पष्टीकरण: जीवन के चाहे कितने भी उतार-चढ़ाव क्यों न हों, परमेश्वर का प्रेम और उसकी करुणा स्थिर रहती है। जब हमारा विश्वास इस अपरिवर्तनीय परमेश्वर पर होता है, तो हम जीवन की सबसे गहरी घाटियों (हार या दुःख) में भी डगमगाते नहीं हैं।

३. संसार या मनुष्यों पर नहीं, केवल परमेश्वर पर निर्भरता

हम अक्सर धन-संपत्ति, अपनी खुद की शक्ति या ऊंचे पदों पर बैठे लोगों (अधिपतियों) पर भरोसा करने लगते हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि ये सभी चीजें नश्वर हैं।

भजन संहिता 118:8-9 – “यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है। यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है।”

नीतिवचन 3:5-6 – “तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।”

यशायाह 49:15 – “क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूध पिते बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हाँ, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे कभी नहीं भूलूंगा।”

स्पष्टीकरण: मनुष्य हमें भूल सकते हैं या हमें धोखा दे सकते हैं, और हमारी अपनी ताकत भी जवाब दे सकती है। लेकिन परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि वह हमें कभी नहीं भूलेगा (भले ही हम अपनी मानवीय कमजोरी में उसे भूल जाएं)। सच्चा और पूरा भरोसा केवल परमेश्वर पर ही किया जा सकता है।

४. जीवन का मार्गदर्शक, माता-पिता और सच्चा साथी

अंत में, परमेश्वर को जीवन का दीपक और हमें गिरने से बचाने वाला मार्गदर्शक बताया गया है, जो एक सच्चे माता-पिता और साथी की तरह हमें पूर्ण करता है।

भजन संहिता 119:105 – “तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।”

भजन संहिता 27:10 – “मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।”

स्पष्टीकरण: जब हम जीवन के अंधकारमय रास्तों से गुजरते हैं, तो परमेश्वर का वचन हमें सही दिशा दिखाता है। जब दुनिया के सबसे करीबी रिश्ते (जैसे जनक-जननी) भी अगर हमारा साथ छोड़ दें, तब भी परमेश्वर एक सच्चे साथी की तरह हमारा हाथ थामे रहता है और हमारी कमियों को पूरा करके हमें आत्मिक रूप से सिद्ध बनाता है।

Tu Hi Meri Chattan Lyrics in hindi

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