tujh ko pukare mera dil lyrics ( सरदार सोलंकी )

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pastor sardar solanki

तुझको पुकारे मेरा दिल ……… वो येशु
तुझको पुकारे मेरा मन …… 2
वो येशु आ …….. आ …… आ …. 2
अंधों को तूने आंखें दिया
लंगड़ों को तूने चलता किया …… 2
वो येशु आ …….. आ …… आ …. 2
तुझको पुकारे मेरा दिल ……… वो येशु
तुझको पुकारे मेरा मन …… 2


मुझे छू…… मुझे छू …., मुझे छू
ऐ पाक रूह …. 2
वो येशु आ …….. आ …… आ …. 2
तुझको पुकारे मेरा दिल ……… वो येशु
तुझको पुकारे मेरा मन …… 2


जीवन देने वाला येशु
आनंद देने वाला येशु …. 2
आत्मा से भरने वाला येशु
समर्थ से भरने वाला येशु ….. 2
वो येशु आ …….. आ …… आ …. 2
तुझको पुकारे मेरा दिल ……… वो येशु
तुझको पुकारे मेरा मन …… 2

1. व्याकुलता से प्रभु को पुकारना (तुझको पुकारे मेरा दिल…)

गीत की शुरुआत ही इस बात को दर्शाती है कि हमारा प्राण और मन ईश्वर के लिए कितना प्यासा है। जब संसार में कोई सहारा नहीं दिखता, तब हमारा दिल अपने सृजनहार को पुकारता है। बाइबल हमें सिखाती है कि प्रभु को पुकारने वालों को वे कभी निराश नहीं करते।

  • मत्ती 11:28 — “हे सब परिश्रम करने वालो और बोझ से दबे लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।”
  • भजन संहिता 42:1 — “जैसे हिरनी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मेरा प्राण तेरे लिये हांफता है।”
  • स्पष्टीकरण: यह वचन दिखाता है कि जब हमारा दिल और मन व्याकुल होकर यीशु को पुकारता है, तो वे हमें आत्मिक शांति और विश्राम देते हैं।

2. यीशु के चमत्कार और चंगाई (अंधों को तूने आंखें दिया, लंगड़ों को तूने चलता किया…)

यह भाग प्रभु यीशु की अलौकिक सामर्थ्य और दयालु स्वभाव को प्रकट करता है। जब यीशु इस पृथ्वी पर थे, उन्होंने न केवल शारीरिक रूप से अंधों को दृष्टि दी और लंगड़ों को चलाया, बल्कि आज भी वे हमारे जीवन के आत्मिक अंधेपन को दूर करते हैं और हमें सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं।

  • मत्ती 11:4-5 — “यीशु ने उत्तर देकर उनसे कहा, ‘जो कुछ तुम सुनते हो और देखते हो, वह जाकर यूहन्ना से कह दो: कि अंधे देखते हैं और लंगड़े चलते फिरते हैं; कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं और बहरे सुनते हैं; मुर्दे जिलाए जाते हैं और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है।'”
  • यशायाह 35:5-6 — “तब अंधों की आंखें खोली जाएंगी और बहरों के कान भी खोले जाएंगे; तब लंगड़ा हिरन की सी चौकड़ी भरेगा और गूंगे की जीव विहसित गाएगी।”
  • स्पष्टीकरण: ये वचन प्रमाणित करते हैं कि यीशु ही वह मसीह हैं जिनके पास हर बीमारी, लाचारी और असंभव परिस्थिति को बदलने की सामर्थ्य है। वे चंगाई देने वाले परमेश्वर हैं।

3. पवित्र आत्मा की मांग (मुझे छू… ऐ पाक रूह…)

गीत का यह हिस्सा पूरी तरह से आत्मिक पुनरुद्धार (Revival) पर आधारित है। ‘पाक रूह’ का अर्थ है पवित्र आत्मा। एक मसीही जीवन में बिना पवित्र आत्मा के स्पर्श के हम आत्मिक रूप से मजबूत नहीं हो सकते। हमें हर दिन उनके स्पर्श की आवश्यकता होती है ताकि हम पापों से दूर रहकर एक पवित्र जीवन जी सकें।

  • लूका 11:13 — “अतः जब तुम बुरे होकर अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा?”
  • यूहन्ना 14:26 — “परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैंने तुमसे कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।”
  • स्पष्टीकरण: जब हम प्रार्थना करते हैं कि ‘मुझे छू ऐ पाक रूह’, तब पवित्र आत्मा हमारे शरीरों और मनों को छूकर हमें अपनी अगुवाई में चलाते हैं और हमें सांत्वना देते हैं।

4. जीवन और आनंद देने वाला यीशु (जीवन देने वाला… आनंद देने वाला…)

यीशु मसीह ने स्वयं कहा है कि वे हमें बहुतायत का जीवन देने आए हैं। संसार का आनंद क्षणिक होता है, लेकिन जो आनंद और शांति प्रभु यीशु के लहू और उनके अनुग्रह से मिलती है, वह सर्वदा बनी रहती है।

  • यूहन्ना 10:10 — “चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।”
  • भजन संहिता 16:11 — “तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनंद की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।”
  • स्पष्टीकरण: यीशु केवल इस संसार का जीवन नहीं, बल्कि अनंत जीवन देने वाले परमेश्वर हैं। उनकी उपस्थिति में आने से मनुष्य का दुखी मन भी आनंद से भर जाता है।

5. सामर्थ्य और आत्मा की परिपूर्णता (आत्मा से भरने वाला… समर्थ से भरने वाला…)

गीत का अंतिम संदेश यह है कि मसीही जीवन मानवीय शक्ति से नहीं, बल्कि परमेश्वर की सामर्थ्य से जिया जाता है। जब विश्वासी कमजोर पड़ता है, तब प्रभु उसे अपनी अलौकिक सामर्थ्य से भर देते हैं ताकि वह हर परीक्षा पर जय पा सके।

  • प्रेरितों के काम 1:8 — “परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।”
  • इफिसियों 5:18 — “और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।”
  • यशायाह 40:29 — “वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ्य देता है।”
  • स्पष्टीकरण: यह वचन स्पष्ट करता है कि जब हम यीशु को पुकारते हैं, तो वे हमें अपनी गवाही देने और मसीही दौड़ को वफादारी से दौड़ने के लिए स्वर्गीय सामर्थ्य और बल से सराबोर कर देते हैं।

निष्कर्ष

यह गीत महज़ शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक टूटे हुए और प्यासे दिल की सच्ची पुकार है। यह हमें याद दिलाता है कि यीशु मसीह कल, आज और युगानुयुग एक सा है। जो चमत्कार उन्होंने दो हजार साल पहले किए थे, वही सामर्थ्य आज भी उनके नाम में है। यदि हम सच्चे मन, पवित्र आत्मा की भूख और पूरी सामर्थ्य के साथ उन्हें पुकारेंगे, तो वे निश्चित रूप से हमारे जीवन में कार्य करेंगे।

Pastor sardar solanki

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