नच्चांगे नच्चांगे असी Lyrics song
nachange nachange asi Lyrics
हत्था विच्च लै के, खजूर दीया डालियां
नच्चांगे नच्चांगे असी, मार मार तालियां
सना ओहदी गाओ, शाना जेहदिया निरालीयां
नच्चांगे नच्चांगे असी……..
1. स्वागत करांगे, राजेयां दे राजे दा
डफ़ बासुरी ढोल, ते बाजे नाल
संगा शर्मा है इक्क, पासे हटा लईयां
नच्चांगे नच्चांगे असी……..
2. पुच्छणगे सारे, अज्ज हो की गया ऐ
कौण आ रिहा है, जेहदा रौला पै रेहा ऐ
सबनू दस्सांगे ओह, जन्नता दा वाली (हाकिम) ऐ
च्चांगे नच्चांगे असी……..
यह गीत “नच्चांगे नच्चांगे असी” प्रभु यीशु मसीह के यरूशलेम में विजयी प्रवेश (Palm Sunday) की खुशी और उनकी महिमा के उत्सव को दर्शाता है। यह गीत एक मसीही विश्वासी के उत्साह को प्रकट करता है जो बिना किसी शर्म के अपने राजा का स्वागत ढोल-नगाड़ों और खजूर की डालियों के साथ करना चाहता है।
यहाँ इस गीत का विस्तृत आध्यात्मिक सारांश और उससे संबंधित बाइबल के वचन दिए गए हैं:
गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल स्पष्टीकरण
1. विजयी प्रवेश और खजूर की डालियां (Palm Sunday) गीत की मुख्य पंक्तियाँ “हत्था विच्च लै के, खजूर दीया डालियां” सीधे तौर पर बाइबल की उस घटना की याद दिलाती हैं जब यीशु यरूशलेम में आए थे। खजूर की डालियां जीत और विजय का प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि यीशु केवल एक साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि मृत्यु और पाप पर विजय पाने वाले राजा हैं।
- यूहन्ना 12:12-13 – “दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्व में आए थे, यह सुनकर कि यीशु यरूशलेम में आ रहा है, खजूर की डालियां लीं और उसके स्वागत के लिये निकले और पुकारने लगे, ‘होशाना! धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, और जो इस्राएल का राजा है!'”
2. स्तुति और आराधना में आनंद (नृत्य और वाद्ययंत्र) गीत में डफ, बांसुरी और ढोल का उल्लेख है। बाइबल हमें सिखाती है कि परमेश्वर की उपस्थिति में आनंद मनाना और वाद्ययंत्रों के साथ उनकी स्तुति करना एक पवित्र कार्य है। राजा दाऊद ने भी बिना किसी लोक-लाज के परमेश्वर के सामने नृत्य किया था, जो “संगा शर्मा” (शर्म और संकोच) को त्यागने की प्रेरणा देता है।
- भजन संहिता 150:3-5 – “नरसिंगे के शब्द के साथ उसकी स्तुति करो; सारंगी और सितार के साथ उसकी स्तुति करो! डफ बजाते और नाचते हुए उसकी स्तुति करो; तार वाले बाजों और बांसुरी के साथ उसकी स्तुति करो! ऊंचे शब्द वाले झांझों के साथ उसकी स्तुति करो!”
- 2 शमूएल 6:14 – “और दाऊद यहोवा के सामने अपनी पूरी शक्ति से नाचता रहा; और दाऊद सन का एपोद पहने हुए था।”
3. राजाओं का राजा और प्रभु का स्वागत गीत का अंतरा “स्वागत करांगे, राजेयां दे राजे दा” यीशु की सर्वोच्चता को स्वीकार करता है। वह कोई सांसारिक राजा नहीं, बल्कि स्वर्ग और पृथ्वी का अधिपति है। हमारा कर्तव्य है कि हम अपने जीवन में उसका स्वागत पूरे सम्मान के साथ करें।
- प्रकाशितवाक्य 19:16 – “और उसके वस्त्र और जांघ पर यह नाम लिखा है, ‘राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु’।”
- भजन संहिता 24:7 – “हे फाटकों, अपने सिर ऊंचे करो! हे सनातन द्वारों, ऊंचे हो जाओ, कि महिमा का राजा प्रवेश करे!”
4. जन्नतों का वाली (स्वर्ग का स्वामी) जब लोग पूछते हैं कि “कौन आ रहा है?”, तो विश्वासी गवाही देता है कि वह स्वर्ग का स्वामी (जन्नता दा वाली) है। यह यीशु की ईश्वरीय पहचान को स्पष्ट करता है कि वह केवल एक नबी नहीं, बल्कि स्वयं परमेश्वर का पुत्र है।
- मत्ती 21:10-11 – “जब उसने यरूशलेम में प्रवेश किया, तो सारे नगर में हलचल मच गई और लोग कहने लगे, ‘यह कौन है?’ लोगों ने कहा, ‘यह गलील के नासरत का भविष्यद्वक्ता यीशु है’।”
- फिलिप्पियों 2:9-11 – “इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और पृथ्वी के नीचे हैं, वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें; और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।”
निष्कर्ष
यह गीत हमें सिखाता है कि मसीह की आराधना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो हमें खुशी से भर देता है। जिस प्रकार यरूशलेम की भीड़ ने ‘होशाना’ (बचा ले) के नारों से आसमान गूंजा दिया था, वैसे ही आज हमें भी अपने जीवन के हर डर और शर्म को छोड़कर उस “स्वर्ग के हाकिम” की महिमा करनी चाहिए। यह गीत हमें याद दिलाता है कि जब हमारा राजा हमारे बीच आता है, तो उत्सव मनाना अनिवार्य है।
