Mohabbat Hai Yeshu Se Lyrics

Mohabbat Hai Yeshu Se Lyrics
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मोहोब्बत हैं येशु से Lyrics song



Mohabbat Hai Yeshu Se Lyrics



मोहोब्बत हैं येशु से Lyrics song



हर पल येशु के संग मैं,
हर रोज़ उसके सहारे -2
गुदा मैं हो नहीं सकता,
तुझसे मेरे येसु प्यारे
मोहोब्बत हैं – मोहोब्बत हैं,
मोहोब्बत हैं येशु से -2


1. तुझसे दूर होकर, तुझको भूल कर,
कुछ भी नहीं मैं कर संकू
तुझको छोड़कर क्या पा संकू
ऐसा कुछ नहीं धरती पर -2


हर पल येशु के संग मैं,
हर रोज़ उसके सहारे -2
गुदा मैं हो नहीं सकता,
तुझसे मेरे येसु प्यारे
मोहोब्बत हैं – मोहोब्बत हैं,
मोहोब्बत हैं येशु से -2


2. तू ही मुझे तृप्त करता हैं,
जीवन की रोटी भी वह हैं
प्यास बुझाए जो जीवन का झरना तू
प्यासा हूं मैं तेरा येशु -2


हर पल येशु के संग मैं,
हर रोज़ उसके सहारे -2
गुदा मैं हो नहीं सकता,
तुझसे मेरे येसु प्यारे
मोहोब्बत हैं – मोहोब्बत हैं,
मोहोब्बत हैं येशु से -2

गीत का आध्यात्मिक सारांश और बाइबल वचन

यह गीत मसीही जीवन के तीन मुख्य स्तंभों को दर्शाता है: सहभागिता, निर्भरता और आत्मिक तृप्ति।

1. प्रभु के साथ अटूट संबंध (Abiding in Christ)

गीत की पंक्तियाँ “हर पल येशु के संग मैं, हर रोज़ उसके सहारे” हमें यह याद दिलाती हैं कि हमारा अस्तित्व प्रभु में ही है। मसीही जीवन कोई साप्ताहिक क्रिया नहीं, बल्कि हर पल की संगति है। हम उनसे जुदा होकर आत्मिक रूप से जीवित नहीं रह सकते।

  • यूहन्ना 15:5 – “मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो; जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वही बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।”
  • भजन संहिता 16:8 – “मैंने यहोवा को निरंतर अपने सम्मुख रखा है; वह मेरे दाहिने हाथ रहता है, इसलिये मैं न डगमगाऊंगा।”

2. पूर्ण समर्पण और निर्भरता (Total Dependence)

जब गीत कहता है, “तुझसे दूर होकर, तुझको भूल कर, कुछ भी नहीं मैं कर सकूँ”, तो यह प्रेरितों के काम की उस सच्चाई को दोहराता है कि हमारी हर सांस और गति उसी के कारण है। संसार में ऐसी कोई वस्तु नहीं जो प्रभु के प्रेम की तुलना कर सके।

  • प्रेरितों के काम 17:28 – “क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसा तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, ‘हम तो उसी के वंश भी हैं’।”
  • फिलिप्पियों 4:13 – “जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ।”

3. येशु: जीवन की रोटी और जल (Bread of Life & Living Water)

गीत का दूसरा भाग प्रभु येशु को हमारी आत्मा की प्यास और भूख मिटाने वाले के रूप में प्रस्तुत करता है। संसार की चीजें अस्थायी सुख देती हैं, लेकिन येशु वह “जीवन का झरना” हैं जो हमें अनंत काल के लिए तृप्त करते हैं।

  • यूहन्ना 6:35 – “येशु ने उनसे कहा, ‘जीवन की रोटी मैं हूँ; जो मेरे पास आता है वह कभी भूखा न होगा, और जो मुझ पर विश्वास करता है वह कभी प्यासा न होगा’।”
  • यूहन्ना 4:14 – “परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर कभी प्यासा न होगा; वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।”

4. संसार की व्यर्थता और मसीह की श्रेष्ठता

“तुझको छोड़कर क्या पा सकूँ, ऐसा कुछ नहीं धरती पर”—यह पंक्तियाँ भजनकार के उन शब्दों की याद दिलाती हैं जहाँ वह स्वीकार करता है कि स्वर्ग और पृथ्वी पर प्रभु के सिवा उसका कोई नहीं है।

  • भजन संहिता 73:25 – “स्वर्ग में मेरा और कौन है? और पृथ्वी पर तेरे सिवा मैं और किसी को नहीं चाहता।”
  • मत्ती 16:26 – “यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा?”

5. प्रेम ही मुख्य आज्ञा है

अंत में, बार-बार “मोहब्बत है येशु से” कहना यह दर्शाता है कि हमारा धर्म नियमों का समूह नहीं, बल्कि एक व्यक्ति (येशु मसीह) के साथ प्रेम का रिश्ता है।

  • 1 यूहन्ना 4:19 – “हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहले उसने हमसे प्रेम किया।”
  • मत्ती 22:37 – “उसने उससे कहा, ‘तू अपने परमेश्वर प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख’।”

निष्कर्ष

यह गीत एक विश्वासी की प्रार्थना है जो यह स्वीकार करता है कि प्रभु येशु ही उसके जीवन का आधार हैं। चाहे वह जीवन की रोटी के रूप में हो या जीवन के झरने के रूप में, येशु के बिना हमारा जीवन शून्य है। यह गीत हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपनी समस्याओं के बजाय अपनी दृष्टि उस पर टिकाए रखें जो हमारा सच्चा सहारा है।

परमेश्वर इस वचन और गीत के द्वारा आपको आशीष दे। आमीन!





God bless you all



भजन संहिता २०:७-८7

7 किसी को रथों पर, और 
किसी को घोड़ों पर भरोसा है,
परन्तु हम तो अपने परमेश्वर 
यहोवा ही का नाम लेंगे।

8 वे तो झुक गए और गिर पड़े.
परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं।



Psalms 20:7-8

7 Some trust in chariots 
and others in horses, 
but we call on Yahweh 
our God.

8 They will be brought 
down and fall, 
but we will rise and 
stand upright.



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