मैं सबर दे नाल Lyrics song
मैं सबर दे नाल आस रखके, यहोवा दी करदा सां इंतजारी
तद ओसने मेरे ते तरस खा के,
सुणी मेरी सारी आहोजारी मैं सबर दे नाल…….
1. ओह खतरे दे टोए ते खोबेयां चों
है मैंनू कड के लै आया बाहर
चट्टान उत्ते रखे पैर मेरे
ते बख्शी कदमां नूं उस्तवारी
मैं सबर दे नाल……
2. खुदा ने गीत इक्क नवां सिखाया
कि जिस तों होवे तारीफ उसदी
बथेरे मनणगे खौफ उसदा
ते आस रखणगे रब उत्ते सारी
मैं सबर दे नाल…….
3. मुबारक ओसे दा हाल जांणो
यहोवा उत्ते भरोसा जिसदा
घमंडीयां कोल ओह ना जांदा
ना झूठेयां नाल रखदा यारी
मैं सबर दे नाल……
गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)
यह गीत मसीही जीवन के एक बहुत बड़े और गहरे नियम को सिखाता है—’सबर’ यानी धीरज के साथ परमेश्वर पर भरोसा रखना। जब हम बड़ी मुसीबतों, आंसुओं और परीक्षाओं के दौर से गुजरते हैं, तो हमारा परमेश्वर हमारी हर एक ‘आहोजारी’ (रोने और गिड़गिड़ाने की आवाज़) को सुनता है।
इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य दलदल जैसी लाचार परिस्थितियों में फंस जाता है, जहाँ से निकलना नामुमकिन हो, तब परमेश्वर का सामर्थी हाथ उसे बाहर खींच लाता है। वह न केवल हमें बचाता है, बल्कि हमारे कदमों को ‘चट्टान’ (प्रभु यीशु मसीह) पर मजबूत कर देता है ताकि हम दोबारा न फिसलें। परमेश्वर हमारे पुराने दुखों के रोने को बदलकर हमारे मुंह में एक ‘नया गीत’ डाल देता है, जिसे देखकर दूसरे लोग भी परमेश्वर का भय मानते हैं और उस पर भरोसा करना सीखते हैं। यह गीत घोषणा करता है कि वह मनुष्य धन्य (मुबारक) है जो इंसानों या घमंडियों पर नहीं, बल्कि केवल यहोवा पर अपना भरोसा रखता है।
बाइबल के मुख्य वचन और आत्मिक स्पष्टीकरण (Bible Verses & Explanation)
चूंकि यह गीत मुख्य रूप से भजन संहिता 40 (Zaboor 40) की आयत 1 से 4 का काव्यात्मक अनुवाद है, आइए इसके एक-एक भाग को बाइबल के शुद्ध वचनों के साथ गहराई से समझते हैं:
1. धीरज का फल और परमेश्वर का तरस
गीत का संदर्भ: “मैं सबर दे नाल आस रखके, यहोवा दी करदा सां इंतजारी, तद ओसने मेरे ते तरस खा के, सुणी मेरी सारी आहोजारी…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 40:1 – “मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरा चिल्लाना सुना।”
स्पष्टीकरण: “सबर” का अर्थ धीरज है और “आहोजारी” का अर्थ दुहाई या विलाप है। कई बार प्रार्थनाओं का उत्तर तुरंत नहीं मिलता, लेकिन यह वचन सिखाता है कि विश्वास का मतलब है धीरज के साथ परमेश्वर के समय का इंतजार करना। हमारा परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं के प्रति बहरा नहीं है। जब हम सबर के साथ उसकी बाट जोहते हैं, तो वह हमारी ओर झुकता है, हम पर तरस खाता है और हमारी गुप्त आहों और आंसुओं का उत्तर देता है।
2. दलदल से छुटकारा और चट्टान पर मजबूती
गीत का संदर्भ: “ओह खतरे दे टोए ते खोबेयां चों, है मैंनू कड के लै आया बाहर, चट्टान उत्ते रखे पैर मेरे, ते बख्शी कदमां नूं उस्तवारी…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 40:2 – “उसने मुझे सत्यानाश के गढ़े और दलदल की कीच में से उबारा, और मेरे पैरों को चट्टान पर रखा, और मेरे कदमों को दृढ़ किया।”
स्पष्टीकरण: “टोए और खोबेयां” का अर्थ विनाश का गढ़ा और कीचड़दार दलदल है। दलदल एक ऐसी जगह है जहाँ इंसान जितना हाथ-पैर मारता है, उतना ही नीचे धंसता चला जाता है। पाप, बीमारी और कर्ज की परिस्थितियाँ भी ऐसी ही होती हैं। लेकिन जब प्रभु यीशु अपना हाथ बढ़ाते हैं, तो वह हमें उस कीचड़ से बाहर निकाल लेते हैं। वह हमें केवल बचाते ही नहीं, बल्कि हमारे पैरों को ‘चट्टान’ पर खड़ा करते हैं। मसीह ही हमारी वह अभेद्य चट्टान है, जहाँ हमारे कदमों को ‘उस्तवारी’ (स्थिरता और दृढ़ता) मिलती है ताकि हम फिर कभी पाप या निराशा में न गिरें।
3. नया गीत और गवाही का सामर्थ्य
गीत का संदर्भ: “खुदा ने गीत इक्क नवां सिखाया, कि जिस तों होवे तारीफ उसदी, बथेरे मनणगे खौफ उसदा, ते आस रखणगे रब उत्ते सारी…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 40:3 – “और उसने मेरे मुँह में एक नया गीत, अर्थात् हमारे परमेश्वर की स्तुति का गीत डाला। बहुत से यह देखेंगे और डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे।”
स्पष्टीकरण: जब परमेश्वर हमारे जीवन के हालात बदलता है, तो हमारे होठों की भाषा भी बदल जाती है। रोने और शिकायत करने की जगह हमारे मुंह में स्तुति का ‘नया गीत’ आ जाता है। जब संसार के लोग एक विश्वासी के जीवन में आए इस अलौकिक बदलाव और छुटकारों को देखते हैं, तो उनके दिलों में परमेश्वर के प्रति एक पवित्र आदर और भय (खौफ) पैदा होता है। हमारी गवाही को देखकर दूसरे भटके हुए लोग भी संसार की आशायें छोड़ कर सच्चे परमेश्वर यहोवा पर भरोसा रखना शुरू कर देते हैं।
4. यहोवा पर भरोसा रखने वाले की धन्यता
गीत का संदर्भ: “मुबारक ओसे दा हाल जांणो, यहोवा उत्ते भरोसा जिसदा, घमंडीयां कोल ओह ना जांदा, ना झूठेयां नाल रखदा यारी…”
बाइबल के शुद्ध वचन:
भजन संहिता 40:4 – “क्या ही धन्य है वह पुरुष जो यहोवा ही पर भरोसा रखता है, और अभिमानियों और असत्य की ओर मुड़नेवालों की परवाह नहीं करता!”
स्पष्टीकरण: “मुबारक” का अर्थ आशीषों से भरा या धन्य होना है। बाइबल स्पष्ट कहती है कि जो मनुष्य अपनी समस्याओं के समाधान के लिए घमंडी लोगों, दुनिया की झूठी शक्तियों, या धोखेबाजों (झूठेयां) के पास मदद के लिए नहीं जाता, बल्कि अपना पूरा भरोसा केवल और केवल यहोवा पर रखता है, वह हमेशा सुखी और सुरक्षित रहता है। इंसानी सहारा टूट सकता है, लेकिन परमेश्वर पर रखा गया भरोसा कभी लज्जित नहीं होने देता।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह गीत हमें सिखाता है कि हमारी वर्तमान मुसीबतें चाहे कितनी भी गहरी क्यों न हों, वे अंतिम नहीं हैं। यदि हम ‘सबर’ और विश्वास के साथ प्रभु के समय का इंतजार करेंगे, तो हमारा उद्धार निश्चित है। वह हमें हर एक गढ़े से बाहर निकालेगा, हमारी नींव को मजबूत करेगा, और हमारे जीवन को अपनी महिमा के लिए एक बड़ी गवाही बना देगा। आइए, घमंडियों और संसार के झूठे सहारों को छोड़कर, पूरी आस केवल अपने जीवित परमेश्वर पर लगाएं। धीरज धरने वाले हमेशा धन्य होते हैं, हाल्लेलुईयाह!
