Adbhut Anugrah Mujhpe Hai Lyrics

Adbhut Anugrah Mujhpe Hai Lyrics
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अद्धभुत अनुग्रह मुझपे है Lyrics song

अद्धभुत अनुग्रह मुझपे है किया 
मेरे खुदाया सिर्फ तुने 
बोझ उठाकर मुझको बख्शा 
अब्दी आराम सिर्फ तुमने 
अद्धभुत अनुग्रह …….

1. जब-जब मैं गिरता राहों में 
थामे मुझको तू बाहों में 
मुझको उठाकर साथ चलाकर 
जीना सिखाया सिर्फ तूने 
अद्धभुत अनुग्रह …….

2. तेरी हजूरी से होके जुदा मैं 
पा नहीं सकता कुछ भी खुदा मैं 
मुझको भरा है अपने मसह से 
अपनी दया से सिर्फ तूने 
अद्धभुत अनुग्रह ……. 

गीत का मुख्य सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण

यह गीत एक मसीही विश्वासी के जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह (Grace) की महानता को प्रकट करता है। अनुग्रह का अर्थ है ‘वह भलाई जिसके हम योग्य नहीं थे, फिर भी परमेश्वर ने हमें दी’। यह गीत हमें याद दिलाता है कि केवल यीशु मसीह ही हमारे पापों का बोझ उठा सकता है और हमें अनंत विश्राम दे सकता है।

1. अद्भुत अनुग्रह और अब्दी (अनंत) आराम (स्थाई)

गीत की शुरुआत ही परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता से होती है कि उसने हमारे पापों और दुखों का बोझ खुद पर उठा लिया। उसने हमें न केवल इस संसार की चिंताओं से मुक्त किया, बल्कि ‘अब्दी आराम’ यानी स्वर्ग का अनंत विश्राम और शांति केवल मसीह यीशु के द्वारा ही संभव है।

  • इफिसियों 2:8“क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है।”
  • मत्ती 11:28“हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।”
  • इफिसियों 1:7“हमको मसीह में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है।”

2. गिरने पर थामने वाली सामर्थ्य और जीवन का मार्ग (अंतरा 1)

पहला पद हमारी मानवीय कमजोरियों और परमेश्वर की वफादारी को दिखाता है। जब हम अपने जीवन की राहों में निराश होकर गिर जाते हैं या भटक जाते हैं, तब प्रभु यीशु हमें अपनी बाहों में थाम लेता है। वह हमें केवल उठाता ही नहीं, बल्कि हाथ पकड़कर अपने साथ चलाता है और हमें जीने का सही तरीका सिखाता है।

  • भजन संहिता 37:24“चाहे वह गिरे, तो भी पड़ा न रहेगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है।”
  • नीतिवचन 24:16“क्योंकि धर्मी चाहे सात बार गिरे तो भी उठ खड़ा होता है; परन्तु दुष्ट विपत्ति में गिरकर पड़े ही रहते हैं।”
  • भजन संहिता 119:116“अपने वचन के अनुसार मुझे थाम रख कि मैं जीवित रहूँ, और मेरी आशा टूट जाने से मुझे लज्जित न कर!”

3. परमेश्वर की हजूरी की महत्ता और मसह (अभिषेक) (अंतरा 2)

दूसरा पद एक विश्वासी के जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई को बयां करता है कि परमेश्वर की उपस्थिति (हजूरी) से अलग होकर मनुष्य आत्मिक रूप से पूरी तरह शून्य और व्यर्थ है। मसीह से अलग होकर हम कुछ नहीं पा सकते। परमेश्वर ने अपनी दया से हमें अलग किया और अपनी सेवा के लिए पवित्र आत्मा के मसह (अभिषेक) से भर दिया है।

  • यूहन्ना 15:5“मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो; जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।”
  • भजन संहिता 51:11“मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझसे अलग न कर।”
  • 1 यूहन्ना 2:27“और तुम्हारा वह अभिषेक जो उसकी ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें यह प्रयोजन नहीं कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन् जैसे वह अभिषेक जो उसकी ओर से किया गया है तुम्हें सब बातें सिखाता है और वह सच्चा है और झूठा नहीं—और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है, वैसे ही तुम उसमें बने रहते हो।”
  • तीतूस 3:5“तो उसने हमारा उद्धार किया; और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ।”

निष्कर्ष: संपूर्ण रूप से यह गीत हमें सिखाता है कि एक विश्वासी का पूरा अस्तित्व मसीह के अद्भुत अनुग्रह पर टिका हुआ है। हमारी अपनी कोई योग्यता नहीं है; जब हम गिरते हैं तो उसका अनुग्रह हमें उठाता है, जब हम अकेले होते हैं तो उसकी हजूरी हमें संभालती है, और उसका पवित्र मसह हमें आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ने की सामर्थ्य देता है।

Adbhut Anugrah Mujhpe Hai Lyrics in hindi

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