मेरे दिल की हर एक धड़कन हैं प्रभु Lyrics song
मेरे दिल की हर एक
धड़कन हैं, प्रभु तेरे प्यार से
हर पल मुंतज़र हैं,
हम तेरे दीदार के
मेरे दिल की हर एक धड़कन…
1. तेरे कदमों में गिरकर
जान गमों से, छुड़ा ली हैं
तेरे दामन को छू
के हमने, ज़िन्दगी बना ली हैं
तेरे बगैर यूं ही भटक रहे थे,
हम बेकरह से
2. चांद सूरज सितारे
तेरी महिमा, से भरपूर हैं
कायनात की हर शैअ ने
तेरा जलवा नूर हैं
हर जगह गीत गा रहें है,
मसीहा की शान के
3. मेरे पापां दे लई तू
ज़ख्मी होया, मेरे आनंद
दे लई तू किन्ना रोया
तू दर्दा च सुनदा पुकार है,
मैं जो जिन्दा हां
गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचन (स्पष्टीकरण)
यह आराधना गीत मसीही जीवन के मूल आधार—परमेश्वर के प्रेम—को प्रकट करता है। गीतकार स्वीकार करता है कि मनुष्य का अस्तित्व, उसकी प्रत्येक सांस और धड़कन केवल प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह के कारण है। प्रभु के बिना मनुष्य का जीवन पूरी तरह दिशाहीन और भटकाव से भरा हुआ था, परंतु मसीह के चरणों में आने से उसे वास्तविक शांति और नया जीवन प्राप्त हुआ है।
नीचे गीत के मुख्य भावों और उनसे जुड़े पवित्र शास्त्र बाइबल के वचनों का स्पष्टीकरण दिया गया है:
1. जीवन का आधार और मसीह का दीदार (दर्शन)
गीत की शुरुआत घोषित करती है कि हमारे दिल की हर एक धड़कन प्रभु के प्यार की बदौलत है और हमारा मन हर पल उसके दर्शन (दीदार) के लिए तरसता है। बाइबल स्पष्ट करती है कि हमारा चलना-फिरना और जीवित रहना पूरी तरह से परमेश्वर में ही समाया हुआ है।
प्रेरितों के काम 17:28 — “क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, ‘हम तो उसी के वंश भी हैं।'” [02:03]
भजन संहिता 42:1-2 — “जैसे हिरनी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मेरा प्राण तेरे लिये हांफता है। मेरा प्राण परमेश्वर का, अर्थात् जीवित परमेश्वर का प्यासा है; मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?” [00:24]
2. चरणों में छुटकारा और नया जीवन
पंक्तियाँ “तेरे कदमों में गिर कर जान गमों से छुड़ा ली है, तेरे दामन को चू के हमने जिंदगी पा ली है” पापों और दुखों से मुक्ति की गवाही देती हैं। जब एक पापी या दुखी मनुष्य यीशु के चरणों में आता है, तो उसके सारे बोझ दूर हो जाते हैं। बवासीर या बीमारी में जैसे लोगों ने विश्वास से यीशु का पल्लू (दामन) छुआ और चंगे हो गए, यह उसी सामर्थ्य को दर्शाता है।
मत्ती 11:28 — “हे सब परिश्रम करने वालो और बोझ से दबे लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।” [01:13]
मत्ती 9:20-22 — “और देखो, एक स्त्री ने जिसके बारह वर्ष से लोहू बहने का रोग था, उसके पीछे से आकर उसके वस्त्र के अंचल को छू लिया। क्योंकि वह मन में कहती थी, ‘यदि मैं केवल उसके वस्त्र को छू ही लूंगी, तो चंगी हो जाऊंगी।’ यीशु ने फिरकर उसे देखा और कहा, ‘पुत्री, ढाढ़स बांध; तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है।’ तब वह स्त्री उसी घड़ी चंगी हो गई।” [01:26]
3. सृष्टि द्वारा परमेश्वर की महिमा और उसका नूर
गीत का यह भाग “चांद सूरज सितारे तेरी महिमा से भरपूर है, कायनात की हर शय तेरा जलवा नूर है” यह गवाही देता है कि पूरी कायनात और प्रकृति परमेश्वर की महिमा का बखान करती है। चारों ओर बिखरी सृष्टि उसी महान सृजनहार के तेज को दर्शाती है।
भजन संहिता 19:1 — “आकाश परमेश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।” [07:25]
यशायाह 6:3 — “और एक दूसरे को पुकार पुकारकर कह रहे थे: ‘सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसकी महिमा से भरपूर है!'” [07:48]
4. हमारे पापों के लिए यीशु का घायल होना और उसकी भलाई
गीत के अंतिम भाग में पंजाबी और हिंदी में प्रभु की वफादारी, उसके कोड़े खाने और उसकी भलाई की सुंदर चर्चा है: “मेरे पापा दे तू जखमी होया… क्योंकि यशु भला है, मेरे मन प्रभु की तू आराधना कर।” यह मसीह के क्रूस के बलिदान और उनकी अनंत भलाई की याद दिलाता है।
यशायाह 53:5 — “परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।” [10:33]
भजन संहिता 103:1-2 — “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।” [13:49]
भजन संहिता 106:1 — “यहोवा की स्तुति करो! यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!” [13:22]
निष्कर्ष:
यह संपूर्ण गीत हमें सिखाता है कि यीशु मसीह एक वफादार खुदा हैं जो हमारी पुकार सुनते हैं [11:09]। हमारा संपूर्ण जीवन केवल उनकी आराधना और प्रशंसा के लिए है, क्योंकि उनके जैसा सच्चा मीत और प्रेमी इस संसार में कोई दूसरा नहीं है [15:42]।



