येसु मेरी सुणदा दुआ Lyrics song
मेरी आस ना तोडेगा कभी,
मेरा साथ ना तोडेगा कभी-2
कि येसु मेरी सुणदा दुआ, दुखा
चों मैनू लैंदा छुड़ा-2
कि येसु मेरी सुणदा दुआ……
1. डूंगे पाणी वर दी अग्ग चो,
येसु आण बचौंथ ए छड्डू जांदे जद संगी साथी, येसु
साथ निभौंदा ए
कि कड्ड लैंदा गल नाल ला, दुखां चो लैंदा बचा
2. मेरे वैरी नाल मेरे जो, करदे
पये बुरियाई ए
येसु कोलो ओहना दी कोई,
छुपी नहीं चतुराई ए
है राखा मेरा ज़िन्दा खुदा, दुखां चो लैदा छुड़ा
3. रूह जिस्म दा मालिक
येसु, मैं किस कोलों डरना ए
मेरे लई सब चंग्गा होणा, जो
येसु ने करना ए-2
ओह सदा मेरा करदा भला, दुखां चो लैंदा छुड़ा
गीत का आत्मिक सारांश (Song Summary)
यह मसीही गीत अटूट विश्वास, परमेश्वर की वफादारी और संकट के समय में उनकी सुरक्षा का एक जीवंत प्रमाण है। इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि जब पूरी दुनिया हमारा साथ छोड़ देती है, तब भी प्रभु यीशु मसीह हमारा हाथ थामे रहते हैं। वे न केवल हमारी प्रार्थनाओं को सुनते हैं, बल्कि हमें हर प्रकार के दुखों, दुष्टों की चालों और गहरी मुसीबतों से बाहर निकालते हैं। यह गीत एक विश्वासी को निडर होकर जीने का हौसला देता है, क्योंकि हमारा रखवाला कोई मूर्ति नहीं बल्कि एक “ज़िन्दा खुदा” है।
गीत का अंतरा-वार स्पष्टीकरण और बाइबल के वचन
1. मुख्य भाग (स्थायी): प्रार्थना का उत्तर और दुखों से छुटकारा
“कि येसु मेरी सुणदा दुआ, दुखां चों मैनू लैंदा छुड़ा…”
यह भाग हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर हमारी पुकार को कभी अनसुना नहीं करते। जब हम दुखों से घिरे होते हैं, तो वे हमें छुड़ाने वाले मुक्तिदाता बनकर आते हैं।
- बाइबल का सटीक वचन:भजन संहिता 34:17 “धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको उनके सब कष्टों से छुड़ाता है।”
- स्पष्टीकरण: यह वचन सीधे गीत की इस पंक्ति की पुष्टि करता है कि जब एक विश्वासी प्रभु को पुकारता है, तो स्वर्ग का परमेश्वर उसकी दुआ सुनता है और उसे मानसिक, शारीरिक या आत्मिक दुखों से पूरी तरह आज़ाद करता है।
2. पहला अंतरा: गहरी मुसीबतों में साथ और संगी-साथियों का छोड़ जाना
“डूंगे पाणी वर दी अग्ग चो, येसु आण बचौंथ ए, छड्डू जांदे जद संगी साथी…”
यह अंतरा जीवन की दो बड़ी सच्चाइयों को दर्शाता है: पहली—जब हम आग और गहरे पानी जैसी भयानक परिस्थितियों (बड़ी परीक्षाओं) से गुजरते हैं, और दूसरी—जब दुनिया के लोग या मित्र हमें अकेला छोड़ देते हैं, तब यीशु मसीह गले से लगा लेते हैं।
- बाइबल का सटीक वचन (गहरे पानी और आग के लिए):यशायाह 43:2 “जब तू जल में होकर जाए, मैं तेरे संग संग रहूँगा; और जब तू नदियों में होकर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले, तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न झुलसा सकेगी।”
- बाइबल का सटीक वचन (अपनों के छोड़ जाने पर):भजन संहिता 27:10 “मेरे माता-पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भालेगा।”
- स्पष्टीकरण: ये वचन दर्शाते हैं कि मसीह का प्रेम सांसारिक रिश्तों से ऊपर है। जब परिस्थितियां आग जैसी दर्दनाक और पानी जैसी दम घोटने वाली होती हैं, तब भी प्रभु का अनुग्रह हमें सुरक्षित रखता है। इंसानी रिश्ते बदल सकते हैं, लेकिन यीशु का साथ हमेशा बना रहता है।
3. दूसरा अंतरा: शत्रुओं की चतुराई और ज़िन्दा खुदा की सुरक्षा
“मेरे वैरी नाल मेरे जो, करदे पये बुरियाई ए… है राखा मेरा ज़िन्दा खुदा…”
यह भाग हमें आश्वस्त करता है कि हमारे खिलाफ होने वाली दुष्टों की कोई भी गुप्त योजना परमेश्वर से छिपी नहीं है। वह हमारा जीवित रखवाला है।
- बाइबल का सटीक वचन (परमेश्वर से कुछ नहीं छिपा):इब्रानियों 4:13 “सृष्टि की कोई वस्तु उससे छिपी नहीं है, वरन जिससे हमें काम है, उसकी आँखों के सामने सब वस्तुएं खुली और उघाड़ी हैं।”
- बाइबल का सटीक वचन (शत्रुओं से सुरक्षा के लिए):भजन संहिता 121:7-8 “यहोवा सब विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। यहोवा तेरे आने-जाने में तेरी रक्षा अब से लेकर सर्वदा तक करता रहेगा।”
- स्पष्टीकरण: हमें अपने विरोधियों या गुप्त रूप से बुराई करने वालों से डरने की आवश्यकता नहीं है। हमारा परमेश्वर ‘ज़िन्दा खुदा’ है जो कभी सोता या ऊंघता नहीं है। वह हमारे दुश्मनों की चतुराई को विफल कर देता है और हमें हर विपत्ति से बचाए रखता है।
4. तीसरा अंतरा: आत्मा-देह का मालिक और पूर्ण भरोसा
“रूह जिस्म दा मालिक येसु, मैं किस कोलों डरना ए… जो येसु ने करना ए, ओह सदा मेरा करदा भला…”
यह अंतरा पूरी तरह से समर्पण और निर्भयता का है। जब हम यह मान लेते हैं कि हमारी आत्मा और शरीर का मालिक यीशु है, तो जीवन का सारा डर गायब हो जाता है। हमें पूरा विश्वास होता है कि वह हमारे जीवन में जो कुछ भी करेगा, वह हमारी भलाई के लिए ही होगा।
- बाइबल का सटीक वचन (डर से मुक्ति के लिए):भजन संहिता 27:1 “यहोवा मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किससे डरूँ? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मुझे किसका भय हो?”
- बाइबल का सटीक वचन (भलाई के लिए):रोमियों 8:28 “और हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं; अर्थात् उन्हीं के लिये जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।”
- स्पष्टीकरण: जब यीशु हमारे रूह और जिस्म के मालिक बन जाते हैं, तो भविष्य की चिंता खत्म हो जाती है। रोमियों 8:28 के अनुसार, एक मसीही के जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव अंततः उसकी आत्मिक भलाई का कारण बनते हैं, क्योंकि परमेश्वर की योजनाएं हमेशा कल्याण की होती हैं, विनाश की नहीं।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह गीत केवल गुनगुनाने के लिए नहीं, बल्कि मसीही जीवन की गहरी नींव को मजबूत करने वाला एक आत्मिक संदेश है। यह हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि हमारा भरोसा हमारे “ज़िन्दा खुदा” पर है, तो हमारी जीत निश्चित है। वह हमारी हर दुआ सुनता है और हमें दुखों के दलदल से निकाल कर अपने सीने से लगा लेता है।



