Senao Ka Yahowa Pavitar Hai Lyrics

Senao Ka Yahowa Pavitar Hai Lyrics
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सेनाओं का यहोवा पवित्र है Lyrics song

सेनाओं का यहोवा, 
पवित्र है – पवित्र है तू 
पवित्र पवित्र है, तू पवित्र 
पवित्र है -2 
हाल्लेलुईयाह – 
हाल्लेलुईयाह……

1. मैं तो अशुद्ध होंठों का, मनुष्य 
हूं यहोवा अपनी पवित्न अग्नि 
से, मुझे पवित्न कर ख़ुदा, तेरी 
पवित्रता मुझमें, बनी रहे सदा -2 
सेनाओं का यहोवा….. 
हाल्लेलुईयाह – 
हाल्लेलुईयाह….

2. रात-दिन हम तुझे, पवित्र कहते 
रहें, तेरी पवित्रता की, रौशनी में हम 
चलें स्वर्ग भी रौशन रहे, तेरी
पवित्रता को दे -2 
सेनाओं का यहोवा….. 
हाल्लेलुईयाह – 
हाल्लेलुईयाह….

गीत का आत्मिक सारांश और बाइबल वचनों का स्पष्टीकरण

यह आराधना गीत परमेश्वर की सबसे महान और मुख्य विशेषता—उसकी “पवित्रता” (Holiness) को प्रकट करता है। बाइबल में परमेश्वर को प्रेम, न्याय और दया का सागर कहा गया है, लेकिन उसकी पवित्रता एक ऐसा गुण है जिसकी स्तुति स्वर्गदूत रात-दिन बिना रुके करते हैं। यह गीत मानव की निर्बलता और परमेश्वर की असीम शुद्धता के मिलन को दर्शाता है।

नीचे इस गीत के मुख्य अध्यायों और उनसे जुड़े बाइबल के प्रामाणिक वचनों का पूरा विवरण दिया गया है:

1. सेनाओं के यहोवा की स्वर्गीय आराधना (स्थायी भाव)

गीत का मुख्य केंद्र यहोवा की पवित्रता की घोषणा करना और ‘हाल्लेलुईयाह’ के साथ उसकी महिमा करना है। यह सीधे तौर पर स्वर्ग में होने वाली आराधना को पृथ्वी पर दोहराने जैसा है।

  • यशायाह 6:3 — “और वे एक दूसरे से पुकार पुकारकर कह रहे थे: सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसकी महिमा से भरपूर है।”
    • स्पष्टीकरण: गीत की मुख्य पंक्ति इसी दर्शन से ली गई है। नबी यशायाह ने स्वर्गदूतों (सराफों) को परमेश्वर के सिंहासन के सामने इसी प्रकार ‘पवित्र, पवित्र, पवित्र’ कहकर आराधना करते देखा था।
  • प्रकाशितवाक्य 4:8 — “और चारों प्राणी… रात-दिन बिना विश्राम लिए यह कहते रहते हैं: पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु परमेश्वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आने वाला है।”
    • स्पष्टीकरण: यह वचन प्रमाणित करता है कि नए नियम में भी परमेश्वर की आराधना का मुख्य आधार उसकी पवित्रता ही है। ‘हाल्लेलुईयाह’ का अर्थ है “प्रभु की स्तुति हो”, जो इसी पवित्रता के सामने हमारा आदर प्रकट करता है।

2. अशुद्ध होंठ और पवित्रता की अग्नि (पहला अंतरा)

पहला अंतरा मनुष्य की पापी और कमज़ोर दशा को स्वीकार करने और परमेश्वर से शुद्धिकरण मांगने के विषय में है। जब कोई इंसान परमेश्वर की उपस्थिति में आता है, तो उसे अपनी अशुद्धता का अहसास होता है, और वह शुद्ध होने के लिए खुदा की ‘पवित्र अग्नि’ की मांग करता है।

  • यशायाह 6:5 — “तब मैंने कहा, हाय! हाय! मैं नष्ट हुआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठों का मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठों वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैंने राजाधिराज सेनाओं के यहोवा को अपनी आंखों से देखा है!”
    • स्पष्टीकरण: गीत की यह पंक्ति ‘मैं तो अशुद्ध होंठों का मनुष्य हूं यहोवा’ हूबहू नबी यशायाह के इन शब्दों पर आधारित है, जहाँ वह परमेश्वर के सामने अपनी पवित्रता की कमी को महसूस करता है।
  • यशायाह 6:6-7 — “तब एक सराफ हाथ में अंगारा लिए हुए जिसके उसने वेदी पर से चिमटे से उठा लिया था, मेरे पास उड़कर आया। और उसने उससे मेरे मुंह को छूकर कहा, देख, इसने तेरे होंठों को छू लिया है, इसलिए तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए।”
    • स्पष्टीकरण: गीत में जिस ‘पवित्र अग्नि से शुद्ध करने’ की प्रार्थना की गई है, वह इसी आत्मिक सत्य को दर्शाती है कि केवल परमेश्वर की वेदी की आग ही हमारे जीवन को शुद्ध रख सकती है ताकि उसकी पवित्रता हममें सदा बनी रहे।

3. रौशनी में चलना और रात-दिन स्तुति करना (दूसरा अंतरा)

दूसरा अंतरा कलीसिया के इस कर्तव्य को याद दिलाता है कि हमें न केवल चर्च में, बल्कि अपने दैनिक जीवन में रात-दिन उसकी पवित्रता की गवाही देनी है। हमें अंधकार के कामों को छोड़कर उसकी पवित्रता की ‘रौशनी’ में चलना है, जिससे पूरा स्वर्ग और पृथ्वी रोशन हो उठे।

  • 1 पतरस 1:15-16 — “पर जैसी तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल-चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है: पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं।”
    • स्पष्टीकरण: परमेश्वर की यह स्पष्ट आज्ञा है कि उसके बच्चों को उसकी पवित्रता की रौशनी में चलना चाहिए। गीत की भावना भी यही है कि हमारा जीवन खुदा की पवित्रता को प्रतिबिंबित करे।
  • 1 यूहन्ना 1:7 — “परन्तु यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो हमारी एक दूसरे से सहभागिता है; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है।”
    • स्पष्टीकरण: यह वचन गीत की इस पंक्ति को स्पष्ट करता है कि ‘तेरी पवित्रता की रौशनी में हम चलें’। जब हम मसीह की ज्योति में चलते हैं, तो हमारा जीवन पूरी तरह बदल जाता है।
  • भजन संहिता 36:9 — “क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाते हैं।”
    • स्पष्टीकरण: परमेश्वर की उपस्थिति ही वह स्वर्ग को रोशन करने वाली सामर्थ्य है, जिसकी महिमा पूरा ब्रह्मांड गाता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

यह गीत केवल गाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से टूटे हुए दिल से परमेश्वर के सामने आत्म-समर्पण करने का माध्यम है। यह हमें याद दिलाता है कि ‘सेनाओं का यहोवा’ अत्यधिक पवित्र है, और यदि हमें उसकी संगति में बने रहना है, तो हमें अपने अशुद्ध होंठों और जीवनों को उसकी पवित्र आत्मा की वेदी की आग से शुद्ध कराना होगा ताकि हम उसकी महिमा और ज्योति के सच्चे गवाह बन सकें।

Senao Ka Yahowa Pavitar Hai Lyrics in hindi

सेनाओं का यहोवा पवित्र है Lyrics song in hindi

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